वैश्विक भू-राजनीति में उभरती बहुध्रुवीय व्यवस्था और भारत की भूमिका
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहां शक्ति के कई केंद्र उभर रहे हैं। इस बदलाव में संयुक्त राज्य अमेरिका की पारंपरिक प्रभुत्व वाली स्थिति कम हो रही है, और चीन, भारत, रूस तथा यूरोपीय संघ जैसे खिलाड़ी वैश्विक मंच पर अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत इस उभरती हुई व्यवस्था में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण की नीति के साथ एक महत्वपूर्ण संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभरा है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- वैश्विक भू-राजनीति एकध्रुवीय से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें कई शक्ति केंद्र उभर रहे हैं।
- चीन का आर्थिक और सैन्य उदय, रूस का पुनरुत्थान और भारत की बढ़ती ताकत इस बदलाव के प्रमुख कारक हैं।
- भारत की विदेश नीति 'रणनीतिक स्वायत्तता' और 'बहु-संरेखण' के सिद्धांतों पर आधारित है।
- भारत क्वाड, BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय रूप से शामिल है।
- रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में अस्थिरता ने वैश्विक शक्ति संतुलन को और प्रभावित किया है।
- भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए लगातार जोर दे रहा है।
- भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियां क्षेत्रीय स्थिरता और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देती हैं।
- बहुध्रुवीय व्यवस्था में गठबंधन अधिक लचीले और स्थिति-आधारित हो सकते हैं।
- भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- संविधान का अनुच्छेद 51 अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में से एक है।
Why In News
हाल के वर्षों में, विभिन्न भू-राजनीतिक घटनाओं, जैसे कि रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता, और चीन की बढ़ती आर्थिक व सैन्य शक्ति, ने वैश्विक शक्ति संतुलन में एक स्पष्ट बदलाव को उजागर किया है। इन घटनाक्रमों ने एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उद्भव को गति दी है, जिससे भारत जैसे देशों की रणनीतिक स्थिति और भूमिका पर नए सिरे से चर्चा हो रही है।
Syllabus Connection
यह लेख वैश्विक भू-राजनीति में उभरती बहुध्रुवीय व्यवस्था और भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों (जैसे रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-संरेखण) को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। छात्रों को विभिन्न बहुपक्षीय मंचों और भारत की क्षेत्रीय व वैश्विक भूमिका पर ध्यान देना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उद्भव | वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव और इसके भू-राजनीतिक निहितार्थों का विश्लेषण। |
| भारत की भूमिका | रणनीतिक स्वायत्तता, बहु-संरेखण नीति | भारत की विदेश नीति के सिद्धांतों और वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती प्रासंगिकता का मूल्यांकन। |
| प्रमुख कारक | चीन का उदय, रूस-यूक्रेन युद्ध | इन कारकों के वैश्विक शक्ति गतिशीलता और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर दीर्घकालिक प्रभाव। |
| संबंधित समूह | क्वाड, BRICS, SCO, G20 | इन समूहों की भूमिका, उद्देश्य और वैश्विक शासन में उनके योगदान का विश्लेषण। |
| चुनौतियाँ | संघर्ष का जोखिम, वैश्विक शासन में जटिलता | बहुध्रुवीय व्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आम सहमति प्राप्त करने की चुनौतियों का परीक्षण। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 10–20 | International relations is a core GS-II topic for UPSC. Bilateral agreements, multilateral bodies, and geopolitics are essential. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | International summits, treaties, and India's bilateral relations appear in SSC GK. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | State PCS papers test India's role in international forums and bilateral trade ties. |
Key Facts to Remember: वैश्विक भू-राजनीति में उभरती बहुध्रुवीय व्यवस्था और भारत की भूमिका
- वैश्विक भू-राजनीति एकध्रुवीय से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें कई शक्ति केंद्र उभर रहे हैं।
- चीन का आर्थिक और सैन्य उदय, रूस का पुनरुत्थान और भारत की बढ़ती ताकत इस बदलाव के प्रमुख कारक हैं।
- भारत की विदेश नीति 'रणनीतिक स्वायत्तता' और 'बहु-संरेखण' के सिद्धांतों पर आधारित है।
- भारत क्वाड, BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों में सक्रिय रूप से शामिल है।
- रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में अस्थिरता ने वैश्विक शक्ति संतुलन को और प्रभावित किया है।
- भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए लगातार जोर दे रहा है।
- भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियां क्षेत्रीय स्थिरता और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देती हैं।
- बहुध्रुवीय व्यवस्था में गठबंधन अधिक लचीले और स्थिति-आधारित हो सकते हैं।
- भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- संविधान का अनुच्छेद 51 अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में से एक है।
Practice Questions
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के उभरते शक्ति केंद्रों में से एक नहीं है?
- चीन
- भारत
- ब्राजील
- कनाडा
Explanation: बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में शक्ति के कई केंद्र होते हैं, जिनमें चीन, भारत, रूस, यूरोपीय संघ और ब्राजील जैसे देश शामिल हैं। कनाडा एक विकसित देश है, लेकिन वैश्विक शक्ति संतुलन में इसका प्रभाव चीन या भारत जितना नहीं है, इसलिए यह उभरते हुए शक्ति केंद्रों में से एक नहीं माना जाता।
Q2. भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख सिद्धांत क्या है, जो उसे किसी एक शक्ति ब्लॉक से बंधने से बचाता है?
- आक्रामक राष्ट्रवाद
- बहु-संरेखण
- एकध्रुवीयता का समर्थन
- सैन्य गठबंधन
Explanation: भारत की विदेश नीति 'बहु-संरेखण' (Multi-alignment) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे पहले 'गुटनिरपेक्षता' के रूप में जाना जाता था। इसका अर्थ है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखता है और किसी एक शक्ति ब्लॉक का स्थायी हिस्सा नहीं बनता है, जिससे उसे रणनीतिक स्वायत्तता मिलती है।
Q3. क्वाड (QUAD) समूह में कौन से देश शामिल हैं?
- भारत, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका
- भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया
- अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी
- भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान
Explanation: क्वाड (QUAD) समूह में चार देश शामिल हैं: भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करता है, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करता है।
Q4. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने से संबंधित है?
- अनुच्छेद 39
- अनुच्छेद 44
- अनुच्छेद 51
- अनुच्छेद 50
Explanation: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का हिस्सा है, जो अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण और सम्मानजनक संबंध बनाए रखने, अंतर्राष्ट्रीय कानून और संधि दायित्वों के प्रति सम्मान बढ़ाने, और अंतर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटाने के लिए राज्य को निर्देश देता है।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का संभावित परिणाम नहीं है?
- शक्ति का विकेंद्रीकरण
- अधिक जटिल अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- एक शक्ति का पूर्ण प्रभुत्व
- लचीले गठबंधन
Explanation: एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में शक्ति का विकेंद्रीकरण होता है, जहां कई प्रमुख शक्तियां वैश्विक मामलों को प्रभावित करती हैं। इसके परिणामस्वरूप अधिक जटिल अंतर्राष्ट्रीय संबंध और लचीले गठबंधन बनते हैं। एक शक्ति का पूर्ण प्रभुत्व एकध्रुवीय व्यवस्था की विशेषता है, न कि बहुध्रुवीय व्यवस्था की।
How to Prepare International Affairs for Government Exams — वैश्विक भू-राजनीति में उभरती बहुध्रुवीय व्यवस्था…
Focus on India-centric news — India's bilateral visits, MoUs signed, and positions in international bodies. This is what domestic exams test.
For UPSC, understand geopolitical context: Why does India take a particular position? What is India's strategic interest?
Keep a running note of all G20, SCO, BRICS, and QUAD-related outcomes. These bodies generate 3–5 questions per major exam cycle.
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