भारत में 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन
भारत ने 16 मई 2026 को राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत अपनी पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया। यह इकाई, जो नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके हाइड्रोजन का उत्पादन करेगी, देश के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को प्राप्त करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का एक वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत की पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन 16 मई 2026 को गुजरात के कच्छ जिले में किया गया।
- इस इकाई को रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें लगभग 2,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
- इकाई की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 10 टन प्रति दिन (TPD) ग्रीन हाइड्रोजन है और यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है।
- यह राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसे जनवरी 2023 में मंजूरी मिली थी।
- मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
- ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा होता है, जिससे कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होता।
- यह इकाई ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल जैसे डेरिवेटिव के उत्पादन में भी सहायक होगी।
- परियोजना से प्रति वर्ष लगभग 1.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
- यह भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
- प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक का उपयोग किया गया है।
Why In News
भारत ने 16 मई 2026 को अपनी पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन किया है, जो राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह घटना भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और वैश्विक जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों में योगदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Syllabus Connection
यह खबर भारत के ऊर्जा संक्रमण, नवीकरणीय ऊर्जा के विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों से संबंधित है। छात्रों को ग्रीन हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी, इसके अनुप्रयोगों और राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्यों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन। | राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत की ऊर्जा सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में मील का पत्थर। |
| कब | 16 मई 2026 को उद्घाटन। | जनवरी 2023 में मिशन की मंजूरी के बाद का महत्वपूर्ण कार्यान्वयन चरण। |
| कहाँ | गुजरात के कच्छ जिले में। | नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों की प्रचुरता वाले क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन हब के विकास का संकेत। |
| क्षमता | 10 टन प्रति दिन (TPD) ग्रीन हाइड्रोजन। | बड़े पैमाने पर उत्पादन की दिशा में पहला कदम, 2030 तक 5 MMT लक्ष्य प्राप्त करने की नींव। |
| महत्व | कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा आत्मनिर्भरता। | भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के वैश्विक उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना, जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों में योगदान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Banking (IBPS / SBI) | Low | 1–2 | Occasionally tested via banking technology, fintech, or climate-science crossovers. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: भारत में 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन
- भारत की पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन 16 मई 2026 को गुजरात के कच्छ जिले में किया गया।
- इस इकाई को रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें लगभग 2,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
- इकाई की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 10 टन प्रति दिन (TPD) ग्रीन हाइड्रोजन है और यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है।
- यह राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसे जनवरी 2023 में मंजूरी मिली थी।
- मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
- ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा होता है, जिससे कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होता।
- यह इकाई ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल जैसे डेरिवेटिव के उत्पादन में भी सहायक होगी।
- परियोजना से प्रति वर्ष लगभग 1.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
- यह भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
- प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक का उपयोग किया गया है।
Practice Questions
Q1. भारत की पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन किस राज्य में किया गया है?
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
Explanation: भारत की पहली वाणिज्यिक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन इकाई का उद्घाटन गुजरात के कच्छ जिले में किया गया है। यह स्थान नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, विशेष रूप से सौर ऊर्जा, की प्रचुरता के कारण ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए आदर्श है।
Q2. राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भारत सरकार द्वारा किस वर्ष मंजूरी दी गई थी?
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
Explanation: राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को भारत सरकार द्वारा जनवरी 2023 में मंजूरी दी गई थी। इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
Q3. राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का 2030 तक प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य क्या है?
- 1 मिलियन मीट्रिक टन (MMT)
- 3 मिलियन मीट्रिक टन (MMT)
- 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT)
- 10 मिलियन मीट्रिक टन (MMT)
Explanation: राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। यह लक्ष्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
Q4. ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में किस प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है?
- दहन (Combustion)
- पायरोलिसिस (Pyrolysis)
- इलेक्ट्रोलिसिस (Electrolysis)
- गैसीकरण (Gasification)
Explanation: ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा किया जाता है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि हाइड्रोजन उत्पादन में कोई ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन न हो।
Q5. भारत ने किस वर्ष तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य रखा है?
- 2030
- 2040
- 2050
- 2070
Explanation: भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य रखा है। ग्रीन हाइड्रोजन जैसी स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का विकास और उपयोग इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — भारत में 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत पहली वाणिज…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
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