हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना का दूसरा चरण: भारत का 2047 तक शुद्ध-शून्य लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम
भारत सरकार ने 5 जून, 2026 को 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देना है। इस चरण में 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और इसका लक्ष्य 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देना है। यह पहल भारत के 2047 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत सरकार ने 5 जून, 2026 को 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।
- इस चरण के लिए कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये (लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का बजट आवंटित किया गया है।
- योजना का लक्ष्य 2030 तक देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में अतिरिक्त 100 GW का योगदान करना है।
- यह योजना हरित हाइड्रोजन उत्पादन, अपतटीय पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) पर केंद्रित है।
- हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रति किलोग्राम ₹50 तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
- लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
- अपतटीय पवन ऊर्जा के लिए गुजरात और तमिलनाडु तटों पर 5 GW की प्रारंभिक क्षमता का लक्ष्य है।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए 50 GWh की क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसके लिए ₹15,000 करोड़ की सब्सिडी है।
- यह योजना भारत के 2047 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- योजना 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देती है और घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देती है।
- यह भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
Why In News
भारत सरकार ने 5 जून, 2026 को 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' के दूसरे चरण की घोषणा की है। इस घोषणा में नए वित्तीय प्रोत्साहन, विस्तारित लक्ष्य और प्रौद्योगिकी-विशिष्ट समर्थन शामिल हैं, जो देश के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों में भारत की भूमिका को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह योजना भारत के 2047 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
Syllabus Connection
यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और जलवायु परिवर्तन शमन रणनीतियों से संबंधित है, जो आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करती है। छात्रों को ऊर्जा नीति, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और भारत के जलवायु प्रतिबद्धताओं पर ध्यान देना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है | हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना का दूसरा चरण | भारत के ऊर्जा संक्रमण और शुद्ध-शून्य लक्ष्यों के लिए इसका महत्व |
| कब | 5 जून, 2026 को लॉन्च | भारत की 2030 और 2047 की जलवायु प्रतिबद्धताओं के संदर्भ में इसका समय |
| लक्ष्य | 2030 तक अतिरिक्त 100 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, 5 MT हरित हाइड्रोजन | ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक जलवायु नेतृत्व पर प्रभाव |
| प्रमुख घटक | हरित हाइड्रोजन, अपतटीय पवन, BESS के लिए प्रोत्साहन | इन प्रौद्योगिकियों की रणनीतिक आवश्यकता और भारत के लिए उनका भविष्य |
| वित्तपोषण | 2.5 लाख करोड़ रुपये का बजट | सार्वजनिक-निजी भागीदारी और निवेश आकर्षित करने में इसकी भूमिका |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | High | 8–12 | UPSC tests implementation, target beneficiaries, and outcomes — not just scheme names. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Very High | 5–8 | Government schemes are one of the most tested topics in SSC CGL and CHSL GK sections. |
| Banking (IBPS / SBI) | High | 4–6 | Financial inclusion schemes, Jan Dhan, PMSBY, and credit guarantee schemes are key banking exam topics. |
| State PCS / PSC | Very High | 6–10 | Both central and state schemes are tested extensively in state PCS papers. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 4–7 | Central government welfare schemes are a consistent Railway GK topic. |
Key Facts to Remember: हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना का दूसरा चरण: भारत का 2047 तक शुद्ध-शून्य लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम
- भारत सरकार ने 5 जून, 2026 को 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया।
- इस चरण के लिए कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये (लगभग 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का बजट आवंटित किया गया है।
- योजना का लक्ष्य 2030 तक देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में अतिरिक्त 100 GW का योगदान करना है।
- यह योजना हरित हाइड्रोजन उत्पादन, अपतटीय पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) पर केंद्रित है।
- हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रति किलोग्राम ₹50 तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
- लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है।
- अपतटीय पवन ऊर्जा के लिए गुजरात और तमिलनाडु तटों पर 5 GW की प्रारंभिक क्षमता का लक्ष्य है।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए 50 GWh की क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसके लिए ₹15,000 करोड़ की सब्सिडी है।
- यह योजना भारत के 2047 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- योजना 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देती है और घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देती है।
- यह भारत को वैश्विक हरित ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
Practice Questions
Q1. 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' के दूसरे चरण के लिए कुल कितना बजट आवंटित किया गया है?
- 1.5 लाख करोड़ रुपये
- 2.0 लाख करोड़ रुपये
- 2.5 लाख करोड़ रुपये
- 3.0 लाख करोड़ रुपये
Explanation: 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' के दूसरे चरण के लिए भारत सरकार द्वारा कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह राशि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है।
Q2. इस योजना के तहत 2030 तक प्रति वर्ष कितने मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है?
- 2 मिलियन टन
- 3 मिलियन टन
- 4 मिलियन टन
- 5 मिलियन टन
Explanation: योजना का एक प्रमुख लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है। यह भारत को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Q3. 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' का दूसरा चरण मुख्य रूप से किन क्षेत्रों पर केंद्रित है?
- केवल सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा
- हरित हाइड्रोजन, अपतटीय पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ
- जलविद्युत और बायोमास ऊर्जा
- परमाणु ऊर्जा और भूतापीय ऊर्जा
Explanation: यह योजना मुख्य रूप से हरित हाइड्रोजन उत्पादन, अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं और बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) की स्थापना पर केंद्रित है। ये प्रौद्योगिकियां भारत के ऊर्जा संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Q4. भारत का शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य किस वर्ष तक प्राप्त करने का है?
- 2030
- 2040
- 2047
- 2050
Explanation: भारत ने 2047 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य निर्धारित किया है। 'हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना' का दूसरा चरण इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Q5. अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक 5 GW क्षमता किन भारतीय राज्यों के तटों पर स्थापित करने का लक्ष्य है?
- केरल और कर्नाटक
- महाराष्ट्र और गोवा
- गुजरात और तमिलनाडु
- पश्चिम बंगाल और ओडिशा
Explanation: अपतटीय पवन ऊर्जा के लिए प्रारंभिक 5 GW की क्षमता गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। ये राज्य अपनी लंबी तटरेखा और अनुकूल पवन संसाधनों के कारण अपतटीय पवन ऊर्जा विकास के लिए आदर्श हैं।
How to Prepare Government Schemes for Government Exams — हरित ऊर्जा प्रोत्साहन योजना का दूसरा चरण: भारत का…
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