भारत ने 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' के तहत 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' पहल को बढ़ावा दिया
भारत ने 26 मई, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के एक कार्यक्रम में 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) पहल को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के निर्बाध हस्तांतरण के लिए एक ट्रांस-नेशनल बिजली ग्रिड स्थापित करना है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। यह पहल वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाती है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत ने 26 मई, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के कार्यक्रम में 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) पहल को बढ़ावा दिया।
- OSOWOG का विचार पहली बार 2018 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
- इस पहल का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के निर्बाध हस्तांतरण के लिए एक ट्रांस-नेशनल बिजली ग्रिड स्थापित करना है।
- यह अवधारणा 'सूर्य कभी अस्त नहीं होता' सिद्धांत पर आधारित है, जिससे विभिन्न समय क्षेत्रों में ऊर्जा साझा की जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) को 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा COP21, पेरिस में लॉन्च किया गया था।
- OSOWOG पहल को तीन चरणों में लागू करने की योजना है, जिसमें पहले चरण में मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया शामिल हैं।
- यह पहल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करेगी।
- तकनीकी रूप से, इसमें उच्च वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) ट्रांसमिशन लाइनों का उपयोग शामिल होगा।
- भारत इस पहल के लिए तकनीकी सहायता, अनुसंधान और विकास, और क्षमता निर्माण में योगदान देने को प्रतिबद्ध है।
- यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 7 (किफायती और स्वच्छ ऊर्जा) के अनुरूप है।
- यह वैश्विक ऊर्जा कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने का एक माध्यम भी है।
Why In News
भारत ने 26 मई, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के एक उच्च-स्तरीय कार्यक्रम में 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) पहल को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह पहल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग और विभिन्न समय क्षेत्रों में इसके निर्बाध हस्तांतरण को सक्षम बनाएगी। यह वैश्विक ऊर्जा सहयोग में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत की वैश्विक ऊर्जा कूटनीति, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) जैसे बहुपक्षीय मंचों में उसकी भूमिका और 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' जैसी पहलों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन तथा ऊर्जा सुरक्षा के लिए उसके योगदान को दर्शाता है। छात्रों को भारत की विदेश नीति के ऊर्जा और पर्यावरण आयामों पर ध्यान देना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | भारत ने ISA के तहत OSOWOG पहल को बढ़ावा दिया। | वैश्विक सौर ऊर्जा ग्रिड की अवधारणा, इसके उद्देश्य और वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में इसका महत्व। |
| कब | 26 मई, 2026 को ISA कार्यक्रम में। | पहल की उत्पत्ति (2018) और वर्तमान में इसके कार्यान्वयन की स्थिति। |
| कौन | भारत (PM मोदी द्वारा प्रस्तावित), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)। | ISA की भूमिका, भारत का नेतृत्व और अन्य सदस्य देशों की भागीदारी। |
| उद्देश्य | वैश्विक सौर ग्रिड, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन शमन। | सौर ऊर्जा के भंडारण और वितरण की चुनौतियों का समाधान, ऊर्जा पहुंच और आर्थिक लाभ। |
| चुनौतियाँ | निवेश, नियामक सामंजस्य, भू-राजनीतिक सहमति। | तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय मॉडल और विभिन्न देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 10–20 | International relations is a core GS-II topic for UPSC. Bilateral agreements, multilateral bodies, and geopolitics are essential. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | International summits, treaties, and India's bilateral relations appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | G20, IMF/World Bank decisions, and global trade events are tested in banking exams. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | State PCS papers test India's role in international forums and bilateral trade ties. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Medium | 2–4 | Summits, UN resolutions, and India's foreign policy are included in Railway GK. |
Key Facts to Remember: भारत ने 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' के तहत 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' पहल को बढ़ावा दिया
- भारत ने 26 मई, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के कार्यक्रम में 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) पहल को बढ़ावा दिया।
- OSOWOG का विचार पहली बार 2018 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
- इस पहल का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के निर्बाध हस्तांतरण के लिए एक ट्रांस-नेशनल बिजली ग्रिड स्थापित करना है।
- यह अवधारणा 'सूर्य कभी अस्त नहीं होता' सिद्धांत पर आधारित है, जिससे विभिन्न समय क्षेत्रों में ऊर्जा साझा की जा सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) को 2015 में भारत और फ्रांस द्वारा COP21, पेरिस में लॉन्च किया गया था।
- OSOWOG पहल को तीन चरणों में लागू करने की योजना है, जिसमें पहले चरण में मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया शामिल हैं।
- यह पहल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करेगी।
- तकनीकी रूप से, इसमें उच्च वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) ट्रांसमिशन लाइनों का उपयोग शामिल होगा।
- भारत इस पहल के लिए तकनीकी सहायता, अनुसंधान और विकास, और क्षमता निर्माण में योगदान देने को प्रतिबद्ध है।
- यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 7 (किफायती और स्वच्छ ऊर्जा) के अनुरूप है।
- यह वैश्विक ऊर्जा कूटनीति और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने का एक माध्यम भी है।
Practice Questions
Q1. 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) पहल का विचार पहली बार किस वर्ष प्रस्तुत किया गया था?
- 2015
- 2016
- 2018
- 2020
Explanation: 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' (OSOWOG) पहल का विचार पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवंबर 2018 में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की पहली महासभा के दौरान प्रस्तुत किया गया था। यह वैश्विक सौर ऊर्जा सहयोग के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना है।
Q2. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का गठन किन दो देशों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था?
- भारत और जर्मनी
- भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका
- भारत और फ्रांस
- भारत और यूनाइटेड किंगडम
Explanation: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का गठन 2015 में पेरिस में COP21 के दौरान भारत और फ्रांस द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसका उद्देश्य सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और इसके लिए वित्तीय तथा तकनीकी बाधाओं को दूर करना है।
Q3. OSOWOG पहल का मुख्य सिद्धांत क्या है?
- केवल स्थानीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करें।
- सूर्य कभी अस्त नहीं होता, इसलिए सौर ऊर्जा को वैश्विक स्तर पर साझा किया जा सकता है।
- प्रत्येक देश को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर होना चाहिए।
- जीवाश्म ईंधन का उपयोग बढ़ाना चाहिए।
Explanation: OSOWOG पहल का मुख्य सिद्धांत 'सूर्य कभी अस्त नहीं होता' है, जिसका अर्थ है कि दुनिया के किसी न किसी हिस्से में हमेशा सूर्य चमकता रहता है। इस सिद्धांत के आधार पर, पहल का उद्देश्य विभिन्न देशों को एक साझा ग्रिड के माध्यम से जोड़कर सौर ऊर्जा को वैश्विक स्तर पर साझा करना है।
Q4. OSOWOG पहल के कार्यान्वयन के पहले चरण में कौन से क्षेत्र शामिल होंगे?
- उत्तरी अमेरिका और यूरोप
- मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया
- अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका
- ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत द्वीप समूह
Explanation: OSOWOG पहल को तीन चरणों में लागू करने की योजना है। पहले चरण में मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों को एक साथ जोड़ा जाएगा। यह क्षेत्रीय ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए एक प्रारंभिक कदम है।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (SDG) OSOWOG पहल के उद्देश्यों के साथ सबसे निकटता से संबंधित है?
- SDG 1: गरीबी नहीं
- SDG 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- SDG 7: सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा
- SDG 16: शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं
Explanation: OSOWOG पहल का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है, जिससे सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक सभी की पहुंच सुनिश्चित हो सके। यह सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 7 (SDG 7) 'किफायती और स्वच्छ ऊर्जा' के उद्देश्यों के साथ संरेखित है।
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