भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 'हरित बॉन्ड' के लिए नया नियामक ढाँचा जारी: सतत वित्त को बढ़ावा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 31 मई, 2026 को भारत में 'हरित बॉन्ड' जारी करने और सूचीबद्ध करने के लिए एक व्यापक नियामक ढाँचा जारी किया है। इस पहल का उद्देश्य सतत विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाना और देश में हरित वित्त के विकास को बढ़ावा देना है। यह ढाँचा पारदर्शिता, जवाबदेही और बॉन्ड से प्राप्त आय के उचित उपयोग को सुनिश्चित करेगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 31 मई, 2026 को हरित बॉन्ड के लिए एक नया नियामक ढाँचा जारी किया।
- यह ढाँचा भारत में सतत विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और हरित वित्त को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- ढाँचे में नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और प्रदूषण नियंत्रण जैसी 'हरित परियोजनाओं' की स्पष्ट परिभाषा शामिल है।
- जारीकर्ताओं को बॉन्ड जारी करने से पहले एक 'हरित वित्त ढाँचा' स्थापित करना होगा।
- बॉन्ड के 'हरित' साख की पुष्टि के लिए एक स्वतंत्र बाहरी समीक्षा अनिवार्य की गई है।
- यह ढाँचा 'ग्रीनवाशिंग' को रोकने और निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में मदद करेगा।
- भारत का लक्ष्य 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करना है, जिसमें हरित बॉन्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- यह ढाँचा अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ (ICMA) के हरित बॉन्ड सिद्धांतों के साथ संरेखित है।
- केंद्रीय बजट 2022-23 में भारत सरकार द्वारा सॉवरेन हरित बॉन्ड जारी करने की घोषणा की गई थी।
- यह पहल भारत को वैश्विक हरित वित्त बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।
Why In News
भारतीय रिजर्व बैंक ने 31 मई, 2026 को 'हरित बॉन्ड' के लिए एक नया और विस्तृत नियामक ढाँचा जारी किया है। यह घोषणा भारत की जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता तथा अन्य पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्तपोषण को सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ढाँचा निवेशकों और जारीकर्ताओं दोनों के लिए स्पष्टता प्रदान करेगा।
Syllabus Connection
यह समाचार सतत वित्त, हरित बॉन्ड, और भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति व नियामक भूमिका से संबंधित है, जो अर्थव्यवस्था में वित्तीय बाजारों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संबंध को दर्शाता है।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | RBI द्वारा हरित बॉन्ड के लिए नया नियामक ढाँचा जारी | सतत वित्त को बढ़ावा देने और हरित परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने का महत्व। |
| कब | 31 मई, 2026 | भारत के जलवायु लक्ष्यों (2070 तक शुद्ध-शून्य) को प्राप्त करने में समयबद्धता और आवश्यकता। |
| क्यों | पारदर्शिता, जवाबदेही, 'ग्रीनवाशिंग' रोकना | हरित बॉन्ड बाजार में निवेशकों का विश्वास बढ़ाना और पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण को सुगम बनाना। |
| मुख्य प्रावधान | हरित परियोजनाओं की परिभाषा, बाहरी समीक्षा, हरित वित्त ढाँचा | वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (ICMA) के साथ संरेखण और भारतीय बाजार की विशिष्ट आवश्यकताओं का समायोजन। |
| प्रभाव | हरित परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण में वृद्धि, बाजार का विस्तार | भारत की जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| State PCS / PSC | High | 4–8 | State budget, MSME, agriculture policy, and banking data are common in state PCS papers. |
Key Facts to Remember: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 'हरित बॉन्ड' के लिए नया नियामक ढाँचा जारी: सतत वित्त को बढ़ावा
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 31 मई, 2026 को हरित बॉन्ड के लिए एक नया नियामक ढाँचा जारी किया।
- यह ढाँचा भारत में सतत विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और हरित वित्त को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- ढाँचे में नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और प्रदूषण नियंत्रण जैसी 'हरित परियोजनाओं' की स्पष्ट परिभाषा शामिल है।
- जारीकर्ताओं को बॉन्ड जारी करने से पहले एक 'हरित वित्त ढाँचा' स्थापित करना होगा।
- बॉन्ड के 'हरित' साख की पुष्टि के लिए एक स्वतंत्र बाहरी समीक्षा अनिवार्य की गई है।
- यह ढाँचा 'ग्रीनवाशिंग' को रोकने और निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में मदद करेगा।
- भारत का लक्ष्य 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करना है, जिसमें हरित बॉन्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- यह ढाँचा अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ (ICMA) के हरित बॉन्ड सिद्धांतों के साथ संरेखित है।
- केंद्रीय बजट 2022-23 में भारत सरकार द्वारा सॉवरेन हरित बॉन्ड जारी करने की घोषणा की गई थी।
- यह पहल भारत को वैश्विक हरित वित्त बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।
Practice Questions
Q1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 'हरित बॉन्ड' के लिए जारी किए गए नए नियामक ढाँचे का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- केवल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को वित्तपोषित करना।
- हरित परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने हेतु पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- जीवाश्म ईंधन परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देना।
- विदेशी निवेशकों को भारत में केवल पारंपरिक बॉन्ड खरीदने के लिए आकर्षित करना।
Explanation: RBI द्वारा जारी किए गए नए नियामक ढाँचे का प्राथमिक उद्देश्य हरित परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। यह ढाँचा 'ग्रीनवाशिंग' को रोकने और निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए बाहरी समीक्षा और विस्तृत रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को अनिवार्य करता है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा संगठन वैश्विक स्तर पर हरित बॉन्ड सिद्धांतों के लिए व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त दिशानिर्देश प्रदान करता है?
- विश्व बैंक (World Bank)
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)
- अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ (ICMA)
- एशियाई विकास बैंक (ADB)
Explanation: अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ (ICMA) हरित बॉन्ड सिद्धांतों (Green Bond Principles) के लिए व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त दिशानिर्देश प्रदान करता है। RBI का नया नियामक ढाँचा भी इन वैश्विक सिद्धांतों के साथ संरेखित है, जो जारीकर्ताओं को परियोजना चयन, धन के उपयोग, प्रबंधन और रिपोर्टिंग के लिए स्वैच्छिक दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
Q3. भारत ने किस वर्ष तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य निर्धारित किया है?
- 2030
- 2040
- 2050
- 2070
Explanation: भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य निर्धारित किया है। हरित बॉन्ड जैसे वित्तीय साधन इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक बड़े पैमाने पर वित्तपोषण को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
Q4. RBI के नए हरित बॉन्ड ढाँचे के अनुसार, जारीकर्ताओं को बॉन्ड जारी करने से पहले क्या स्थापित करना अनिवार्य है?
- एक लाभांश वितरण नीति
- एक हरित वित्त ढाँचा
- एक शेयर बायबैक योजना
- एक विदेशी मुद्रा हेजिंग रणनीति
Explanation: RBI के नए हरित बॉन्ड ढाँचे के तहत, जारीकर्ताओं को बॉन्ड जारी करने से पहले एक 'हरित वित्त ढाँचा' (Green Finance Framework) स्थापित करना अनिवार्य है। इस ढाँचे में परियोजना चयन प्रक्रिया, धन के प्रबंधन और उपयोग, और प्रभाव रिपोर्टिंग का विवरण शामिल होता है।
Q5. भारत सरकार ने किस केंद्रीय बजट में सॉवरेन हरित बॉन्ड जारी करने की घोषणा की थी?
- 2020-21
- 2021-22
- 2022-23
- 2023-24
Explanation: भारत सरकार ने 2022-23 के केंद्रीय बजट में अपने पहले सॉवरेन हरित बॉन्ड जारी करने की घोषणा की थी। यह घोषणा देश में हरित वित्त के लिए एक मजबूत संकेत था और इसने इस क्षेत्र में आगे के नियामक विकास के लिए मार्ग प्रशस्त किया।
How to Prepare Economy & Finance for Government Exams — भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 'हरित बॉन्ड' के लिए नया…
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Keep a running note of new schemes with their ministry, launch date, and target beneficiary group.
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