भारत ने 'ग्लोबल साउथ' के लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष की स्थापना की घोषणा की: विकासशील देशों को मिलेगा समर्थन
भारत ने 3 जून, 2026 को 'ग्लोबल साउथ' के विकासशील देशों के लिए एक महत्वाकांक्षी जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष (Climate Change Adaptation Fund) की स्थापना की घोषणा की है। इस कोष का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का सामना करने के लिए इन देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना है, जिससे उनकी लचीलापन और अनुकूलन क्षमता बढ़ाई जा सके। यह पहल भारत की जलवायु नेतृत्व की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत ने 3 जून, 2026 को 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष की स्थापना की घोषणा की।
- कोष का प्रारंभिक कॉर्पस 1 बिलियन डॉलर है, जिसमें भारत का प्रारंभिक योगदान 200 मिलियन डॉलर होगा।
- यह कोष विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
- कोष का प्रबंधन एक स्वतंत्र बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिसमें 'ग्लोबल साउथ' के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- यह पहल जल सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, तटीय संरक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर केंद्रित होगी।
- यह 'ग्लोबल साउथ' के भीतर दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करेगा और भारत के जलवायु नेतृत्व को दर्शाता है।
- यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की अनुकूलन गैप रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुरूप है।
- पेरिस समझौते (2015) ने वैश्विक अनुकूलन लक्ष्य (Global Goal on Adaptation) स्थापित किया था।
- भारत की यह पहल उसकी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की नीति और G20 अध्यक्षता के दौरान 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
- भारत में राष्ट्रीय अनुकूलन कोष जलवायु परिवर्तन (NAFCC) जैसी योजनाएं भी अनुकूलन को बढ़ावा देती हैं।
Why In News
भारत ने हाल ही में 'ग्लोबल साउथ' के देशों के लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष की स्थापना की घोषणा की है, जो जलवायु न्याय और विकासशील देशों की सहायता के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें विकासशील देशों में अनुकूलन वित्तपोषण के बढ़ते अंतर पर प्रकाश डाला गया था, जिससे भारत की यह पहल और भी सामयिक हो गई है।
Syllabus Connection
यह खबर जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, जलवायु वित्तपोषण, 'ग्लोबल साउथ' की अवधारणा और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के महत्व से संबंधित है, जो पर्यावरण नीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अंतर्गत आता है।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | 'ग्लोबल साउथ' के लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष की स्थापना। | विकासशील देशों में जलवायु अनुकूलन वित्तपोषण के अंतर को पाटने में भूमिका। |
| कब | 3 जून, 2026 को भारत द्वारा घोषणा। | वैश्विक जलवायु वार्ताओं और UNEP रिपोर्टों के संदर्भ में इसका महत्व। |
| कौन | भारत सरकार द्वारा पहल, 'ग्लोबल साउथ' के देश लाभार्थी। | भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व भूमिका और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा। |
| कॉर्पस | प्रारंभिक 1 बिलियन डॉलर, भारत का 200 मिलियन डॉलर योगदान। | वैश्विक अनुकूलन वित्तपोषण आवश्यकताओं के सापेक्ष इसकी पर्याप्तता और उत्प्रेरक क्षमता। |
| उद्देश्य | जलवायु अनुकूलन क्षमता बढ़ाना, जल सुरक्षा, टिकाऊ कृषि। | जलवायु न्याय, समानता और विकासशील देशों की लचीलापन को मजबूत करना। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 12–20 | Environment and Ecology is a separate section in UPSC Prelims. GS-III includes environment, climate change, and disaster management. |
| State PCS / PSC | High | 5–8 | State PCS papers test both central environment policy and state-specific conservation achievements. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | National parks, Ramsar sites, pollution levels, and climate summits appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–3 | Climate finance, green bonds, and ESG ratings are occasionally tested in banking exams. |
Key Facts to Remember: भारत ने 'ग्लोबल साउथ' के लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष की स्थापना की घोषणा की: विकासशील देशों को मिलेगा समर्थन
- भारत ने 3 जून, 2026 को 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष की स्थापना की घोषणा की।
- कोष का प्रारंभिक कॉर्पस 1 बिलियन डॉलर है, जिसमें भारत का प्रारंभिक योगदान 200 मिलियन डॉलर होगा।
- यह कोष विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
- कोष का प्रबंधन एक स्वतंत्र बोर्ड द्वारा किया जाएगा, जिसमें 'ग्लोबल साउथ' के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- यह पहल जल सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, तटीय संरक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर केंद्रित होगी।
- यह 'ग्लोबल साउथ' के भीतर दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करेगा और भारत के जलवायु नेतृत्व को दर्शाता है।
- यह घोषणा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की अनुकूलन गैप रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुरूप है।
- पेरिस समझौते (2015) ने वैश्विक अनुकूलन लक्ष्य (Global Goal on Adaptation) स्थापित किया था।
- भारत की यह पहल उसकी 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की नीति और G20 अध्यक्षता के दौरान 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
- भारत में राष्ट्रीय अनुकूलन कोष जलवायु परिवर्तन (NAFCC) जैसी योजनाएं भी अनुकूलन को बढ़ावा देती हैं।
Practice Questions
Q1. भारत द्वारा 'ग्लोबल साउथ' के लिए घोषित जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष का प्रारंभिक कॉर्पस कितना है?
- 500 मिलियन डॉलर
- 1 बिलियन डॉलर
- 2 बिलियन डॉलर
- 5 बिलियन डॉलर
Explanation: भारत द्वारा 'ग्लोबल साउथ' के लिए घोषित जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कोष का प्रारंभिक कॉर्पस 1 बिलियन डॉलर निर्धारित किया गया है। इसमें भारत सरकार का प्रारंभिक योगदान 200 मिलियन डॉलर होगा, जबकि शेष राशि अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों से जुटाई जाएगी। यह कोष विकासशील देशों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा सिद्धांत UNFCCC के तहत विकसित और विकासशील देशों के बीच अलग-अलग जिम्मेदारियों को पहचानता है?
- समानता का सिद्धांत
- सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमताएं (CBDR-RC)
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत
- सतत विकास सिद्धांत
Explanation: सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमताएं (Common But Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities - CBDR-RC) का सिद्धांत UNFCCC का एक प्रमुख सिद्धांत है। यह मानता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है, लेकिन विकसित देशों की ऐतिहासिक उत्सर्जन के कारण अधिक जिम्मेदारी है और उनके पास अधिक क्षमताएं भी हैं।
Q3. UNEP की 'अनुकूलन गैप रिपोर्ट' किस मुद्दे पर प्रकाश डालती है?
- शमन परियोजनाओं में निवेश की कमी
- विकासशील देशों में अनुकूलन वित्तपोषण का अंतर
- नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की धीमी प्रगति
- जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक अनुसंधान की कमी
Explanation: UNEP की 'अनुकूलन गैप रिपोर्ट' लगातार इस बात पर प्रकाश डालती है कि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूल होने के लिए आवश्यक वित्तपोषण और वास्तविक प्राप्त वित्तपोषण के बीच एक बड़ा अंतर है। यह रिपोर्ट अनुकूलन वित्तपोषण की वैश्विक आवश्यकताओं और उपलब्धता के बीच की खाई को दर्शाती है।
Q4. भारत द्वारा घोषित नए अनुकूलन कोष का प्राथमिक ध्यान किन क्षेत्रों पर होगा?
- अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास
- सैन्य आधुनिकीकरण और रक्षा
- जल सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और तटीय संरक्षण
- डिजिटल बुनियादी ढाँचा और शहरीकरण
Explanation: भारत द्वारा घोषित नए अनुकूलन कोष का प्राथमिक ध्यान जल सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, तटीय संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बढ़ावा देने पर होगा। ये ऐसे क्षेत्र हैं जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं और जहां अनुकूलन की तत्काल आवश्यकता है।
Q5. भारत में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए 2015 में स्थापित विशेष कोष का नाम क्या है?
- राष्ट्रीय हरित कोष
- राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष
- राष्ट्रीय अनुकूलन कोष जलवायु परिवर्तन (NAFCC)
- प्रधानमंत्री जलवायु सुरक्षा कोष
Explanation: भारत में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए 2015 में राष्ट्रीय अनुकूलन कोष जलवायु परिवर्तन (National Adaptation Fund for Climate Change - NAFCC) की स्थापना की गई थी। यह कोष राज्यों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में अनुकूलन परियोजनाओं को लागू करने में सहायता करता है।
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