ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: विस्तार, डी-डॉलरीकरण और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर
17 मई, 2026 को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में समूह के विस्तार, डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को तेज करने और एक अधिक समावेशी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक में नए सदस्य देशों की पहली बार भागीदारी ने समूह की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
2-Minute Summary (TL;DR)
- 17 मई, 2026 को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित हुई।
- 2024 में शामिल हुए 6 नए सदस्य देशों (सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना, संयुक्त अरब अमीरात) ने पहली बार पूर्ण सदस्य के रूप में भाग लिया।
- ब्रिक्स अब 11 देशों का एक समूह बन गया है।
- बैठक के मुख्य एजेंडे में ब्रिक्स के रणनीतिक विस्तार का रोडमैप और डी-डॉलरीकरण के प्रयास शामिल थे।
- मंत्रियों ने एक अधिक समावेशी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) ब्रिक्स की प्रमुख पहलें हैं।
- ब्रिक्स की अवधारणा 2001 में जिम ओ'नील ने दी थी, और दक्षिण अफ्रीका 2010 में शामिल हुआ।
- भारत ने ब्रिक्स के विस्तार और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के उपयोग का समर्थन किया है।
- यह बैठक वैश्विक दक्षिण में ब्रिक्स के बढ़ते प्रभाव और पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने का संकेत देती है।
Why In News
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और कई विकासशील देश एक अधिक संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। ब्रिक्स का विस्तार और डी-डॉलरीकरण पर जोर पश्चिमी प्रभुत्व वाली अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करता है, जिससे यह बैठक अत्यधिक प्रासंगिक हो जाती है।
Syllabus Connection
यह लेख ब्रिक्स जैसे महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समूह की संरचना, उसके विस्तार के निहितार्थों, डी-डॉलरीकरण जैसे आर्थिक एजेंडे और वैश्विक भू-राजनीति में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। छात्रों को वैश्विक शक्ति संतुलन पर इन विकासों के प्रभाव को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक, विस्तार, डी-डॉलरीकरण, बहुध्रुवीयता। | वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव, पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती। |
| कब | 17 मई, 2026 को रियो डी जनेरियो में आयोजित। | बदलते वैश्विक परिदृश्य में ब्रिक्स की बढ़ती प्रासंगिकता का समय। |
| कौन | ब्रिक्स और नए सदस्य देशों के विदेश मंत्री। | वैश्विक दक्षिण के प्रमुख हितधारक, उनके साझा हित और एजेंडा। |
| क्यों | वैश्विक शासन में सुधार, डॉलर पर निर्भरता कम करना, सामूहिक प्रभाव बढ़ाना। | आर्थिक संप्रभुता, भू-राजनीतिक स्वायत्तता, विकासशील देशों की आकांक्षाएँ। |
| कैसे | NDB, CRA, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना। | बहुपक्षीय संस्थानों का विकास, आर्थिक सहयोग के तंत्र, कूटनीतिक पहल। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 10–20 | International relations is a core GS-II topic for UPSC. Bilateral agreements, multilateral bodies, and geopolitics are essential. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | International summits, treaties, and India's bilateral relations appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | G20, IMF/World Bank decisions, and global trade events are tested in banking exams. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | State PCS papers test India's role in international forums and bilateral trade ties. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Medium | 2–4 | Summits, UN resolutions, and India's foreign policy are included in Railway GK. |
Key Facts to Remember: ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: विस्तार, डी-डॉलरीकरण और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर जोर
- 17 मई, 2026 को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित हुई।
- 2024 में शामिल हुए 6 नए सदस्य देशों (सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना, संयुक्त अरब अमीरात) ने पहली बार पूर्ण सदस्य के रूप में भाग लिया।
- ब्रिक्स अब 11 देशों का एक समूह बन गया है।
- बैठक के मुख्य एजेंडे में ब्रिक्स के रणनीतिक विस्तार का रोडमैप और डी-डॉलरीकरण के प्रयास शामिल थे।
- मंत्रियों ने एक अधिक समावेशी बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) ब्रिक्स की प्रमुख पहलें हैं।
- ब्रिक्स की अवधारणा 2001 में जिम ओ'नील ने दी थी, और दक्षिण अफ्रीका 2010 में शामिल हुआ।
- भारत ने ब्रिक्स के विस्तार और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के उपयोग का समर्थन किया है।
- यह बैठक वैश्विक दक्षिण में ब्रिक्स के बढ़ते प्रभाव और पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने का संकेत देती है।
Practice Questions
Q1. 17 मई, 2026 को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक किस शहर में आयोजित की गई थी?
- बीजिंग
- नई दिल्ली
- रियो डी जनेरियो
- जोहान्सबर्ग
Explanation: ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 17 मई, 2026 को ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित की गई थी। ब्राजील इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।
Q2. 2024 में ब्रिक्स में शामिल हुए नए सदस्य देशों की संख्या कितनी है?
- 3
- 5
- 6
- 8
Explanation: 2024 में ब्रिक्स में 6 नए सदस्य देश शामिल हुए थे: सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात। इसके साथ ही ब्रिक्स अब 11 देशों का समूह बन गया है।
Q3. ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में चर्चा किए गए प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में से कौन सा शामिल नहीं था?
- ब्रिक्स का विस्तार
- डी-डॉलरीकरण
- बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का प्रबंधन
Explanation: ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में ब्रिक्स का विस्तार, डी-डॉलरीकरण और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था पर गहन चर्चा हुई। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का प्रबंधन ब्रिक्स के एजेंडे का हिस्सा नहीं है।
Q4. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) का मुख्यालय किस शहर में स्थित है?
- नई दिल्ली
- मॉस्को
- शंघाई
- केप टाउन
Explanation: न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) का मुख्यालय शंघाई, चीन में स्थित है। इसकी स्थापना ब्रिक्स देशों द्वारा बुनियादी ढांचा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी।
Q5. ब्रिक्स की अवधारणा सबसे पहले किस अर्थशास्त्री ने गढ़ी थी?
- जॉन मेनार्ड कीन्स
- जिम ओ'नील
- एडम स्मिथ
- मिल्टन फ्रीडमैन
Explanation: ब्रिक्स की अवधारणा सबसे पहले 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने गढ़ी थी। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के रूप में पहचाना था।
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