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भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय वायु सेना के हल्के लड़ाकू विमान (LCA) तेजस एमके-2 के लिए जीई-414 (GE-F414) जेट इंजनों के सह-उत्पादन के लिए एक ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इस सौदे के तहत जनरल इलेक्ट्रिक (GE) एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मिलकर भारत में इन इंजनों का निर्माण करेंगे, जिसमें 80 प्रतिशत प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) शामिल है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय सेना के सहयोग से स्वदेशी रूप से विकसित मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। यह परीक्षण पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया, जिसने मिसाइल की सटीकता और 'दागो और भूल जाओ' (Fire-and-Forget) क्षमता को साबित किया।
भारत और ओमान ने पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोधी अभियानों और सूचना साझाकरण को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक 'रणनीतिक समुद्री सुरक्षा सहयोग समझौता 2026' पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाता है और भारत की 'सागर' (SAGAR) नीति को मजबूती प्रदान करता है।
भारतीय नौसेना और फ्रांसीसी नौसेना के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'वरुण 2026' का 24वां संस्करण अरब सागर में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अभ्यास में दोनों देशों के अत्याधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों और लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा देना है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 'प्रोजेक्ट कुशा' के तहत भारत के पहले स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (LRSAM) प्रणाली का सफल परीक्षण किया है। यह प्रणाली भारतीय वायु सेना की हवाई रक्षा क्षमताओं को एक नया आयाम प्रदान करेगी।
भारत का 'प्रोजेक्ट 75-अल्फा' भारतीय नौसेना की परमाणु शक्ति संपन्न पनडुब्बियों के निर्माण का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और निवारक क्षमता को मजबूत करना है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने जून 2026 में अपने महत्वाकांक्षी 'गगनयान-3' मिशन के लिए अंतिम परीक्षणों की घोषणा की है। यह मिशन भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में सुरक्षित रूप से भेजना और वापस लाना है।
भारत सरकार ने 2030 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने के लिए एक महत्वाकांक्षी 'रक्षा निर्यात विजन 2030' का अनावरण किया है। यह नीति 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों के वैश्विक प्रसार और रणनीतिक साझेदारी पर केंद्रित है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के तहत मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी में महत्वपूर्ण प्रगति की है। साथ ही, 2035 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम तेज हो गया है।
भारत और आसियान (ASEAN) ने समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक गलियारों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक नए रणनीतिक ढांचे पर सहमति व्यक्त की है। यह साझेदारी चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम 'तेजस Mk2' अपने अंतिम परीक्षण चरणों में है। यह विमान भारतीय वायु सेना (IAF) की लड़ाकू क्षमता को आधुनिक बनाने और विदेशी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने बहुप्रतीक्षित शुक्रयान-1 मिशन की वैज्ञानिक पेलोड और लॉन्च विंडो की घोषणा की है। यह मिशन शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह की संरचना का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला समर्पित प्रयास होगा।
जोजीला टनल परियोजना भारत की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है, जो श्रीनगर और लेह के बीच साल भर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। यह 14.15 किलोमीटर लंबी सुरंग हिमालय की दुर्गम चोटियों के नीचे से गुजरती है और लद्दाख को शेष भारत से जोड़ती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर बाड़ लगाने के कार्य के दौरान बीएसएफ और स्थानीय निवासियों के बीच हालिया झड़पें सुरक्षा और मानवाधिकारों के बीच के जटिल संतुलन को उजागर करती हैं। यह विवाद मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, आजीविका के नुकसान और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंधों को लेकर है।
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने निजी कंपनियों के लिए एलवीएम-3 (LVM-3) लॉन्च वाहन कार्यक्रम के द्वार खोल दिए हैं। यह कदम भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का अध्ययन करने के लिए 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की है। यह मिशन शुक्र के घने वायुमंडल, ज्वालामुखी गतिविधियों और सौर हवाओं के साथ इसकी अंतःक्रिया को समझने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
भारत के 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' ने जून 2026 में अपनी स्थापना के बाद से महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए हैं। इस मिशन का लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है, जिससे 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
भारत के पहले निजी तौर पर विकसित डीप-सी माइनिंग रोबोट 'समुद्रयान-1' का 8 जून 2026 को बंगाल की खाड़ी में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। यह रोबोट 6,000 मीटर की गहराई तक जाकर पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स जैसे मूल्यवान खनिजों की खोज और संग्रह करने में सक्षम है। इस उपलब्धि से भारत को गहरे समुद्र में खनन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
भारतीय नौसेना ने 8 जून 2026 को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से 'समुद्र प्रहरी' नामक एक बड़े पैमाने के अभ्यास का सफलतापूर्वक संचालन किया। इस अभ्यास में विभिन्न नौसैनिक संपत्तियों, जिसमें युद्धपोत, पनडुब्बियां और समुद्री गश्ती विमान शामिल थे, ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतर-संचालनीयता और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना था।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 8 जून, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी चंद्रयान-4 मिशन की लॉन्चिंग की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक रोवर और एक स्थायी बेस स्टेशन स्थापित करना है। यह मिशन भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमताओं को और आगे बढ़ाएगा और भविष्य के मानवयुक्त चंद्र मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा और अनुभव प्रदान करेगा। लॉन्चिंग 2027 के अंत तक होने की उम्मीद है।