ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों को उजागर करने की दिशा में एक बड़ा कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 18 मई, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी 'शुक्रयान-2' मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह मिशन शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह का विस्तृत अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें ग्रह के भूवैज्ञानिक विकास, वायुमंडलीय संरचना और संभावित जीवन के संकेतों की खोज शामिल है। 'शुक्रयान-2' में एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल हैं, जो शुक्र के कठोर वातावरण में काम करने के लिए विशेष रूप से इंजीनियर किए गए हैं।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 18 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV Mk-III रॉकेट द्वारा किया गया।
- मिशन में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर शामिल हैं।
- मुख्य उद्देश्य शुक्र के वायुमंडल, सतह, भूवैज्ञानिक विकास और संभावित पानी के संकेतों का अध्ययन करना है।
- लैंडर और रोवर को शुक्र के अत्यधिक कठोर वातावरण (उच्च तापमान, दबाव) में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह मिशन भारत के चंद्रयान और मंगलयान मिशनों की सफलता के बाद ग्रहों की खोज में अगला कदम है।
- शुक्र को 'पृथ्वी की जुड़वां बहन' कहा जाता है, लेकिन इसका वायुमंडल CO2 और सल्फ्यूरिक एसिड से बना है।
- मिशन का लक्ष्य 2027 के अंत तक शुक्र की कक्षा में पहुंचना है।
- यह भारत को शुक्र ग्रह का अध्ययन करने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल करता है।
- यह मिशन शुक्र के ज्वालामुखी गतिविधि और वायुमंडलीय गतिशीलता को समझने में मदद करेगा।
Why In News
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 18 मई, 2026 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 'शुक्रयान-2' मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह प्रक्षेपण भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो इसे शुक्र ग्रह का अध्ययन करने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल करता है।
Syllabus Connection
यह खबर ISRO के एक महत्वपूर्ण अंतरग्रहीय मिशन 'शुक्रयान-2' से संबंधित है, जो भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षमताओं और ग्रहों की खोज में बढ़ती रुचि को दर्शाता है। छात्रों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, प्रमुख मिशनों, लॉन्च वाहनों और ग्रहों के अध्ययन के वैज्ञानिक महत्व को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन - शुक्र ग्रह का अध्ययन। | अंतरग्रहीय मिशनों का वैज्ञानिक महत्व, तकनीकी चुनौतियां और भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं। |
| कब | 18 मई, 2026 को GSLV Mk-III से प्रक्षेपित। | भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में इस मिशन का स्थान और भविष्य के मिशनों के लिए इसका महत्व। |
| घटक | ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर। | शुक्र के कठोर वातावरण में लैंडर-रोवर के संचालन की इंजीनियरिंग चुनौतियां और वैज्ञानिक लाभ। |
| उद्देश्य | वायुमंडल, सतह, भूवैज्ञानिक विकास, पानी के संकेतों का अध्ययन। | शुक्र के अध्ययन से पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन और ग्रह के विकास पर मिलने वाली अंतर्दृष्टि। |
| महत्व | भारत को शुक्र अध्ययन करने वाले देशों में शामिल किया। | अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और STEM शिक्षा पर प्रभाव। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Banking (IBPS / SBI) | Low | 1–2 | Occasionally tested via banking technology, fintech, or climate-science crossovers. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
Key Facts to Remember: ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों को उजागर करने की दिशा में एक बड़ा कदम
- ISRO ने 18 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV Mk-III रॉकेट द्वारा किया गया।
- मिशन में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर शामिल हैं।
- मुख्य उद्देश्य शुक्र के वायुमंडल, सतह, भूवैज्ञानिक विकास और संभावित पानी के संकेतों का अध्ययन करना है।
- लैंडर और रोवर को शुक्र के अत्यधिक कठोर वातावरण (उच्च तापमान, दबाव) में काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह मिशन भारत के चंद्रयान और मंगलयान मिशनों की सफलता के बाद ग्रहों की खोज में अगला कदम है।
- शुक्र को 'पृथ्वी की जुड़वां बहन' कहा जाता है, लेकिन इसका वायुमंडल CO2 और सल्फ्यूरिक एसिड से बना है।
- मिशन का लक्ष्य 2027 के अंत तक शुक्र की कक्षा में पहुंचना है।
- यह भारत को शुक्र ग्रह का अध्ययन करने वाले चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल करता है।
- यह मिशन शुक्र के ज्वालामुखी गतिविधि और वायुमंडलीय गतिशीलता को समझने में मदद करेगा।
Practice Questions
Q1. ISRO के 'शुक्रयान-2' मिशन का प्रक्षेपण किस तिथि को किया गया?
- 18 मई, 2026
- 15 अगस्त, 2025
- 22 अक्टूबर, 2024
- 5 नवंबर, 2023
Explanation: ISRO के 'शुक्रयान-2' मिशन का सफल प्रक्षेपण 18 मई, 2026 को किया गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो शुक्र ग्रह के अध्ययन के लिए समर्पित है।
Q2. 'शुक्रयान-2' मिशन में निम्नलिखित में से कौन से घटक शामिल हैं?
- केवल ऑर्बिटर
- ऑर्बिटर और लैंडर
- ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर
- केवल रोवर
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन एक व्यापक अभियान है जिसमें तीन मुख्य घटक शामिल हैं: एक ऑर्बिटर जो शुक्र की परिक्रमा करेगा, एक लैंडर जो सतह पर उतरेगा, और एक रोवर जो सतह पर चलेगा और उसका विश्लेषण करेगा।
Q3. किस रॉकेट का उपयोग करके 'शुक्रयान-2' का प्रक्षेपण किया गया?
- PSLV-XL
- GSLV Mk-II
- GSLV Mk-III
- SSLV
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन को ISRO के शक्तिशाली लॉन्च वाहन GSLV Mk-III (लॉन्च व्हीकल मार्क-III) का उपयोग करके प्रक्षेपित किया गया। यह रॉकेट भारी पेलोड को भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) में ले जाने की क्षमता रखता है।
Q4. शुक्र ग्रह की सतह का औसत तापमान लगभग कितना है?
- 100 डिग्री सेल्सियस
- 250 डिग्री सेल्सियस
- 475 डिग्री सेल्सियस
- 0 डिग्री सेल्सियस
Explanation: शुक्र ग्रह अपनी घनी कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल और ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है, जिसकी सतह का औसत तापमान लगभग 475 डिग्री सेल्सियस है। यह तापमान सीसे को पिघलाने के लिए पर्याप्त है।
Q5. ISRO के पिछले अंतरग्रहीय मिशनों में से कौन सा मंगल ग्रह से संबंधित था?
- चंद्रयान-1
- मंगलयान (MOM)
- आदित्य-L1
- गगनयान
Explanation: ISRO का मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन - MOM) मंगल ग्रह के लिए भारत का पहला अंतरग्रहीय मिशन था, जिसे 2013 में लॉन्च किया गया था। इसने भारत को मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला पहला एशियाई देश और अपने पहले प्रयास में ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बनाया।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के रहस्यों…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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