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हिन्दी व्याकरण

संधि

संधि हिन्दी व्याकरण का एक अति महत्वपूर्ण अध्याय है जिसमें दो वर्णों के मेल से उत्पन्न परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। SSC, बैंक, रेलवे, CTET, राज्य PSC और शिक्षक-भर्ती परीक्षाओं में संधि-विच्छेद के 2–4 प्रश्न अवश्य आते हैं।

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परीक्षा में महत्व

SSC CHSL/CGL की हिन्दी अनुभाग में 2–3 अंक संधि से, UPPSC/RPSC/BPSC में संधि-विच्छेद बहुत बार पूछा जाता है। सटीकता आसान है यदि नियम याद हों।

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संधि की परिभाषा एवं भेद

दो वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे 'संधि' कहते हैं।

परीक्षा-टिपसंधि का प्रयोग केवल तत्सम (संस्कृत-मूलक) शब्दों में होता है। विदेशी या तद्भव शब्दों में नहीं — जैसे 'चायपत्ती', 'स्कूल' में संधि नहीं होती।
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स्वर संधि के पाँच भेद

जब दो स्वर मिलते हैं और उनसे एक नया रूप बनता है — उसे स्वर संधि कहते हैं।

परीक्षा-टिपस्वर संधि में सबसे ज्यादा प्रश्न दीर्घ और गुण संधि से आते हैं — इन्हें मुख्य रूप से कंठस्थ करें।
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व्यंजन संधि के प्रमुख नियम

व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाले परिवर्तन को व्यंजन संधि कहते हैं।

परीक्षा-टिप'त्' से जुड़े नियम परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाते हैं — सत् + जन = सज्जन; उत् + लास = उल्लास; तत् + लीन = तल्लीन।
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विसर्ग संधि के नियम

विसर्ग (ः) का स्वर या व्यंजन से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।

परीक्षा-टिप'मनः, यशः, तपः, अधः' जैसे विसर्गांत शब्दों के संधि-विच्छेद बहुत बार पूछे जाते हैं।
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शॉर्ट ट्रिक्स

स्वर संधि — 'दीर्घ की पहचान सेकेंड में'
यदि दोनों मेल वाले स्वर एक ही (सजातीय) हों — अ+अ, इ+इ, उ+उ — तो परिणाम दीर्घ होगा (आ, ई, ऊ)।
गुण संधि — 'अ+इ=ए, अ+उ=ओ, अ+ऋ=अर्'
अ या आ के बाद अलग स्वर आए तो — इ/ई → ए, उ/ऊ → ओ, ऋ → अर्। बस यह त्रिकोणीय सूत्र याद रखें।
त् वाली व्यंजन संधि — 'दूसरा अक्षर दोगुना'
त् + च/ज/ट/ल = च्च/ज्ज/ट्ट/ल्ल — दूसरे अक्षर का द्वित्व बनता है।
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रिवीज़न के मुख्य बिंदु

  • संधि के तीन भेद — स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि।
  • स्वर संधि के पाँच उपभेद — दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण्, अयादि।
  • संधि केवल तत्सम (संस्कृत-मूल) शब्दों में होती है।
  • संधि-विच्छेद = संधि-शब्द को मूल रूपों में तोड़ना।
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