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भारत के पहले निजी तौर पर विकसित डीप-सी माइनिंग रोबोट 'समुद्रयान-1' का 8 जून 2026 को बंगाल की खाड़ी में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। यह रोबोट 6,000 मीटर की गहराई तक जाकर पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स जैसे मूल्यवान खनिजों की खोज और संग्रह करने में सक्षम है। इस उपलब्धि से भारत को गहरे समुद्र में खनन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
भारतीय नौसेना ने 8 जून 2026 को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से 'समुद्र प्रहरी' नामक एक बड़े पैमाने के अभ्यास का सफलतापूर्वक संचालन किया। इस अभ्यास में विभिन्न नौसैनिक संपत्तियों, जिसमें युद्धपोत, पनडुब्बियां और समुद्री गश्ती विमान शामिल थे, ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतर-संचालनीयता और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना था।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 8 जून, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी चंद्रयान-4 मिशन की लॉन्चिंग की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक रोवर और एक स्थायी बेस स्टेशन स्थापित करना है। यह मिशन भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमताओं को और आगे बढ़ाएगा और भविष्य के मानवयुक्त चंद्र मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा और अनुभव प्रदान करेगा। लॉन्चिंग 2027 के अंत तक होने की उम्मीद है।
भारत ने 7 जून, 2026 को ओडिशा तट से अपनी स्वदेशी रूप से विकसित इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) 'अग्नि-VI' का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करता है और उसे चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल करता है जिनके पास ऐसी उन्नत मिसाइल तकनीक है। अग्नि-VI की मारक क्षमता 8,000 किलोमीटर से अधिक है और यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक से लैस है।
भारत और जापान ने 7 जून, 2026 को अपनी रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करते हुए हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और परिवहन में सहयोग बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों को अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी भूमिका निभाने में मदद करना है। यह समझौता स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास और तैनाती में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करेगा।
भारत ने 7 जून, 2026 को अपने पहले गहरे समुद्र में खनन मिशन 'समुद्रयान-2' के मानवयुक्त सबमर्सिबल 'मत्स्य-6000' का बंगाल की खाड़ी में सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह मिशन भारत को गहरे समुद्र के खनिज संसाधनों की खोज और उनके सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाता है। इस उपलब्धि के साथ, भारत गहरे समुद्र में मानवयुक्त वाहन संचालित करने की क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 7 जून, 2026 को 'चंद्रयान-4' मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर एक उन्नत रोवर तैनात करने और वहाँ की भूवैज्ञानिक संरचना तथा जल-बर्फ की उपस्थिति का विस्तृत अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह भारत के चंद्र अन्वेषण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत ने 6 जून, 2026 को नई दिल्ली में पहले भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसमें पांच मध्य एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है, जिससे भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति को नई गति मिलेगी।
भारत ने अपनी पहली पूरी तरह से स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग लैब का उद्घाटन किया है, जो देश को क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह लैब अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देगी, जिससे भविष्य की कंप्यूटिंग क्षमताओं में भारत की स्थिति मजबूत होगी और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग शिखर सम्मेलन 6 जून, 2026 को नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें भारत और 54 अफ्रीकी देशों के रक्षा मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों ने भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और रक्षा विनिर्माण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, जिससे एक नई रणनीतिक साझेदारी की नींव रखी गई है। यह भारत की 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति और अफ्रीका के साथ बढ़ते संबंधों को दर्शाता है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 6 जून, 2026 को फ्रेंच गुयाना के कौरौ से एरियन-5 रॉकेट का उपयोग करके अपने अगली पीढ़ी के संचार उपग्रह GSAT-24R का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह उपग्रह भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और विभिन्न संचार सेवाओं को बेहतर बनाएगा।
भारत और जापान की नौसेनाओं ने 6 जून, 2026 को बंगाल की खाड़ी में 'समुद्र सेतु 2026' नामक एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया। यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने, अंतरसंचालनीयता बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें पनडुब्बी रोधी युद्ध, हवाई रक्षा और समुद्री टोही सहित विभिन्न जटिल युद्धाभ्यास शामिल हैं।
भारतीय नौसेना ने 6 जून, 2026 को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति और अंतरसंचालनीयता को मजबूत करने के उद्देश्य से 'समुद्र शक्ति 2026' नामक एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास का सफलतापूर्वक समापन किया। इस अभ्यास में भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई प्रमुख नौसेनाओं ने भाग लिया, जिसका मुख्य फोकस समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) संचालन पर था।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 6 जून, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी 'चंद्रयान-4' मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ की उपलब्धता और भविष्य की मानव बस्तियों के लिए उपयुक्त स्थलों का विस्तृत अध्ययन करना है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 5 जून, 2026 को नई पीढ़ी की अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) 'अग्नि-VI' का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया, जिससे भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अग्नि-VI की मारक क्षमता 8,000 किलोमीटर से अधिक है और यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक से लैस है।
भारत ने 5 जून, 2026 को नई दिल्ली में 'इंडो-पैसिफिक समुद्री सुरक्षा वार्ता' की सफलतापूर्वक मेजबानी की, जिसमें 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस वार्ता का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना, सहयोग बढ़ाना और एक स्वतंत्र, खुले तथा नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बनाए रखना था। वार्ता में एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया गया, जिसमें क्षेत्रीय शांति और समृद्धि के लिए साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
भारतीय नौसेना ने दक्षिण चीन सागर में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास 'समुद्र शक्ति-2026' में अपनी उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमताओं का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में भारत के स्वदेशी रूप से विकसित ASW प्लेटफॉर्म और उन्नत सोनार प्रणालियों का उपयोग किया गया, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। यह अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
भारत ने 4 जून, 2026 को ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी रूप से विकसित 'अग्नि-VI' अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह मिसाइल भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है, जिसमें मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक शामिल है और इसकी मारक क्षमता 8,000 से 10,000 किलोमीटर तक है। यह परीक्षण भारत को उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करता है जिनके पास ऐसी उन्नत मिसाइल क्षमताएं हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 जून, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी 'चंद्रयान-4' मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर एक उन्नत रोवर को तैनात करना है, जो भविष्य के चंद्र अन्वेषण और संभावित मानव मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करेगा। यह प्रक्षेपण भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमताओं में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
भारत और फ्रांस ने 4 जून, 2026 को 'समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी' पर एक नई रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री डोमेन जागरूकता, क्षमता निर्माण और सतत महासागर प्रबंधन में सहयोग को गहरा करना है। यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।