पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने हेतु 'ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026' पारित
भारतीय संसद ने 17 मई, 2026 को 'ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026' पारित किया, जिसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को और अधिक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करना है। यह विधेयक 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के प्रावधानों को मजबूत करेगा और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाएगा, जिससे ग्रामीण विकास में पंचायतों की भूमिका बढ़ेगी।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026 को 17 मई, 2026 को भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया।
- यह विधेयक पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।
- यह 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों को मजबूत करता है।
- विधेयक केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का प्रतिशत बढ़ाएगा जो सीधे पंचायतों को हस्तांतरित होते हैं।
- राज्य सरकारों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 29 विषयों पर पंचायतों को कार्य, कार्यकर्ता और धन हस्तांतरित करना अनिवार्य होगा।
- पंचायतों को अपने स्वयं के छोटे कर लगाने और शुल्क एकत्र करने की अधिक शक्तियां प्रदान की गई हैं।
- एक राष्ट्रीय पंचायती राज कोष (NPRF) की स्थापना का प्रस्ताव है।
- ग्राम सभा की भूमिका का विस्तार किया गया है, जिसमें विकास योजनाओं के अनुमोदन में उसकी भूमिका अनिवार्य होगी।
- विधेयक में पंचायतों को स्थानीय कर्मचारी नियुक्त करने और उनका प्रबंधन करने का अधिकार दिया गया है।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को अनिवार्य किया गया है ताकि पंचायतों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
- ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता लाएगा।
- यह विधेयक ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
Why In News
संसद के दोनों सदनों द्वारा 17 मई, 2026 को 'ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026' को पारित किया गया, जो पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है। यह विधेयक 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के बाद से ग्रामीण स्थानीय स्वशासन में सबसे बड़ा सुधार है, जिसका उद्देश्य पंचायतों को वास्तविक 'स्वशासन की इकाई' बनाना है।
Syllabus Connection
यह विधेयक भारत के संघीय ढांचे, स्थानीय स्वशासन (पंचायती राज), 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन और ग्रामीण विकास में पंचायतों की भूमिका से संबंधित है। छात्रों को शक्ति के विकेंद्रीकरण और वित्तीय स्वायत्तता के महत्व को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है | ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026। | पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने वाला एक व्यापक विधायी सुधार। |
| कब | 17 मई, 2026 को संसद द्वारा पारित। | 73वें संवैधानिक संशोधन के बाद स्थानीय स्वशासन में सबसे बड़ा विधायी परिवर्तन। |
| किसने | ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय। | केंद्र सरकार की जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक। |
| मुख्य प्रावधान | वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां, ग्राम सभा का विस्तार, NPRF। | स्थानीय कर लगाने की शक्ति, 29 विषयों पर पूर्ण हस्तांतरण, सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य। |
| महत्व | PRIs को वास्तविक 'स्वशासन की इकाई' बनाना। | ग्रामीण विकास में पंचायतों की भूमिका बढ़ाना, पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी विकास को बढ़ावा देना। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 15–25 | Polity is a core UPSC subject. Both Prelims and Mains test constitutional provisions in depth. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–6 | Questions on constitutional amendments, Parliament, and schemes appear in every SSC paper. |
| State PCS / PSC | High | 5–10 | State PCS papers test both central and state government structures. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | RBI Act, banking legislation, and government policies are regularly tested. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–5 | Government schemes and constitutional bodies are standard Railway GK questions. |
Key Facts to Remember: पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने हेतु 'ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026' पारित
- ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026 को 17 मई, 2026 को भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया।
- यह विधेयक पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करने का लक्ष्य रखता है।
- यह 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों को मजबूत करता है।
- विधेयक केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का प्रतिशत बढ़ाएगा जो सीधे पंचायतों को हस्तांतरित होते हैं।
- राज्य सरकारों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 29 विषयों पर पंचायतों को कार्य, कार्यकर्ता और धन हस्तांतरित करना अनिवार्य होगा।
- पंचायतों को अपने स्वयं के छोटे कर लगाने और शुल्क एकत्र करने की अधिक शक्तियां प्रदान की गई हैं।
- एक राष्ट्रीय पंचायती राज कोष (NPRF) की स्थापना का प्रस्ताव है।
- ग्राम सभा की भूमिका का विस्तार किया गया है, जिसमें विकास योजनाओं के अनुमोदन में उसकी भूमिका अनिवार्य होगी।
- विधेयक में पंचायतों को स्थानीय कर्मचारी नियुक्त करने और उनका प्रबंधन करने का अधिकार दिया गया है।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को अनिवार्य किया गया है ताकि पंचायतों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
- ई-गवर्नेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग पंचायतों के कामकाज में पारदर्शिता लाएगा।
- यह विधेयक ग्रामीण विकास मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
Practice Questions
Q1. ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना
- राज्य सरकारों की शक्तियों को बढ़ाना
- पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाना
- केंद्र सरकार को अधिक विधायी शक्तियां प्रदान करना
Explanation: ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को अधिक वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करना है। यह विधेयक 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम के प्रावधानों को मजबूत करके जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाने का प्रयास करता है।
Q2. यह विधेयक भारतीय संविधान के किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम के प्रावधानों को मजबूत करता है?
- 42वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 73वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 74वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 86वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
Explanation: ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026 भारतीय संविधान के 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों को मजबूत करता है। यह अधिनियम पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है और ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की नींव रखता है।
Q3. विधेयक के तहत पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध कितने विषयों पर वास्तविक कार्य, कार्यकर्ता और धन हस्तांतरित करना अनिवार्य होगा?
- 18 विषय
- 29 विषय
- 32 विषय
- 40 विषय
Explanation: विधेयक के तहत राज्य सरकारों को पंचायतों को ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 29 विषयों पर वास्तविक कार्य, कार्यकर्ता और धन (फंक्शन, फंक्शनरीज और फंड्स) हस्तांतरित करना अनिवार्य होगा। यह पंचायतों को ग्रामीण विकास के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाएगा।
Q4. विधेयक में पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने के लिए किस नए कोष की स्थापना का प्रस्ताव है?
- राज्य पंचायती राज कोष (SPRF)
- जिला विकास कोष (DDF)
- राष्ट्रीय पंचायती राज कोष (NPRF)
- ग्राम विकास निधि (GVF)
Explanation: विधेयक में पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने और उन्हें विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध कराने हेतु राष्ट्रीय पंचायती राज कोष (NPRF) की स्थापना का प्रस्ताव है। यह पंचायतों को अपनी परियोजनाओं के लिए धन जुटाने में मदद करेगा।
Q5. विधेयक में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किस प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है?
- न्यायिक समीक्षा
- विधायी ऑडिट
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit)
- कार्यकारी मूल्यांकन
Explanation: ग्राम स्वशासन अधिकारिता विधेयक 2026 में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) को अनिवार्य किया गया है। इसमें ग्राम सभा द्वारा पंचायतों के कार्यों और खर्चों की नियमित समीक्षा की जाएगी, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
How to Prepare Indian Polity & Governance for Government Exams — पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने हेतु 'ग्राम स…
Map every news item to an Article or provision in the Constitution. This is what UPSC Prelims directly tests.
For SSC and Railway, focus on the practical side — who appoints whom, term lengths, and what each body does.
Note the date and context of any constitutional amendment or ordinance. Questions are often framed around the 'first time' or 'most recent' event.
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