भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा 'हरित हाइड्रोजन' उत्पादन में नई सफलता: लागत प्रभावी और कुशल विधि का विकास
भारतीय वैज्ञानिकों ने 18 मई, 2026 को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए एक नई, लागत प्रभावी और अत्यधिक कुशल विधि विकसित करने में सफलता की घोषणा की। यह सफलता नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके हाइड्रोजन के उत्पादन को अधिक व्यवहार्य बनाएगी, जिससे भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन की नई विधि विकसित की।
- यह नई विधि 18 मई, 2026 को घोषित की गई और प्रोफेसर राजेश कुमार व डॉ. प्रिया शर्मा ने इसका नेतृत्व किया।
- विकसित इलेक्ट्रोकैटलिस्ट निकेल-आयरन मिश्र धातु और पॉलिमर के संयोजन पर आधारित है।
- यह नई विधि पारंपरिक इलेक्ट्रोलिसिस की तुलना में 25% अधिक कुशल है।
- यह प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन उत्पादन की लागत को 30-40% तक कम कर सकती है।
- यह महंगे प्लैटिनम या इरिडियम धातुओं का एक लागत प्रभावी विकल्प प्रदान करती है।
- यह तकनीक कम तापमान और दबाव पर भी कुशलता से काम करती है, जिससे ऊर्जा खपत कम होती है।
- इस शोध को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'नेचर एनर्जी' में प्रकाशित किया गया है।
- यह सफलता भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के लक्ष्य का समर्थन करती है।
- यह भारत को ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करेगी।
Why In News
18 मई, 2026 को भारत के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों में से एक ने हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए एक अभिनव और लागत प्रभावी विधि विकसित करने की घोषणा की है। यह खबर ऐसे समय में आई है जब भारत 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' के तहत 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहा है। यह सफलता भारत को ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Syllabus Connection
यह हरित हाइड्रोजन उत्पादन की तकनीक, इसके महत्व, भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों और जलवायु परिवर्तन शमन में इसकी भूमिका को समझने में मदद करता है। छात्रों को इलेक्ट्रोकैटलिस्ट और इलेक्ट्रोलिसिस की अवधारणाओं की समीक्षा करनी चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | हरित हाइड्रोजन उत्पादन की लागत प्रभावी, कुशल विधि | नवीकरणीय ऊर्जा से हाइड्रोजन उत्पादन की बाधाएं दूर कर ऊर्जा संक्रमण में तेजी लाना। |
| किसने | IISc बेंगलुरु के वैज्ञानिक (प्रो. राजेश कुमार, डॉ. प्रिया शर्मा) | भारत की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन। |
| तकनीक | निकेल-आयरन मिश्र धातु इलेक्ट्रोकैटलिस्ट | दुर्लभ धातुओं पर निर्भरता कम करना, उत्पादन लागत और दक्षता में सुधार। |
| महत्व | 25% अधिक कुशल, 30-40% लागत कम | राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने, ऊर्जा सुरक्षा और शुद्ध-शून्य उत्सर्जन में सहायक। |
| वैश्विक प्रभाव | वैश्विक लागत कम करने में योगदान | हरित हाइड्रोजन को जीवाश्म ईंधन के साथ प्रतिस्पर्धी बनाना, भारत को वैश्विक नेता बनाना। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा 'हरित हाइड्रोजन' उत्पादन में नई सफलता: लागत प्रभावी और कुशल विधि का विकास
- भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन की नई विधि विकसित की।
- यह नई विधि 18 मई, 2026 को घोषित की गई और प्रोफेसर राजेश कुमार व डॉ. प्रिया शर्मा ने इसका नेतृत्व किया।
- विकसित इलेक्ट्रोकैटलिस्ट निकेल-आयरन मिश्र धातु और पॉलिमर के संयोजन पर आधारित है।
- यह नई विधि पारंपरिक इलेक्ट्रोलिसिस की तुलना में 25% अधिक कुशल है।
- यह प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन उत्पादन की लागत को 30-40% तक कम कर सकती है।
- यह महंगे प्लैटिनम या इरिडियम धातुओं का एक लागत प्रभावी विकल्प प्रदान करती है।
- यह तकनीक कम तापमान और दबाव पर भी कुशलता से काम करती है, जिससे ऊर्जा खपत कम होती है।
- इस शोध को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'नेचर एनर्जी' में प्रकाशित किया गया है।
- यह सफलता भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के लक्ष्य का समर्थन करती है।
- यह भारत को ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने में मदद करेगी।
Practice Questions
Q1. हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नई, लागत प्रभावी विधि किस भारतीय संस्थान के वैज्ञानिकों ने विकसित की है?
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली
- भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु
- होमी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC)
- राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (NCL) पुणे
Explanation: हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए नई, लागत प्रभावी और कुशल विधि भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु के वैज्ञानिकों की एक टीम ने विकसित की है। इस टीम का नेतृत्व प्रोफेसर राजेश कुमार और डॉ. प्रिया शर्मा ने किया।
Q2. नई इलेक्ट्रोकैटलिस्ट सामग्री में महंगे प्लैटिनम या इरिडियम के स्थान पर किन धातुओं का उपयोग किया गया है?
- सोना और चांदी
- तांबा और जस्ता
- निकेल और आयरन
- एल्यूमीनियम और टाइटेनियम
Explanation: नई इलेक्ट्रोकैटलिस्ट सामग्री दुर्लभ और महंगे प्लैटिनम या इरिडियम धातुओं के बजाय निकेल-आयरन मिश्र धातु और कुछ पॉलिमर के संयोजन का उपयोग करती है। निकेल और आयरन अपेक्षाकृत सस्ते और प्रचुर मात्रा में उपलब्ध धातुएं हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है।
Q3. भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई विधि पारंपरिक इलेक्ट्रोलिसिस विधियों की तुलना में कितनी अधिक कुशल है?
- 5% अधिक कुशल
- 10% अधिक कुशल
- 15% अधिक कुशल
- 25% अधिक कुशल
Explanation: वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यह नई विधि पारंपरिक इलेक्ट्रोलिसिस विधियों की तुलना में 25% अधिक कुशल है। यह बढ़ी हुई दक्षता कम ऊर्जा इनपुट पर अधिक हाइड्रोजन उत्पादन की अनुमति देती है।
Q4. भारत का राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2030 तक प्रति वर्ष कितने मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है?
- 1 मिलियन मीट्रिक टन
- 2.5 मिलियन मीट्रिक टन
- 5 मिलियन मीट्रिक टन
- 10 मिलियन मीट्रिक टन
Explanation: भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करना है। यह लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए निर्धारित किया गया है।
Q5. हरित हाइड्रोजन उत्पादन की यह नई सफलता किस प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुई है?
- साइंस (Science)
- नेचर (Nature)
- नेचर एनर्जी (Nature Energy)
- जर्नल ऑफ अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (JACS)
Explanation: भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस नई हरित हाइड्रोजन उत्पादन विधि की सफलता को 'नेचर एनर्जी' (Nature Energy) नामक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। यह प्रकाशन शोध की वैज्ञानिक वैधता और महत्व को दर्शाता है।
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