न्यायिक सुधारों पर संसदीय समिति की रिपोर्ट: न्यायपालिका में दक्षता और पहुंच बढ़ाने के सुझाव
संसद की स्थायी समिति ने 18 मई, 2026 को न्यायिक सुधारों पर अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें भारतीय न्यायपालिका में दक्षता, पारदर्शिता और पहुंच बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार, अदालतों में लंबित मामलों को कम करने, न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्रों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध और सुलभ न्याय सुनिश्चित करना है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने 18 मई, 2026 को न्यायिक सुधारों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
- रिपोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार के लिए एक राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग (NJSC) के गठन का सुझाव दिया गया है।
- NJSC का उद्देश्य न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण के लिए एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित प्रणाली सुनिश्चित करना है।
- लंबित मामलों को कम करने के लिए अदालतों के कार्य दिवसों में वृद्धि और न्यायिक बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की सिफारिश की गई है।
- रिपोर्ट में न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात में सुधार और अदालती कार्यवाही के पूर्ण डिजिटलीकरण पर जोर दिया गया है।
- वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्रों, जैसे मध्यस्थता और लोक अदालतों को मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।
- मध्यस्थता विधेयक, 2023 के प्रभावी कार्यान्वयन और इसे अधिक सुलभ बनाने की सिफारिश की गई है।
- न्यायिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधीशों की संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा का प्रस्ताव है।
- यह रिपोर्ट भारत के 'ईज ऑफ जस्टिस' लक्ष्य को प्राप्त करने और न्याय तक पहुंच में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
- समिति के अध्यक्ष श्री विवेक अग्निहोत्री थे, जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपी।
Why In News
संसद की एक स्थायी समिति ने 18 मई, 2026 को भारतीय न्यायपालिका में व्यापक सुधारों पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। यह रिपोर्ट न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों, जैसे लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और न्यायिक नियुक्तियों में देरी, के समाधान के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रदान करती है, जिससे यह राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गई है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारतीय न्यायपालिका की संरचना, कार्यप्रणाली और उसमें सुधारों की आवश्यकता से संबंधित है। छात्रों को न्यायिक नियुक्तियों, लंबित मामलों, न्याय तक पहुंच और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों के संवैधानिक प्रावधानों व चुनौतियों का अध्ययन करना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | न्यायिक सुधारों पर संसदीय समिति की रिपोर्ट। | भारतीय न्यायपालिका की दक्षता और पहुंच बढ़ाने के लिए सिफारिशें। |
| कब | 18 मई, 2026। | न्यायिक सुधारों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान आवश्यकता। |
| मुख्य सुझाव | NJSC, लंबित मामलों में कमी, ADR को बढ़ावा। | न्यायिक स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। |
| प्रभाव | न्याय तक पहुंच में सुधार, 'ईज ऑफ जस्टिस'। | न्यायिक सुधारों का लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और नागरिक अधिकारों पर प्रभाव। |
| चुनौतियां | लंबित मामले, न्यायाधीशों की कमी, बुनियादी ढांचा। | न्यायिक सुधारों को लागू करने में आने वाली बाधाएं और उनके संभावित समाधान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 15–25 | Polity is a core UPSC subject. Both Prelims and Mains test constitutional provisions in depth. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–6 | Questions on constitutional amendments, Parliament, and schemes appear in every SSC paper. |
| State PCS / PSC | High | 5–10 | State PCS papers test both central and state government structures. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | RBI Act, banking legislation, and government policies are regularly tested. |
Key Facts to Remember: न्यायिक सुधारों पर संसदीय समिति की रिपोर्ट: न्यायपालिका में दक्षता और पहुंच बढ़ाने के सुझाव
- कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने 18 मई, 2026 को न्यायिक सुधारों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
- रिपोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार के लिए एक राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग (NJSC) के गठन का सुझाव दिया गया है।
- NJSC का उद्देश्य न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण के लिए एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित प्रणाली सुनिश्चित करना है।
- लंबित मामलों को कम करने के लिए अदालतों के कार्य दिवसों में वृद्धि और न्यायिक बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की सिफारिश की गई है।
- रिपोर्ट में न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात में सुधार और अदालती कार्यवाही के पूर्ण डिजिटलीकरण पर जोर दिया गया है।
- वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्रों, जैसे मध्यस्थता और लोक अदालतों को मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।
- मध्यस्थता विधेयक, 2023 के प्रभावी कार्यान्वयन और इसे अधिक सुलभ बनाने की सिफारिश की गई है।
- न्यायिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधीशों की संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा का प्रस्ताव है।
- यह रिपोर्ट भारत के 'ईज ऑफ जस्टिस' लक्ष्य को प्राप्त करने और न्याय तक पहुंच में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है।
- समिति के अध्यक्ष श्री विवेक अग्निहोत्री थे, जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपी।
Practice Questions
Q1. न्यायिक सुधारों पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार के लिए किस आयोग के गठन का सुझाव दिया गया है?
- राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (NJC)
- राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग (NJSC)
- अखिल भारतीय न्यायिक सेवा आयोग (AIJSC)
- उच्च न्यायिक नियुक्ति आयोग (HJAC)
Explanation: रिपोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण के लिए एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु 'राष्ट्रीय न्यायिक सेवा आयोग (NJSC)' के गठन का सुझाव दिया गया है। यह वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली से जुड़ी चिंताओं को दूर करने का प्रयास है।
Q2. रिपोर्ट में लंबित मामलों को कम करने के लिए निम्नलिखित में से किस उपाय पर जोर नहीं दिया गया है?
- अदालतों के कार्य दिवसों में वृद्धि
- न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात में सुधार
- वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्रों को बढ़ावा देना
- सभी मामलों को केवल उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित करना
Explanation: रिपोर्ट में लंबित मामलों को कम करने के लिए अदालतों के कार्य दिवसों में वृद्धि, न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात में सुधार और ADR तंत्रों को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। सभी मामलों को उच्चतम न्यायालय में स्थानांतरित करना अव्यावहारिक और न्यायपालिका पर अत्यधिक बोझ डालने वाला होगा।
Q3. भारत में वर्तमान में प्रति मिलियन जनसंख्या पर न्यायाधीशों की संख्या लगभग कितनी है, जिसकी रिपोर्ट में सुधार की सिफारिश की गई है?
- 5-10
- 15-20
- 20-25
- 30-35
Explanation: भारत में वर्तमान में प्रति मिलियन जनसंख्या पर न्यायाधीशों की संख्या लगभग 21 है। विधि आयोग ने इसे बढ़ाकर 50 करने की सिफारिश की थी, और रिपोर्ट में भी इस अनुपात में सुधार पर जोर दिया गया है ताकि लंबित मामलों को प्रभावी ढंग से निपटाया जा सके।
Q4. वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्रों में निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?
- मध्यस्थता (Mediation)
- सुलह (Conciliation)
- लोक अदालतें (Lok Adalats)
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review)
Explanation: वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्रों में मध्यस्थता, सुलह और लोक अदालतें शामिल हैं, जो विवादों को अदालत के बाहर निपटाने में मदद करते हैं। न्यायिक समीक्षा न्यायपालिका द्वारा कानूनों और सरकारी कार्यों की संवैधानिकता की जांच करने की शक्ति है, जो ADR का हिस्सा नहीं है।
Q5. न्यायिक सुधारों पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष कौन थे?
- श्री राजनाथ सिंह
- श्री अर्जुन राम मेघवाल
- श्री विवेक अग्निहोत्री
- श्री अमित शाह
Explanation: कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री विवेक अग्निहोत्री थे, जिन्होंने 18 मई, 2026 को लोकसभा अध्यक्ष को न्यायिक सुधारों पर रिपोर्ट सौंपी।
How to Prepare Indian Polity & Governance for Government Exams — न्यायिक सुधारों पर संसदीय समिति की रिपोर्ट: न्याय…
Map every news item to an Article or provision in the Constitution. This is what UPSC Prelims directly tests.
For SSC and Railway, focus on the practical side — who appoints whom, term lengths, and what each body does.
Note the date and context of any constitutional amendment or ordinance. Questions are often framed around the 'first time' or 'most recent' event.
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