भारतीय रिजर्व बैंक ने 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क लॉन्च किया: खुदरा और थोक लेनदेन में ब्लॉकचेन का विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 22 मई, 2026 को 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क का अनावरण किया, जो केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के खुदरा (e₹-R) और थोक (e₹-W) दोनों संस्करणों के दायरे और उपयोग को महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित करेगा। इस नए चरण में ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के उन्नत अनुप्रयोग, ऑफ़लाइन कार्यक्षमता, और अंतर-संचालनीयता पर जोर दिया गया है, जिसका उद्देश्य भारत को एक कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाना है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 22 मई, 2026 को 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क लॉन्च किया।
- यह केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के खुदरा (e₹-R) और थोक (e₹-W) दोनों संस्करणों का विस्तार करेगा।
- फ्रेमवर्क में ऑफ़लाइन कार्यक्षमता, अंतर-संचालनीयता और उन्नत ब्लॉकचेन अनुप्रयोग शामिल हैं।
- स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट क्षमताओं को भी डिजिटल रुपये में एकीकृत किया जाएगा।
- खुदरा डिजिटल रुपये (e₹-R) का पायलट प्रोजेक्ट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू हुआ था।
- थोक डिजिटल रुपये (e₹-W) का पायलट प्रोजेक्ट 1 नवंबर, 2022 को लॉन्च किया गया था।
- इसका उद्देश्य वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और भुगतान प्रणालियों को अधिक कुशल बनाना है।
- 20 से अधिक बैंकों को डिजिटल रुपया नेटवर्क में शामिल किया जाएगा, और इसका उपयोग 100 से अधिक शहरों में विस्तारित होगा।
- डिजिटल रुपया डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) पर आधारित है।
- यह भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने और वैश्विक CBDC विकास में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखता है।
Why In News
यह घोषणा RBI द्वारा डिजिटल रुपये के पायलट प्रोजेक्ट्स की सफलताओं और सीखों के बाद की गई है, जिसने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और भुगतान प्रणालियों को अधिक कुशल बनाने की क्षमता प्रदर्शित की है। 'डिजिटल रुपया 2.0' का लक्ष्य अब बड़े पैमाने पर अपनाने और विभिन्न वित्तीय पारिस्थितिक तंत्रों में इसके एकीकरण को सुनिश्चित करना है।
Syllabus Connection
यह समाचार केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) और भारत में डिजिटल भुगतान के भविष्य से संबंधित है। छात्रों को मौद्रिक नीति, वित्तीय समावेशन, ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभावों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | RBI द्वारा 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क लॉन्च। | CBDC का विस्तार, कैशलेस अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन पर प्रभाव। |
| कब | 22 मई, 2026 को अनावरण। | पायलट प्रोजेक्ट्स की सीख और बड़े पैमाने पर अपनाने की रणनीति। |
| विशेषताएँ | ऑफ़लाइन कार्यक्षमता, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट, अंतर-संचालनीयता। | तकनीकी एकीकरण, साइबर सुरक्षा और नियामक चुनौतियाँ। |
| उद्देश्य | भुगतान दक्षता, वित्तीय स्थिरता, नकदी पर निर्भरता कम करना। | मौद्रिक नीति, सीमा पार भुगतान और अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव। |
| तकनीक | ब्लॉकचेन (DLT) पर आधारित। | ब्लॉकचेन के लाभ और जोखिम, डेटा गोपनीयता के मुद्दे। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| State PCS / PSC | High | 4–8 | State budget, MSME, agriculture policy, and banking data are common in state PCS papers. |
Key Facts to Remember: भारतीय रिजर्व बैंक ने 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क लॉन्च किया: खुदरा और थोक लेनदेन में ब्लॉकचेन का विस्तार
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 22 मई, 2026 को 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क लॉन्च किया।
- यह केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के खुदरा (e₹-R) और थोक (e₹-W) दोनों संस्करणों का विस्तार करेगा।
- फ्रेमवर्क में ऑफ़लाइन कार्यक्षमता, अंतर-संचालनीयता और उन्नत ब्लॉकचेन अनुप्रयोग शामिल हैं।
- स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट क्षमताओं को भी डिजिटल रुपये में एकीकृत किया जाएगा।
- खुदरा डिजिटल रुपये (e₹-R) का पायलट प्रोजेक्ट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू हुआ था।
- थोक डिजिटल रुपये (e₹-W) का पायलट प्रोजेक्ट 1 नवंबर, 2022 को लॉन्च किया गया था।
- इसका उद्देश्य वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और भुगतान प्रणालियों को अधिक कुशल बनाना है।
- 20 से अधिक बैंकों को डिजिटल रुपया नेटवर्क में शामिल किया जाएगा, और इसका उपयोग 100 से अधिक शहरों में विस्तारित होगा।
- डिजिटल रुपया डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) पर आधारित है।
- यह भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने और वैश्विक CBDC विकास में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखता है।
Practice Questions
Q1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क कब लॉन्च किया?
- 1 नवंबर, 2022
- 1 दिसंबर, 2022
- 22 मई, 2026
- 15 अगस्त, 2025
Explanation: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 22 मई, 2026 को 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क का अनावरण किया। यह डिजिटल रुपये के पायलट प्रोजेक्ट्स की सफलताओं के बाद का अगला चरण है।
Q2. 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क की प्रमुख नई विशेषताओं में से एक क्या है?
- केवल ऑनलाइन लेनदेन
- केवल थोक लेनदेन
- ऑफ़लाइन कार्यक्षमता
- केवल क्रेडिट कार्ड एकीकरण
Explanation: 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्क की प्रमुख नई विशेषताओं में से एक 'ऑफ़लाइन कार्यक्षमता' का परिचय है, जिससे उपयोगकर्ता इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी डिजिटल रुपये में लेनदेन कर सकेंगे। यह सुविधा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
Q3. खुदरा डिजिटल रुपये (e₹-R) का पायलट प्रोजेक्ट RBI द्वारा कब लॉन्च किया गया था?
- 1 नवंबर, 2022
- 1 दिसंबर, 2022
- 1 जनवरी, 2023
- 1 अप्रैल, 2023
Explanation: RBI ने 1 दिसंबर, 2022 को खुदरा खंड (e₹-R) के लिए डिजिटल रुपये का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। थोक खंड (e₹-W) के लिए पायलट प्रोजेक्ट 1 नवंबर, 2022 को लॉन्च किया गया था।
Q4. डिजिटल रुपया 2.0 किस अंतर्निहित तकनीक पर आधारित है?
- क्लाउड कंप्यूटिंग
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) / ब्लॉकचेन
- क्वांटम कंप्यूटिंग
Explanation: डिजिटल रुपया 2.0, केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) होने के कारण, डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) या ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है। यह तकनीक लेनदेन की सुरक्षा, पारदर्शिता और अपरिवर्तनीयता सुनिश्चित करती है।
Q5. डिजिटल रुपये के संदर्भ में 'स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट' क्षमताओं का क्या अर्थ है?
- डिजिटल रुपये का उपयोग केवल सरकार द्वारा नियंत्रित अनुबंधों के लिए होगा।
- डिजिटल रुपये का उपयोग केवल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अनुबंधों के लिए होगा।
- डिजिटल रुपये का उपयोग प्रोग्रामेबल भुगतान और स्वचालित लेनदेन के लिए किया जा सकेगा।
- डिजिटल रुपये का उपयोग केवल भौतिक अनुबंधों को डिजिटल बनाने के लिए होगा।
Explanation: स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट क्षमताओं का अर्थ है कि डिजिटल रुपये का उपयोग प्रोग्रामेबल भुगतान और स्वचालित लेनदेन के लिए किया जा सकेगा। इससे सरकारी सब्सिडी का लक्षित वितरण, आपूर्ति श्रृंखला वित्तपोषण और स्वचालित एस्क्रो सेवाएँ जैसे विभिन्न उपयोग के मामले संभव होंगे।
How to Prepare Economy & Finance for Government Exams — भारतीय रिजर्व बैंक ने 'डिजिटल रुपया 2.0' फ्रेमवर्…
Track current Repo Rate, Inflation rate, and GDP growth. These three numbers appear in almost every banking exam.
Keep a running note of new schemes with their ministry, launch date, and target beneficiary group.
Focus on the Economic Survey and Union Budget highlights — these single documents generate dozens of exam questions.
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