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भारत का नया 'ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क' लॉन्च: सतत विकास को बढ़ावा

भारत सरकार ने सतत विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक नया 'ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क' लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल निवेश को आकर्षित करना है। यह फ्रेमवर्क देश के हरित लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Key Points for Quick Revision

  • भारत सरकार ने नया 'ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क' लॉन्च किया।
  • इसका उद्देश्य सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण आकर्षित करना है।
  • फ्रेमवर्क अक्षय ऊर्जा, जल प्रबंधन, हरित परिवहन आदि परियोजनाओं को कवर करेगा।
  • इसमें सख्त पर्यावरणीय मानक और पारदर्शिता के दिशानिर्देश शामिल हैं।
  • यह भारत को वैश्विक हरित वित्त बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।
  • यह भारत की जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं को मजबूत करता है।

Practice Questions

Q1. भारत के नए 'ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क' का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?

  1. केवल सरकारी घाटे को पूरा करना
  2. पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण आकर्षित करना
  3. विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना
  4. कृषि ऋण प्रदान करना

Explanation: नए ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य सतत विकास और पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाना है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन सी परियोजना नए ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क के तहत वित्तपोषण के लिए योग्य नहीं होगी?

  1. सौर ऊर्जा परियोजनाएं
  2. कोयला आधारित बिजली संयंत्र
  3. अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र
  4. इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

Explanation: ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क का उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं को वित्तपोषित करना है। कोयला आधारित बिजली संयंत्र पर्यावरण के लिए हानिकारक होते हैं और इस फ्रेमवर्क के तहत योग्य नहीं होंगे।

Q3. ग्रीन बॉन्ड फ्रेमवर्क में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रावधान किया गया है?

  1. केवल वार्षिक वित्तीय ऑडिट
  2. परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव पर नियमित रिपोर्टिंग
  3. बॉन्ड जारी करने वाले बैंक की गोपनीयता
  4. निवेशकों को कोई जानकारी नहीं देना

Explanation: फ्रेमवर्क में जारी किए गए बॉन्ड से प्राप्त आय के उपयोग और परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव पर नियमित रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।