ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के अध्ययन हेतु भारत का महत्वाकांक्षी कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 22 मई, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य शुक्र ग्रह के वायुमंडल, सतह और उपसतह का गहन अध्ययन करना है। यह मिशन भारत की अंतरग्रहीय अन्वेषण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान में देश की स्थिति को मजबूत करेगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 22 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की, जिसका लक्ष्य शुक्र ग्रह का गहन अध्ययन करना है।
- यह मिशन शुक्र के वायुमंडल की संरचना, गतिशीलता और सतह-वायुमंडल अंतःक्रियाओं पर केंद्रित होगा।
- 'शुक्रयान-2' का प्रक्षेपण ISRO के सबसे शक्तिशाली रॉकेट GSLV Mk III का उपयोग करके किया जाएगा।
- मिशन में स्वदेशी रूप से विकसित रडार, स्पेक्ट्रोमीटर और इमेजिंग सिस्टम जैसे वैज्ञानिक पेलोड शामिल होंगे।
- शुक्र ग्रह को पृथ्वी की जुड़वां बहन कहा जाता है और इसका वायुमंडल मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड से बना है।
- शुक्र पर अत्यधिक तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव है, जिससे सतह का तापमान लगभग 462 डिग्री सेल्सियस रहता है।
- यह मिशन भारत की अंतरग्रहीय अन्वेषण क्षमताओं को बढ़ाएगा और वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान में योगदान देगा।
- ISRO के अध्यक्ष श्री एस. सोमनाथ ने इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में महत्वपूर्ण छलांग बताया।
- यह मिशन 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और अंतरिक्ष नीति 2023 के अनुरूप है।
- NASA के DAVINCI+ और VERITAS तथा ESA के EnVision जैसे अन्य वैश्विक शुक्र मिशन भी योजनाबद्ध हैं।
Why In News
ISRO द्वारा 22 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन के प्रक्षेपण की घोषणा की गई है, जो शुक्र ग्रह के वायुमंडल और सतह के गहन अध्ययन के लिए भारत का दूसरा अंतरग्रहीय मिशन होगा। यह घोषणा भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण छलांग को दर्शाती है और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए मार्ग प्रशस्त करती है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, विशेष रूप से अंतरग्रहीय मिशनों में नवीनतम विकास से संबंधित है। छात्रों को ISRO के विभिन्न मिशनों, प्रक्षेपण यानों और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन | शुक्र ग्रह के वायुमंडल, सतह और भूगर्भीय गतिविधियों का अध्ययन करने का भारतीय मिशन। |
| कब | 22 मई, 2026 को घोषणा | भारत के अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप में एक महत्वपूर्ण कदम, भविष्य के मिशनों का आधार। |
| किसके द्वारा | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) | भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक, वैश्विक सहयोग के अवसर। |
| महत्व | शुक्र के ग्रीनहाउस प्रभाव, वायुमंडलीय गतिशीलता का अध्ययन | पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन को समझने में सहायक, ग्रहों के विकास पर नई अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा। |
| प्रौद्योगिकी | GSLV Mk III रॉकेट, स्वदेशी पेलोड | भारत की उन्नत प्रक्षेपण और पेलोड विकास क्षमताओं का प्रदर्शन, निजी क्षेत्र की भागीदारी। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के अध्ययन हेतु भारत का महत्वाकांक्षी कदम
- ISRO ने 22 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन की घोषणा की, जिसका लक्ष्य शुक्र ग्रह का गहन अध्ययन करना है।
- यह मिशन शुक्र के वायुमंडल की संरचना, गतिशीलता और सतह-वायुमंडल अंतःक्रियाओं पर केंद्रित होगा।
- 'शुक्रयान-2' का प्रक्षेपण ISRO के सबसे शक्तिशाली रॉकेट GSLV Mk III का उपयोग करके किया जाएगा।
- मिशन में स्वदेशी रूप से विकसित रडार, स्पेक्ट्रोमीटर और इमेजिंग सिस्टम जैसे वैज्ञानिक पेलोड शामिल होंगे।
- शुक्र ग्रह को पृथ्वी की जुड़वां बहन कहा जाता है और इसका वायुमंडल मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड से बना है।
- शुक्र पर अत्यधिक तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव है, जिससे सतह का तापमान लगभग 462 डिग्री सेल्सियस रहता है।
- यह मिशन भारत की अंतरग्रहीय अन्वेषण क्षमताओं को बढ़ाएगा और वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान में योगदान देगा।
- ISRO के अध्यक्ष श्री एस. सोमनाथ ने इस मिशन को भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में महत्वपूर्ण छलांग बताया।
- यह मिशन 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान और अंतरिक्ष नीति 2023 के अनुरूप है।
- NASA के DAVINCI+ और VERITAS तथा ESA के EnVision जैसे अन्य वैश्विक शुक्र मिशन भी योजनाबद्ध हैं।
Practice Questions
Q1. 'शुक्रयान-2' मिशन के प्रक्षेपण के लिए ISRO किस प्रक्षेपण यान का उपयोग करेगा?
- PSLV-XL
- GSLV Mk II
- GSLV Mk III
- SSLV
Explanation: ISRO अपने महत्वाकांक्षी 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए GSLV Mk III (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III) का उपयोग करेगा। यह ISRO का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान है जो भारी पेलोड को अंतरग्रहीय कक्षाओं में ले जाने में सक्षम है।
Q2. शुक्र ग्रह के वायुमंडल में मुख्य रूप से कौन सी गैस पाई जाती है?
- नाइट्रोजन
- ऑक्सीजन
- कार्बन डाइऑक्साइड
- मीथेन
Explanation: शुक्र ग्रह का वायुमंडल मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) से बना है, जो इसके तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव का प्रमुख कारण है। इसमें सल्फ्यूरिक एसिड के बादल भी मौजूद हैं।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा ISRO का अंतरग्रहीय मिशन नहीं है?
- चंद्रयान-1
- मंगलयान
- आदित्य-L1
- INSAT-3DR
Explanation: INSAT-3DR एक उन्नत मौसम विज्ञान उपग्रह है जिसे भू-स्थिर कक्षा में स्थापित किया गया है, यह एक अंतरग्रहीय मिशन नहीं है। चंद्रयान-1 चंद्रमा के लिए, मंगलयान मंगल के लिए और आदित्य-L1 सूर्य के अध्ययन के लिए अंतरग्रहीय मिशन हैं।
Q4. शुक्र ग्रह की सतह का औसत तापमान लगभग कितना है?
- -50 डिग्री सेल्सियस
- 100 डिग्री सेल्सियस
- 462 डिग्री सेल्सियस
- 20 डिग्री सेल्सियस
Explanation: शुक्र ग्रह की सतह का औसत तापमान लगभग 462 डिग्री सेल्सियस है, जो सौर मंडल के किसी भी ग्रह की सतह का सबसे गर्म तापमान है। यह इसके घने कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल के कारण होने वाले तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव का परिणाम है।
Q5. भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कौन सा संगठन स्थापित किया गया है?
- DRDO
- HAL
- IN-SPACe
- BEL
Explanation: IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र) भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और उन्हें ISRO की सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति देने के लिए स्थापित किया गया है। यह अंतरिक्ष क्षेत्र के उदारीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन: शुक्र ग्रह के अध्ययन ह…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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