संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) में भारत की भूमिका और 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' पर सहमति
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) 22 मई, 2026 को संपन्न हुआ, जिसमें भारत ने 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' के लिए एक ऐतिहासिक समझौते को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस समझौते का उद्देश्य विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करना है। भारत ने समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (CBDR) के सिद्धांत पर जोर देते हुए, विकसित देशों से अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का आह्वान किया।
2-Minute Summary (TL;DR)
- संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) 22 मई, 2026 को ब्राजील में संपन्न हुआ।
- COP31 में 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमति बनी।
- समझौते के तहत, विकसित देशों ने 2025 के बाद प्रति वर्ष 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नया सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (NCQG) निर्धारित किया है।
- यह नया लक्ष्य 2009 के 100 बिलियन डॉलर के वादे से दोगुना है।
- भारत ने इस समझौते को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेषकर विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त की वकालत की।
- भारत ने 'समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं' (CBDR-RC) के सिद्धांत पर जोर दिया।
- समझौते में 'हानि और क्षति' (Loss and Damage) कोष को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
- यह वित्तपोषण विकासशील देशों को अनुकूलन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को अपनाने में मदद करेगा।
- भारत अपने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन और 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के NDC लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- यह समझौता वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।
Why In News
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) 22 मई, 2026 को अपने समापन पर पहुंचा, जिसमें 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' के लिए एक नए समझौते पर सहमति बनी। भारत ने इस समझौते को अंतिम रूप देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त की आवश्यकता पर जोर दिया। यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है।
Syllabus Connection
यह समाचार अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण समझौतों, जलवायु कूटनीति, जलवायु वित्त, और भारत की वैश्विक जलवायु परिवर्तन नीतियों से संबंधित है, जो बहुपक्षीय मंचों पर भारत की भूमिका को दर्शाता है।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | COP31 में 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' पर सहमति। | जलवायु वित्त की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विकसित-विकासशील देशों के बीच विश्वास की कमी और नए समझौते का महत्व। |
| कब | 22 मई, 2026 को COP31 का समापन। | पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में इस समझौते की समयबद्धता और प्रासंगिकता। |
| प्रमुख लक्ष्य | 2025 के बाद 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष का NCQG। | इस लक्ष्य की पर्याप्तता, वित्तपोषण के स्रोत (सार्वजनिक/निजी) और वितरण तंत्र की चुनौतियाँ। |
| भारत की भूमिका | CBDR-RC सिद्धांत पर जोर, विकासशील देशों के लिए वकालत। | भारत की जलवायु कूटनीति, नेतृत्व की भूमिका और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसे पहलों का प्रभाव। |
| चुनौतियाँ | वित्तपोषण की प्रतिबद्धता को पूरा करना, निजी क्षेत्र को शामिल करना। | जलवायु न्याय, हानि और क्षति, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के मुद्दों का समाधान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 10–20 | International relations is a core GS-II topic for UPSC. Bilateral agreements, multilateral bodies, and geopolitics are essential. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | State PCS papers test India's role in international forums and bilateral trade ties. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | International summits, treaties, and India's bilateral relations appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | G20, IMF/World Bank decisions, and global trade events are tested in banking exams. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Medium | 2–4 | Summits, UN resolutions, and India's foreign policy are included in Railway GK. |
Key Facts to Remember: संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) में भारत की भूमिका और 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' पर सहमति
- संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) 22 मई, 2026 को ब्राजील में संपन्न हुआ।
- COP31 में 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर सहमति बनी।
- समझौते के तहत, विकसित देशों ने 2025 के बाद प्रति वर्ष 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नया सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (NCQG) निर्धारित किया है।
- यह नया लक्ष्य 2009 के 100 बिलियन डॉलर के वादे से दोगुना है।
- भारत ने इस समझौते को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेषकर विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त की वकालत की।
- भारत ने 'समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं' (CBDR-RC) के सिद्धांत पर जोर दिया।
- समझौते में 'हानि और क्षति' (Loss and Damage) कोष को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
- यह वित्तपोषण विकासशील देशों को अनुकूलन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को अपनाने में मदद करेगा।
- भारत अपने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन और 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के NDC लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
- यह समझौता वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।
Practice Questions
Q1. संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) में 'वैश्विक हरित वित्तपोषण' के लिए 2025 के बाद प्रति वर्ष कितना नया सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (NCQG) निर्धारित किया गया है?
- 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर
Explanation: COP31 में हुए समझौते के तहत, विकसित देशों ने 2025 के बाद प्रति वर्ष 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एक नया सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (NCQG) स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है। यह लक्ष्य विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
Q2. भारत ने जलवायु परिवर्तन वार्ताओं में किस सिद्धांत का लगातार समर्थन किया है, जो विकसित देशों पर अधिक जिम्मेदारी डालता है?
- पहले आओ पहले पाओ का सिद्धांत
- समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं का सिद्धांत (CBDR-RC)
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत
- विकास के लिए अधिकार का सिद्धांत
Explanation: भारत हमेशा 'समान लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं' (Common But Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities - CBDR-RC) के सिद्धांत का प्रबल समर्थक रहा है। यह सिद्धांत मानता है कि विकसित देशों की ऐतिहासिक उत्सर्जन के कारण जलवायु परिवर्तन में अधिक जिम्मेदारी है और उन्हें विकासशील देशों की तुलना में अधिक योगदान देना चाहिए।
Q3. पेरिस समझौता किस वर्ष अपनाया गया था?
- 2009
- 2012
- 2015
- 2018
Explanation: पेरिस समझौता 2015 में अपनाया गया था। इसका लक्ष्य वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2°C से काफी नीचे रखना और इसे 1.5°C तक सीमित करने के प्रयासों को जारी रखना है।
Q4. COP31 की मेजबानी किस देश ने की थी?
- भारत
- जर्मनी
- ब्राजील
- मिस्र
Explanation: संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) की मेजबानी ब्राजील ने की थी। COP बैठकें UNFCCC के तहत सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय हैं, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों को निर्देशित करती हैं।
Q5. भारत का शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emission) प्राप्त करने का लक्ष्य किस वर्ष तक का है?
- 2030
- 2040
- 2050
- 2070
Explanation: भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emission) प्राप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य भारत की जलवायु कार्रवाई प्रतिबद्धताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में योगदान देता है।
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