भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा: शुक्र ग्रह के अध्ययन में भारत का अगला कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 21 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की, जिसका उद्देश्य शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का विस्तृत अध्ययन करना है। यह मिशन भारत के अंतरग्रहीय अन्वेषण कार्यक्रमों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर होगा और शुक्र ग्रह के रहस्यों को उजागर करने में मदद करेगा। इस मिशन में एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल होने की संभावना है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 21 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की।
- मिशन का उद्देश्य शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का विस्तृत अध्ययन करना है।
- 'शुक्रयान-2' को 2031 तक GSLV Mk-III (LVM3) रॉकेट का उपयोग करके लॉन्च करने की योजना है।
- इस मिशन में एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल होंगे।
- ISRO के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने इस महत्वाकांक्षी मिशन की जानकारी दी।
- मिशन का अनुमानित बजट ₹1,200 करोड़ है।
- यह शुक्र के घने सल्फ्यूरिक एसिड वायुमंडल और अत्यधिक ग्रीनहाउस प्रभाव पर शोध करेगा।
- मिशन शुक्र की सतह पर ज्वालामुखीय गतिविधि और भूवैज्ञानिक संरचना का भी अध्ययन करेगा।
- यह भारत के अंतरग्रहीय अन्वेषण कार्यक्रमों में चंद्रयान और मंगलयान के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम है।
- अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाई जा सके।
Why In News
21 मई, 2026 को ISRO ने औपचारिक रूप से अपने महत्वाकांक्षी 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की, जिससे भारत एक बार फिर अंतरग्रहीय अन्वेषण के क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। यह घोषणा वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की बढ़ती भूमिका और शुक्र ग्रह के अध्ययन में नई वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करने की क्षमता को रेखांकित करती है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, विशेष रूप से अंतरग्रहीय मिशनों में उसकी प्रगति से संबंधित है। छात्रों को ISRO के मिशनों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास और सौरमंडल के ग्रहों के वैज्ञानिक महत्व को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | ISRO ने 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की। | मिशन के वैज्ञानिक उद्देश्य, शुक्र ग्रह के अध्ययन का महत्व, और पृथ्वी के जलवायु मॉडल पर इसके निहितार्थ। |
| कब | 21 मई, 2026 को; 2031 तक लॉन्च की योजना। | अंतरग्रहीय मिशनों की जटिलता, तकनीकी चुनौतियां, और लंबी अवधि की योजना का महत्व। |
| घटक | ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर; GSLV Mk-III (LVM3) रॉकेट। | प्रत्येक घटक की भूमिका, पेलोड की तकनीकी विशिष्टताएं, और शुक्र की चरम परिस्थितियों से निपटने की इंजीनियरिंग चुनौतियां। |
| महत्व | शुक्र के वायुमंडल और सतह का अध्ययन; भारत की अंतरिक्ष क्षमता का प्रदर्शन। | भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति, वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में योगदान, और STEM शिक्षा पर प्रभाव। |
| तुलना | नासा के डाविंसी+, वेरिटास और ESA के एनविजन मिशनों के साथ। | अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता, विभिन्न मिशनों के पूरक उद्देश्य, और समग्र वैज्ञानिक लाभ। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा: शुक्र ग्रह के अध्ययन में भारत का अगला कदम
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 21 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की।
- मिशन का उद्देश्य शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का विस्तृत अध्ययन करना है।
- 'शुक्रयान-2' को 2031 तक GSLV Mk-III (LVM3) रॉकेट का उपयोग करके लॉन्च करने की योजना है।
- इस मिशन में एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल होंगे।
- ISRO के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने इस महत्वाकांक्षी मिशन की जानकारी दी।
- मिशन का अनुमानित बजट ₹1,200 करोड़ है।
- यह शुक्र के घने सल्फ्यूरिक एसिड वायुमंडल और अत्यधिक ग्रीनहाउस प्रभाव पर शोध करेगा।
- मिशन शुक्र की सतह पर ज्वालामुखीय गतिविधि और भूवैज्ञानिक संरचना का भी अध्ययन करेगा।
- यह भारत के अंतरग्रहीय अन्वेषण कार्यक्रमों में चंद्रयान और मंगलयान के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम है।
- अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि वैज्ञानिक क्षमता बढ़ाई जा सके।
Practice Questions
Q1. ISRO द्वारा घोषित 'शुक्रयान-2' मिशन का प्राथमिक लक्ष्य किस ग्रह का अध्ययन करना है?
- मंगल
- बृहस्पति
- शुक्र
- शनि
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन का प्राथमिक लक्ष्य शुक्र ग्रह का विस्तृत अध्ययन करना है। यह मिशन शुक्र के वायुमंडल, सतह और भूवैज्ञानिक विशेषताओं के रहस्यों को उजागर करने पर केंद्रित है। ISRO ने पहले ही मंगल और चंद्रमा का सफलतापूर्वक अध्ययन किया है।
Q2. 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए किस प्रक्षेपण यान का उपयोग करने की योजना है?
- PSLV
- GSLV Mk-II
- GSLV Mk-III (LVM3)
- SSLV
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन को लॉन्च करने के लिए GSLV Mk-III (जिसे अब LVM3 के नाम से जाना जाता है) रॉकेट का उपयोग करने की योजना है। यह ISRO का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान है, जो भारी पेलोड को भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा या अंतरग्रहीय कक्षाओं में ले जाने में सक्षम है।
Q3. ISRO के अध्यक्ष कौन हैं जिन्होंने 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की?
- के. सिवन
- ए.एस. किरण कुमार
- एस. सोमनाथ
- जी. माधवन नायर
Explanation: ISRO के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने 21 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की। वह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रमुख हैं और ISRO के विभिन्न महत्वाकांक्षी मिशनों का नेतृत्व कर रहे हैं।
Q4. 'शुक्रयान-2' मिशन में कौन से घटक शामिल होने की संभावना है?
- केवल एक ऑर्बिटर
- केवल एक लैंडर
- एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर
- केवल एक रोवर
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर शामिल होने की संभावना है। यह एक व्यापक मिशन होगा जो शुक्र के वायुमंडल से लेकर सतह तक का विस्तृत अध्ययन करेगा, जिससे अधिक वैज्ञानिक डेटा प्राप्त हो सकेगा।
Q5. शुक्र ग्रह को अक्सर किस ग्रह का 'जुड़वां' कहा जाता है?
- मंगल
- बृहस्पति
- पृथ्वी
- बुध
Explanation: शुक्र ग्रह को अक्सर पृथ्वी का 'जुड़वां' ग्रह कहा जाता है क्योंकि यह आकार और द्रव्यमान में पृथ्वी के समान है। हालांकि, इसकी वायुमंडलीय संरचना और सतह की परिस्थितियां पृथ्वी से बहुत भिन्न हैं, जिसमें अत्यधिक तापमान और दबाव शामिल है।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 'शुक…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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