भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: चरण-II का शुभारंभ और ऊर्जा सुरक्षा में भूमिका
भारत सरकार ने 22 मई, 2026 को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के दूसरे चरण का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह चरण उत्पादन क्षमता बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और हरित हाइड्रोजन के उपयोग को विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत करने पर केंद्रित है। इस पहल से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
2-Minute Summary (TL;DR)
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का चरण-II 22 मई, 2026 को भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया।
- मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- मिशन को जनवरी 2023 में ₹19,744 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ मंजूरी मिली थी।
- चरण-II में ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा, जिससे कुल परिव्यय ₹49,744 करोड़ हो जाएगा।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है।
- हरित हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से उत्पन्न होता है।
- मिशन के प्रमुख घटकों में SIGHT कार्यक्रम, पायलट परियोजनाएं, अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास शामिल हैं।
- यह मिशन भारत को 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
- हरित हाइड्रोजन का उपयोग उर्वरक, रिफाइनरी, स्टील, सीमेंट और भारी परिवहन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इस मिशन का नोडल मंत्रालय है।
- हरित हाइड्रोजन खरीद दायित्व (GHPOs) उद्योगों में हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देंगे।
- यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करेगी।
Why In News
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के चरण-II का औपचारिक शुभारंभ 22 मई, 2026 को किया गया, जिसमें सरकार ने आगामी पांच वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य और निवेश योजनाएं प्रस्तुत कीं। यह घोषणा भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा परिदृश्य में एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश की ऊर्जा स्वतंत्रता और डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों को गति देगा।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत की ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और जलवायु परिवर्तन शमन रणनीतियों से संबंधित है। छात्रों को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग, आर्थिक प्रभावों और संबंधित सरकारी नीतियों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का चरण-II लॉन्च। | भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों में इसकी भूमिका का विश्लेषण करें। |
| कब | 22 मई, 2026 को चरण-II का शुभारंभ। | मिशन की समय-सीमा और 2030, 2035, 2070 के लक्ष्यों का महत्व। |
| लक्ष्य | 2030 तक 5 MMT हरित हाइड्रोजन उत्पादन। | यह लक्ष्य वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति को कैसे प्रभावित करेगा? |
| महत्व | ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन उत्सर्जन में कमी, रोजगार सृजन। | हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों का मूल्यांकन करें। |
| चुनौतियां | उच्च उत्पादन लागत, अवसंरचना की कमी, प्रौद्योगिकी विकास। | हरित हाइड्रोजन को बड़े पैमाने पर अपनाने में आने वाली प्रमुख बाधाएं और उनके समाधान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 12–20 | Environment and Ecology is a separate section in UPSC Prelims. GS-III includes environment, climate change, and disaster management. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | National parks, Ramsar sites, pollution levels, and climate summits appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–3 | Climate finance, green bonds, and ESG ratings are occasionally tested in banking exams. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–6 | Environment is a reliable Railway GK category — national parks, endangered species, pollution. |
| State PCS / PSC | High | 5–8 | State PCS papers test both central environment policy and state-specific conservation achievements. |
Key Facts to Remember: भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: चरण-II का शुभारंभ और ऊर्जा सुरक्षा में भूमिका
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का चरण-II 22 मई, 2026 को भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया।
- मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- मिशन को जनवरी 2023 में ₹19,744 करोड़ के प्रारंभिक परिव्यय के साथ मंजूरी मिली थी।
- चरण-II में ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश किया जाएगा, जिससे कुल परिव्यय ₹49,744 करोड़ हो जाएगा।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है।
- हरित हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से उत्पन्न होता है।
- मिशन के प्रमुख घटकों में SIGHT कार्यक्रम, पायलट परियोजनाएं, अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास शामिल हैं।
- यह मिशन भारत को 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।
- हरित हाइड्रोजन का उपयोग उर्वरक, रिफाइनरी, स्टील, सीमेंट और भारी परिवहन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इस मिशन का नोडल मंत्रालय है।
- हरित हाइड्रोजन खरीद दायित्व (GHPOs) उद्योगों में हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देंगे।
- यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करेगी।
Practice Questions
Q1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के चरण-II का शुभारंभ किस तिथि को किया गया?
- 22 मई, 2026
- 15 अगस्त, 2025
- 26 जनवरी, 2026
- 5 जून, 2026
Explanation: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के दूसरे चरण का औपचारिक शुभारंभ 22 मई, 2026 को किया गया। यह भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Q2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का मुख्य लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कितनी हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता प्राप्त करना है?
- 1 मिलियन मीट्रिक टन
- 3 मिलियन मीट्रिक टन
- 5 मिलियन मीट्रिक टन
- 10 मिलियन मीट्रिक टन
Explanation: भारत सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता प्राप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है।
Q3. हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किस ऊर्जा स्रोत का उपयोग किया जाता है?
- कोयला
- प्राकृतिक गैस
- नवीकरणीय ऊर्जा (सौर और पवन)
- परमाणु ऊर्जा
Explanation: हरित हाइड्रोजन का उत्पादन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, जैसे सौर और पवन ऊर्जा, का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा किया जाता है। यह प्रक्रिया शून्य कार्बन उत्सर्जन करती है, जिससे यह एक स्वच्छ ईंधन विकल्प बन जाता है।
Q4. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 'SIGHT' कार्यक्रम का पूर्ण रूप क्या है?
- Sustainable Indian Green Hydrogen Transition
- Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition
- Solar Integration for Green Hydrogen Technology
- Systematic Initiative for Global Hydrogen Trade
Explanation: 'SIGHT' कार्यक्रम का पूर्ण रूप 'Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition' है। यह मिशन का एक प्रमुख घटक है जो हरित हाइड्रोजन उत्पादन और इलेक्ट्रोलिसिस उपकरण के विनिर्माण के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।
Q5. भारत ने किस वर्ष तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें हरित हाइड्रोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा?
- 2030
- 2047
- 2050
- 2070
Explanation: भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य निर्धारित किया है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देता है।
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