हिन्दी व्याकरण

संधि — स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि के नियम

संधि हिन्दी व्याकरण का एक अति महत्वपूर्ण अध्याय है जिसमें दो वर्णों के मेल से उत्पन्न परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। SSC, बैंक, रेलवे, CTET, राज्य PSC और शिक्षक-भर्ती परीक्षाओं में संधि-विच्छेद के 2–4 प्रश्न अवश्य आते हैं।

परीक्षा में महत्व: SSC CHSL/CGL की हिन्दी अनुभाग में 2–3 अंक संधि से, UPPSC/RPSC/BPSC में संधि-विच्छेद बहुत बार पूछा जाता है। सटीकता आसान है यदि नियम याद हों।

1संधि की परिभाषा एवं भेद

दो वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे 'संधि' कहते हैं।

संधि के तीन प्रमुख भेद हैं — (1) स्वर संधि — स्वर के साथ स्वर का मेल। (2) व्यंजन संधि — स्वर के साथ व्यंजन या व्यंजन के साथ व्यंजन का मेल। (3) विसर्ग संधि — विसर्ग (ः) के साथ स्वर/व्यंजन का मेल। 'संधि-विच्छेद' का अर्थ है — संधि से बने शब्द को मूल रूपों में अलग करना।

उदाहरण
  • स्वर संधि: विद्या + आलय = विद्यालय (आ + आ = आ)।
  • व्यंजन संधि: सत् + जन = सज्जन (त् + ज = ज्ज)।
  • विसर्ग संधि: नमः + ते = नमस्ते (विसर्ग + त = स्त)।
  • संधि-विच्छेद: 'देवालय' = देव + आलय।
परीक्षा-टिप: संधि का प्रयोग केवल तत्सम (संस्कृत-मूलक) शब्दों में होता है। विदेशी या तद्भव शब्दों में नहीं — जैसे 'चायपत्ती', 'स्कूल' में संधि नहीं होती।

2स्वर संधि के पाँच भेद

जब दो स्वर मिलते हैं और उनसे एक नया रूप बनता है — उसे स्वर संधि कहते हैं।

स्वर संधि के पाँच भेद हैं — (1) दीर्घ संधि — सजातीय स्वरों के मेल से दीर्घ स्वर बनता है (अ+अ=आ, इ+इ=ई, उ+उ=ऊ)। (2) गुण संधि — अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्। (3) वृद्धि संधि — अ/आ + ए/ऐ = ऐ; अ/आ + ओ/औ = औ। (4) यण् संधि — इ/ई + भिन्न स्वर = य्; उ/ऊ + भिन्न स्वर = व्; ऋ + भिन्न स्वर = र्। (5) अयादि संधि — ए/ऐ/ओ/औ + भिन्न स्वर = क्रमशः अय्/आय्/अव्/आव्।

उदाहरण
  • दीर्घ संधि: हिम + आलय = हिमालय (अ+आ=आ); रवि + इन्द्र = रवीन्द्र (इ+इ=ई)।
  • गुण संधि: सुर + इन्द्र = सुरेन्द्र (अ+इ=ए); महा + ऋषि = महर्षि (आ+ऋ=अर्)।
  • वृद्धि संधि: एक + एक = एकैक (अ+ए=ऐ); महा + औषध = महौषध (आ+औ=औ)।
  • यण् संधि: इति + आदि = इत्यादि (इ+आ=य्+आ); सु + आगत = स्वागत (उ+आ=व्+आ)।
परीक्षा-टिप: स्वर संधि में सबसे ज्यादा प्रश्न दीर्घ और गुण संधि से आते हैं — इन्हें मुख्य रूप से कंठस्थ करें।

3व्यंजन संधि के प्रमुख नियम

व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाले परिवर्तन को व्यंजन संधि कहते हैं।

मुख्य नियम — (1) त् + च/छ = च्च/च्छ; त् + ज/झ = ज्ज/ज्झ; त् + ट/ठ = ट्ट/ट्ठ; त् + ल = ल्ल। (2) म् + किसी व्यंजन = अनुस्वार (ं) या उसी वर्ग का पंचम वर्ण। (3) न् + किसी व्यंजन = ण्/ञ्/अनुस्वार। (4) क्/प्/त् + वर्गीय व्यंजन = सघोष/अघोष परिवर्तन।

उदाहरण
  • त् + च = च्च: सत् + चरित्र = सच्चरित्र।
  • त् + ज = ज्ज: सत् + जन = सज्जन।
  • म् + क = ङ्क/अनुस्वार: सम् + कल्प = संकल्प।
  • न् + प = म्: अहन् + पति → अहर्पति (विशेष नियम)।
परीक्षा-टिप: 'त्' से जुड़े नियम परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाते हैं — सत् + जन = सज्जन; उत् + लास = उल्लास; तत् + लीन = तल्लीन।

4विसर्ग संधि के नियम

विसर्ग (ः) का स्वर या व्यंजन से मेल होने पर जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।

मुख्य नियम — (1) विसर्ग + क/ख/प/फ = विसर्ग ज्यों का त्यों। (2) विसर्ग + च/छ = श्; विसर्ग + ट/ठ = ष्; विसर्ग + त/थ = स्। (3) विसर्ग + स्वर (अ को छोड़कर) = र्। (4) अ + विसर्ग + अ = ओ। (5) विसर्ग + ग/घ/ज/झ/द/ध/ब/भ/य/र/ल/व/ह = र्।

उदाहरण
  • अंतः + करण = अंतःकरण (अपरिवर्तित)।
  • नमः + ते = नमस्ते (विसर्ग + त = स्त)।
  • मनः + रथ = मनोरथ (अ + विसर्ग + र = ओ)।
  • निः + चय = निश्चय (विसर्ग + च = श्च)।
परीक्षा-टिप: 'मनः, यशः, तपः, अधः' जैसे विसर्गांत शब्दों के संधि-विच्छेद बहुत बार पूछे जाते हैं।

शॉर्ट ट्रिक्स & शॉर्टकट्स

परीक्षा में इन ट्रिक्स का प्रयोग करें। हर ट्रिक के साथ एक हल किया हुआ उदाहरण भी दिया गया है ताकि आप स्वयं सत्यापित कर सकें।

ट्रिक 1स्वर संधि — 'दीर्घ की पहचान सेकेंड में'

यदि दोनों मेल वाले स्वर एक ही (सजातीय) हों — अ+अ, इ+इ, उ+उ — तो परिणाम दीर्घ होगा (आ, ई, ऊ)।

उदाहरण: विद्या + आलय → आ + आ → आ → विद्यालय।
ट्रिक 2गुण संधि — 'अ+इ=ए, अ+उ=ओ, अ+ऋ=अर्'

अ या आ के बाद अलग स्वर आए तो — इ/ई → ए, उ/ऊ → ओ, ऋ → अर्। बस यह त्रिकोणीय सूत्र याद रखें।

उदाहरण: देव + इन्द्र = देवेन्द्र (अ+इ=ए)।
ट्रिक 3त् वाली व्यंजन संधि — 'दूसरा अक्षर दोगुना'

त् + च/ज/ट/ल = च्च/ज्ज/ट्ट/ल्ल — दूसरे अक्षर का द्वित्व बनता है।

उदाहरण: उत् + लास = उल्लास; तत् + लीन = तल्लीन।
ट्रिक 4विसर्ग + र = ओ की पहचान

जब 'अ' के बाद विसर्ग और फिर र/ग/घ/ज/य/ल/व/ह आए — तो विसर्ग 'ओ' में बदल जाता है।

उदाहरण: मनः + रथ = मनोरथ; तपः + वन = तपोवन।

रिवीज़न के मुख्य बिंदु

  • संधि के तीन भेद — स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि।
  • स्वर संधि के पाँच उपभेद — दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण्, अयादि।
  • संधि केवल तत्सम (संस्कृत-मूल) शब्दों में होती है।
  • संधि-विच्छेद = संधि-शब्द को मूल रूपों में तोड़ना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संधि वर्ण-स्तर पर होती है (दो वर्णों का मेल), जबकि समास शब्द-स्तर पर होता है (दो या अधिक शब्दों का मेल)। 'विद्या+आलय=विद्यालय' संधि है, परंतु 'राजपुत्र (राजा का पुत्र)' समास।

अ/आ + इ/ई = ए; अ/आ + उ/ऊ = ओ; अ/आ + ऋ = अर्। यह तीन-पंक्ति का नियम याद रखें — परीक्षा के सभी प्रश्न इसी से हल हो जाते हैं।