भारतीय नौसेना में स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत-II' का जलावतरण: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर
भारतीय नौसेना ने 22 मई, 2026 को अपने दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत, 'INS विक्रांत-II' को सेवा में शामिल किया है। यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह अत्याधुनिक युद्धपोत देश की ब्लू-वॉटर नौसेना क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय नौसेना ने 22 मई, 2026 को अपने दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत-II' को सेवा में शामिल किया है।
- यह पोत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रतीक है।
- INS विक्रांत-II का विस्थापन लगभग 45,000 टन है और यह 30 से अधिक विमानों और हेलीकॉप्टरों को ले जा सकता है।
- इसमें स्वदेशी HAL तेजस (नौसैनिक संस्करण) और मिग-29K जैसे लड़ाकू विमान शामिल होंगे।
- इस पोत के निर्माण में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
- यह भारत की ब्लू-वॉटर नौसेना क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और समुद्री शक्ति को मजबूत करेगा।
- INS विक्रांत-II हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और शक्ति प्रक्षेपण को बढ़ाएगा।
- भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास दो स्वदेशी विमानवाहक पोत हैं।
- यह जलावतरण भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा और रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
- यह पोत अत्याधुनिक सेंसर, रडार और हथियार प्रणालियों से लैस है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइलें शामिल हैं।
Why In News
भारतीय नौसेना ने आज अपने दूसरे पूर्णतः स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत-II' को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया है। यह घटना भारत के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह जलावतरण ऐसे समय में हुआ है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं, और भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करके क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देना चाहता है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, नौसैनिक आधुनिकीकरण और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक महत्व से संबंधित है। छात्रों को विमानवाहक पोतों की भूमिका, 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | दूसरा स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत-II' भारतीय नौसेना में शामिल। | भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता का प्रतीक, ब्लू-वॉटर नौसेना क्षमताओं का विस्तार। |
| कब | 22 मई, 2026। | वैश्विक भू-राजनीतिक संदर्भ में समुद्री शक्ति का महत्व, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका। |
| निर्माण | कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा, 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री। | रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करना, 'मेक इन इंडिया' और MSMEs को प्रोत्साहन। |
| क्षमता | 45,000 टन विस्थापन, 30+ विमान/हेलीकॉप्टर। | समुद्र में हवाई शक्ति प्रक्षेपण, दो मोर्चों पर नौसैनिक संचालन की क्षमता। |
| महत्व | समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता, 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा। | भारत की 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' भूमिका, वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती स्थिति। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 4–8 | UPSC focuses on strategic aspects: defence policy, Indo-Pacific, border issues, and bilateral defence deals. |
| State PCS / PSC | Medium | 2–4 | State PCS papers test major acquisitions and military exercises involving India. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | Defence acquisitions, military exercises, and appointments appear in SSC GK. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–5 | Army, Navy, and Air Force current events are regularly tested in Railway GK. |
Key Facts to Remember: भारतीय नौसेना में स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत-II' का जलावतरण: आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर
- भारतीय नौसेना ने 22 मई, 2026 को अपने दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत-II' को सेवा में शामिल किया है।
- यह पोत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रतीक है।
- INS विक्रांत-II का विस्थापन लगभग 45,000 टन है और यह 30 से अधिक विमानों और हेलीकॉप्टरों को ले जा सकता है।
- इसमें स्वदेशी HAL तेजस (नौसैनिक संस्करण) और मिग-29K जैसे लड़ाकू विमान शामिल होंगे।
- इस पोत के निर्माण में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
- यह भारत की ब्लू-वॉटर नौसेना क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा और समुद्री शक्ति को मजबूत करेगा।
- INS विक्रांत-II हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और शक्ति प्रक्षेपण को बढ़ाएगा।
- भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास दो स्वदेशी विमानवाहक पोत हैं।
- यह जलावतरण भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा और रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
- यह पोत अत्याधुनिक सेंसर, रडार और हथियार प्रणालियों से लैस है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइलें शामिल हैं।
Practice Questions
Q1. भारतीय नौसेना में 22 मई, 2026 को सेवा में शामिल किए गए दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत का नाम क्या है?
- INS विक्रमादित्य
- INS विशाल
- INS विक्रांत-II
- INS अर्जुन
Explanation: भारतीय नौसेना में 22 मई, 2026 को सेवा में शामिल किए गए दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत का नाम 'INS विक्रांत-II' है। पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत 'INS विक्रांत' (IAC-I) था, जिसे 2022 में कमीशन किया गया था। INS विक्रमादित्य रूस से अधिग्रहित किया गया था।
Q2. INS विक्रांत-II का निर्माण किस शिपयार्ड में किया गया है?
- मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड
- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स
- हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड
- कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड
Explanation: INS विक्रांत-II का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में किया गया है। CSL ने ही भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत (IAC-I) का भी निर्माण किया था, जो भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का एक प्रमुख केंद्र है।
Q3. INS विक्रांत-II में लगभग कितने प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है?
- 50% से अधिक
- 60% से अधिक
- 75% से अधिक
- 90% से अधिक
Explanation: INS विक्रांत-II के निर्माण में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, जिसमें स्टील, इंजन और हथियार प्रणालियाँ शामिल हैं।
Q4. विमानवाहक पोत किस प्रकार की नौसेना की रीढ़ होते हैं, जो अपने तटों से दूर खुले महासागरों में संचालन करने में सक्षम होती है?
- ग्रीन-वॉटर नौसेना
- ब्राउन-वॉटर नौसेना
- ब्लू-वॉटर नौसेना
- तटीय नौसेना
Explanation: विमानवाहक पोत ब्लू-वॉटर नौसेना की रीढ़ होते हैं। ब्लू-वॉटर नौसेना वह होती है जो अपने तटों से दूर, खुले महासागरों में लंबी दूरी तक संचालन करने और शक्ति प्रक्षेपण करने में सक्षम होती है। ग्रीन-वॉटर और ब्राउन-वॉटर नौसेनाएँ क्रमशः क्षेत्रीय और तटीय जल में संचालित होती हैं।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा लड़ाकू विमान INS विक्रांत-II से संचालित होने की उम्मीद है?
- राफेल
- सुखोई Su-30 MKI
- HAL तेजस (नौसैनिक संस्करण)
- मिराज 2000
Explanation: INS विक्रांत-II से HAL तेजस (नौसैनिक संस्करण) और मिग-29K जैसे लड़ाकू विमान संचालित होने की उम्मीद है। राफेल, सुखोई Su-30 MKI और मिराज 2000 भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान हैं, लेकिन वे विमानवाहक पोत से संचालित होने के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं (हालांकि राफेल का नौसैनिक संस्करण भी विचाराधीन है, लेकिन तेजस स्वदेशी विकल्प है)।
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