ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों की खोज
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का अध्ययन करने के लिए 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की है। यह मिशन शुक्र के घने वायुमंडल, ज्वालामुखी गतिविधियों और सौर हवाओं के साथ इसकी अंतःक्रिया को समझने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO का शुक्रयान-2 शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह के अध्ययन के लिए है।
- यह मिशन शुक्र के घने बादलों के नीचे की मैपिंग के लिए रडार का उपयोग करेगा।
- शुक्रयान-2 को GSLV रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा।
- इसका मुख्य उद्देश्य शुक्र के वायुमंडलीय रसायन और ज्वालामुखी गतिविधियों को समझना है।
- यह मिशन 'एरो-ब्रेकिंग' तकनीक का उपयोग करके शुक्र की कक्षा में प्रवेश करेगा।
- शुक्र को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता है, लेकिन इसका वातावरण अत्यधिक गर्म है।
- मिशन में 'सिंथेटिक अपर्चर रडार' (SAR) जैसे उन्नत उपकरण शामिल हैं।
- यह मिशन नासा और ESA के शुक्र मिशनों के साथ डेटा साझा करेगा।
- शुक्रयान-2 के उपकरण अत्यधिक संक्षारक वातावरण के लिए विशेष रूप से कोटिंग किए गए हैं।
- यह भारत का पहला अंतरग्रहीय मिशन है जो शुक्र के वायुमंडल के रहस्यों को सुलझाएगा।
Why In News
10 जून 2026 को ISRO ने शुक्रयान-2 के लिए लॉन्च विंडो और वैज्ञानिक उपकरणों (Payloads) की अंतिम सूची जारी की है। यह मिशन भारत की अंतरग्रहीय अन्वेषण क्षमताओं को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा, जो मंगलयान और चंद्रयान की सफलता के बाद एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
Syllabus Connection
छात्रों को ग्रहों के अन्वेषण, ऑर्बिटल मैकेनिक्स और ISRO के अंतरग्रहीय मिशनों की तकनीकी चुनौतियों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| Who | ISRO | भारत की अंतरिक्ष कूटनीति और वैश्विक वैज्ञानिक नेतृत्व |
| What | शुक्रयान-2 मिशन | अंतरग्रहीय अन्वेषण का वैज्ञानिक और रणनीतिक महत्व |
| Why | शुक्र के वायुमंडल का अध्ययन | पृथ्वी के जलवायु विकास को समझने में शुक्र का महत्व |
| How | GSLV रॉकेट और रडार तकनीक | कठिन वातावरणीय परिस्थितियों में अंतरिक्ष यान का स्थायित्व |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
Key Facts to Remember: ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों की खोज
- ISRO का शुक्रयान-2 शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह के अध्ययन के लिए है।
- यह मिशन शुक्र के घने बादलों के नीचे की मैपिंग के लिए रडार का उपयोग करेगा।
- शुक्रयान-2 को GSLV रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा।
- इसका मुख्य उद्देश्य शुक्र के वायुमंडलीय रसायन और ज्वालामुखी गतिविधियों को समझना है।
- यह मिशन 'एरो-ब्रेकिंग' तकनीक का उपयोग करके शुक्र की कक्षा में प्रवेश करेगा।
- शुक्र को पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता है, लेकिन इसका वातावरण अत्यधिक गर्म है।
- मिशन में 'सिंथेटिक अपर्चर रडार' (SAR) जैसे उन्नत उपकरण शामिल हैं।
- यह मिशन नासा और ESA के शुक्र मिशनों के साथ डेटा साझा करेगा।
- शुक्रयान-2 के उपकरण अत्यधिक संक्षारक वातावरण के लिए विशेष रूप से कोटिंग किए गए हैं।
- यह भारत का पहला अंतरग्रहीय मिशन है जो शुक्र के वायुमंडल के रहस्यों को सुलझाएगा।
Practice Questions
Q1. शुक्रयान-2 मिशन का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- चंद्रमा की सतह पर पानी की खोज
- शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का अध्ययन
- मंगल ग्रह पर जीवन के संकेत ढूंढना
- सूर्य के कोरोना का अध्ययन
Explanation: शुक्रयान-2 का मुख्य उद्देश्य शुक्र के घने वायुमंडल, सतह की विशेषताओं और ज्वालामुखी गतिविधियों का वैज्ञानिक अध्ययन करना है।
Q2. शुक्र ग्रह को पृथ्वी का 'जुड़वां ग्रह' क्यों कहा जाता है?
- क्योंकि यह सूर्य के सबसे करीब है
- क्योंकि इसका आकार और घनत्व पृथ्वी के समान है
- क्योंकि इसमें पृथ्वी की तरह ही जीवन है
- क्योंकि इसका घूर्णन काल पृथ्वी के बराबर है
Explanation: शुक्र और पृथ्वी का आकार, द्रव्यमान और घनत्व लगभग समान है, इसलिए इसे पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता है।
Q3. शुक्रयान-2 के लिए किस रॉकेट का उपयोग किया जाएगा?
- PSLV
- GSLV
- SSLV
- LVM3
Explanation: शुक्रयान-2 को भारी पेलोड क्षमता के कारण GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) रॉकेट द्वारा लॉन्च किया जाएगा।
Q4. शुक्र के वायुमंडल में मुख्य रूप से कौन सी गैस पाई जाती है?
- नाइट्रोजन
- ऑक्सीजन
- कार्बन डाइऑक्साइड
- हाइड्रोजन
Explanation: शुक्र का वायुमंडल 96% से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड से बना है, जो वहां के अत्यधिक तापमान (ग्रीनहाउस प्रभाव) का कारण है।
Q5. शुक्रयान-2 में बादलों के पार देखने के लिए किस तकनीक का उपयोग किया जाएगा?
- ऑप्टिकल कैमरा
- सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR)
- स्पेक्ट्रोमीटर
- लेजर अल्टीमीटर
Explanation: शुक्र के घने बादलों के पार सतह की मैपिंग करने के लिए सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) का उपयोग किया जाएगा।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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