पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण पर संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव
भारत सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में महिलाओं के लिए आरक्षण को मौजूदा एक-तिहाई से बढ़ाकर 50% करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव पेश किया है। इस कदम का उद्देश्य स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को और मजबूत करना है, जिससे जमीनी स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में लैंगिक समानता सुनिश्चित हो सके। यह प्रस्ताव लोकसभा में 28 मई, 2026 को प्रस्तुत किया गया।
2-Minute Summary (TL;DR)
- केंद्र सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में महिला आरक्षण को 33% से बढ़ाकर 50% करने का प्रस्ताव किया है।
- यह प्रस्ताव 28 मई, 2026 को लोकसभा में 'संविधान (एक सौ सत्ताईसवां संशोधन) विधेयक, 2026' के रूप में पेश किया गया।
- विधेयक संविधान के अनुच्छेद 243D में संशोधन का प्रस्ताव करता है।
- यह आरक्षण PRIs के सभी स्तरों - ग्राम, मध्यवर्ती और जिला पंचायत - पर लागू होगा।
- अध्यक्षों के पदों में भी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान होगा।
- 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने PRIs को संवैधानिक दर्जा दिया और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य किया था।
- संवैधानिक संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की विधानसभाओं का अनुसमर्थन आवश्यक है।
- कुछ राज्यों जैसे बिहार, मध्य प्रदेश ने पहले ही PRIs में 50% महिला आरक्षण लागू कर दिया है।
- यह कदम स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी और लैंगिक समानता को मजबूत करेगा।
- यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG 5) के अनुरूप है।
Why In News
केंद्र सरकार ने 28 मई, 2026 को लोकसभा में पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण को 33% से बढ़ाकर 50% करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया है। यह विधेयक भारत में स्थानीय शासन और लैंगिक समानता के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का प्रस्ताव करता है, जिससे यह विषय तत्काल राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। यह कदम महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Syllabus Connection
यह लेख पंचायती राज संस्थाओं के संवैधानिक ढांचे, महिला आरक्षण के महत्व और संवैधानिक संशोधन प्रक्रिया से संबंधित है। छात्रों को 73वें संशोधन, अनुच्छेद 243D और स्थानीय शासन में महिलाओं की भूमिका को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | पंचायती राज में महिला आरक्षण 33% से 50% करने का विधेयक। | स्थानीय शासन में लैंगिक समानता के निहितार्थ और चुनौतियाँ। |
| कब | 28 मई, 2026 को लोकसभा में पेश। | 73वें संशोधन के बाद महिला प्रतिनिधित्व की यात्रा और भविष्य की दिशा। |
| किसके द्वारा | केंद्र सरकार द्वारा, अनुच्छेद 243D में संशोधन। | संवैधानिक संशोधन प्रक्रिया और संघीय ढांचे पर इसका प्रभाव। |
| उद्देश्य | स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाना। | 'सरपंच पति' सिंड्रोम जैसी चुनौतियों का समाधान और वास्तविक सशक्तिकरण। |
| प्रभाव | लगभग 25 लाख महिला प्रतिनिधि, समावेशी निर्णय-निर्माण। | सामाजिक-आर्थिक विकास, नीतिगत प्राथमिकताओं में बदलाव और लोकतांत्रिक मजबूती। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 15–25 | Polity is a core UPSC subject. Both Prelims and Mains test constitutional provisions in depth. |
| State PCS / PSC | High | 5–10 | State PCS papers test both central and state government structures. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–6 | Questions on constitutional amendments, Parliament, and schemes appear in every SSC paper. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | RBI Act, banking legislation, and government policies are regularly tested. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–5 | Government schemes and constitutional bodies are standard Railway GK questions. |
Key Facts to Remember: पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण पर संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव
- केंद्र सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में महिला आरक्षण को 33% से बढ़ाकर 50% करने का प्रस्ताव किया है।
- यह प्रस्ताव 28 मई, 2026 को लोकसभा में 'संविधान (एक सौ सत्ताईसवां संशोधन) विधेयक, 2026' के रूप में पेश किया गया।
- विधेयक संविधान के अनुच्छेद 243D में संशोधन का प्रस्ताव करता है।
- यह आरक्षण PRIs के सभी स्तरों - ग्राम, मध्यवर्ती और जिला पंचायत - पर लागू होगा।
- अध्यक्षों के पदों में भी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान होगा।
- 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 ने PRIs को संवैधानिक दर्जा दिया और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण अनिवार्य किया था।
- संवैधानिक संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत और आधे राज्यों की विधानसभाओं का अनुसमर्थन आवश्यक है।
- कुछ राज्यों जैसे बिहार, मध्य प्रदेश ने पहले ही PRIs में 50% महिला आरक्षण लागू कर दिया है।
- यह कदम स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी और लैंगिक समानता को मजबूत करेगा।
- यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG 5) के अनुरूप है।
Practice Questions
Q1. पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33% से बढ़ाकर 50% करने के लिए प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन विधेयक किस अनुच्छेद में संशोधन करेगा?
- अनुच्छेद 243A
- अनुच्छेद 243C
- अनुच्छेद 243D
- अनुच्छेद 243G
Explanation: पंचायती राज संस्थाओं में सीटों के आरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 243D में निहित है। प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन विधेयक इसी अनुच्छेद में संशोधन करेगा ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण को 33% से बढ़ाकर 50% किया जा सके। यह स्थानीय शासन में लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा।
Q2. पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा प्रदान किया गया था?
- 42वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 61वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 74वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
Explanation: पंचायती राज संस्थाओं को 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था। इस अधिनियम ने संविधान में भाग IX जोड़ा और पंचायतों के लिए अनिवार्य प्रावधान किए, जिसमें महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण भी शामिल था।
Q3. प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए संसद के अलावा और किसकी मंजूरी आवश्यक होगी?
- राष्ट्रपति की विशेष स्वीकृति
- सर्वोच्च न्यायालय की सलाह
- कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं का अनुसमर्थन
- भारत के चुनाव आयोग की सिफारिश
Explanation: चूंकि यह संवैधानिक संशोधन विधेयक संघीय ढांचे से संबंधित है (पंचायती राज राज्य सूची का विषय है), इसे संसद के दोनों सदनों द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित होने के अलावा, कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं द्वारा भी अनुसमर्थित किया जाना आवश्यक होगा। यह भारतीय संविधान की संशोधन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
Q4. 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में कौन सा भाग जोड़ा गया था?
- भाग VII
- भाग VIII
- भाग IX
- भाग X
Explanation: 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया था, जिसका शीर्षक 'पंचायतें' है। यह भाग पंचायती राज संस्थाओं की संरचना, शक्तियों और कार्यों से संबंधित प्रावधानों को समाहित करता है, जिससे उन्हें संवैधानिक मान्यता मिली।
Q5. पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण को 50% करने वाला पहला राज्य कौन सा था?
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान
- बिहार
- महाराष्ट्र
Explanation: बिहार पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू करने वाला पहला राज्य था। बिहार ने 2006 में अपने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन करके यह प्रावधान किया था, जिसने अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल कायम की और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
How to Prepare Indian Polity & Governance for Government Exams — पंचायती राज संस्थाओं में महिला आरक्षण पर संवैधानि…
Map every news item to an Article or provision in the Constitution. This is what UPSC Prelims directly tests.
For SSC and Railway, focus on the practical side — who appoints whom, term lengths, and what each body does.
Note the date and context of any constitutional amendment or ordinance. Questions are often framed around the 'first time' or 'most recent' event.
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