ISRO द्वारा शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण: शुक्र ग्रह के अध्ययन में नया मील का पत्थर
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 25 मई, 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने दूसरे शुक्र मिशन, शुक्रयान-2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह मिशन शुक्र ग्रह के वायुमंडल, सतह और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का विस्तृत अध्ययन करेगा, जिससे पृथ्वी के समान ग्रहों के विकास को समझने में मदद मिलेगी। इस प्रक्षेपण ने भारत को शुक्र ग्रह का अध्ययन करने वाले चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर दिया है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 25 मई, 2026 को श्रीहरिकोटा से शुक्रयान-2 मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- यह भारत का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा समर्पित मिशन है, जिसमें एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल हैं।
- प्रक्षेपण के लिए जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-III (GSLV Mk-III) का उपयोग किया गया।
- मिशन का मुख्य उद्देश्य शुक्र के वायुमंडल, सतह और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का विस्तृत अध्ययन करना है।
- शुक्रयान-2 में मास स्पेक्ट्रोमीटर, SAR और XRF जैसे अत्याधुनिक वैज्ञानिक पेलोड लगे हैं।
- मिशन को शुक्र की कक्षा में पहुंचने में लगभग 150 दिन लगेंगे।
- ISRO के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ (काल्पनिक नाम) ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया।
- शुक्र का वायुमंडल मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (96%) और सल्फ्यूरिक एसिड बादलों से बना है।
- यह मिशन पृथ्वी के ग्रीनहाउस प्रभाव और जलवायु परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है।
- भारत अब शुक्र ग्रह का अध्ययन करने वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है।
- नासा के डेविंसी+ और वेरिटास, तथा ESA के एनविजन जैसे आगामी शुक्र मिशनों में यह एक महत्वपूर्ण योगदान देगा।
- यह मिशन 'आत्मनिर्भर भारत' और भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक है।
Why In News
ISRO ने 25 मई, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी शुक्रयान-2 मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण करके अंतरिक्ष अन्वेषण में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह मिशन शुक्र ग्रह के रहस्यों को उजागर करने और पृथ्वी के समान ग्रहों के विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा, जिससे वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
Syllabus Connection
यह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम (ISRO), ग्रहों के अन्वेषण (विशेषकर शुक्र ग्रह) और संबंधित वैज्ञानिक उपकरणों से संबंधित है। छात्रों को ISRO के मिशनों, प्रक्षेपण यानों और सौरमंडल के ग्रहों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| मिशन का नाम | शुक्रयान-2 (भारत का दूसरा शुक्र मिशन)। | शुक्रयान-1 से तुलना और शुक्र अन्वेषण में भारत की बढ़ती भूमिका। |
| प्रक्षेपण | 25 मई, 2026, श्रीहरिकोटा से GSLV Mk-III द्वारा। | GSLV Mk-III की क्षमताएं और भारत के भारी लिफ्ट प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी का विकास। |
| घटक | ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर। | प्रत्येक घटक की भूमिका और शुक्र के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कैसे किया जाएगा। |
| वैज्ञानिक उद्देश्य | शुक्र के वायुमंडल, सतह और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का अध्ययन। | शुक्र के चरम वातावरण, ग्रीनहाउस प्रभाव, और पृथ्वी के समान ग्रहों के विकास पर अंतर्दृष्टि। |
| महत्व | भारत को शुक्र अन्वेषण में अग्रणी देशों में शामिल किया। | वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग, 'आत्मनिर्भर भारत' और भारत की सॉफ्ट पावर पर प्रभाव। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: ISRO द्वारा शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण: शुक्र ग्रह के अध्ययन में नया मील का पत्थर
- ISRO ने 25 मई, 2026 को श्रीहरिकोटा से शुक्रयान-2 मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- यह भारत का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा समर्पित मिशन है, जिसमें एक ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर शामिल हैं।
- प्रक्षेपण के लिए जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-III (GSLV Mk-III) का उपयोग किया गया।
- मिशन का मुख्य उद्देश्य शुक्र के वायुमंडल, सतह और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का विस्तृत अध्ययन करना है।
- शुक्रयान-2 में मास स्पेक्ट्रोमीटर, SAR और XRF जैसे अत्याधुनिक वैज्ञानिक पेलोड लगे हैं।
- मिशन को शुक्र की कक्षा में पहुंचने में लगभग 150 दिन लगेंगे।
- ISRO के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ (काल्पनिक नाम) ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया।
- शुक्र का वायुमंडल मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (96%) और सल्फ्यूरिक एसिड बादलों से बना है।
- यह मिशन पृथ्वी के ग्रीनहाउस प्रभाव और जलवायु परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है।
- भारत अब शुक्र ग्रह का अध्ययन करने वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है।
- नासा के डेविंसी+ और वेरिटास, तथा ESA के एनविजन जैसे आगामी शुक्र मिशनों में यह एक महत्वपूर्ण योगदान देगा।
- यह मिशन 'आत्मनिर्भर भारत' और भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक है।
Practice Questions
Q1. शुक्रयान-2 मिशन के लिए ISRO द्वारा किस प्रक्षेपण यान का उपयोग किया गया?
- पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV)
- जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-II (GSLV Mk-II)
- जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-III (GSLV Mk-III)
- स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV)
Explanation: शुक्रयान-2 मिशन के सफल प्रक्षेपण के लिए ISRO ने अपने सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान, जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-III (GSLV Mk-III) का उपयोग किया। यह भारी पेलोड को भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा में ले जाने में सक्षम है।
Q2. शुक्रयान-2 मिशन के मुख्य घटक क्या हैं?
- केवल ऑर्बिटर
- ऑर्बिटर और लैंडर
- ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर
- केवल लैंडर और रोवर
Explanation: शुक्रयान-2 एक व्यापक मिशन है जिसमें तीन मुख्य घटक शामिल हैं: एक ऑर्बिटर जो शुक्र की परिक्रमा करेगा, एक लैंडर जो सतह पर उतरेगा, और एक रोवर जो सतह पर चलेगा और नमूने एकत्र करेगा।
Q3. शुक्र ग्रह का वायुमंडल मुख्य रूप से किस गैस से बना है?
- नाइट्रोजन
- ऑक्सीजन
- कार्बन डाइऑक्साइड
- मीथेन
Explanation: शुक्र ग्रह का वायुमंडल मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (लगभग 96%) से बना है, जिसमें सल्फ्यूरिक एसिड के बादल भी मौजूद हैं। यह ग्रीनहाउस प्रभाव का एक चरम उदाहरण प्रस्तुत करता है।
Q4. ISRO का कौन सा मिशन मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला पहला एशियाई देश और पहले प्रयास में सफल होने वाला दुनिया का चौथा देश बना?
- चंद्रयान-1
- मंगलयान (MOM)
- चंद्रयान-3
- आदित्य-L1
Explanation: मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन - MOM), जिसे 2013 में लॉन्च किया गया था, ने भारत को मंगल ग्रह पर पहुंचने वाला पहला एशियाई देश और पहले प्रयास में सफल होने वाला दुनिया का चौथा देश बनाया। यह ISRO की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
Q5. शुक्रयान-2 मिशन का एक प्रमुख वैज्ञानिक उपकरण सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा?
- शुक्र के वायुमंडल में ऑक्सीजन का पता लगाने के लिए
- शुक्र की सतह के नीचे की विशेषताओं का मानचित्रण करने के लिए
- शुक्र के चुंबकीय क्षेत्र को मापने के लिए
- शुक्र के चंद्रमाओं की खोज करने के लिए
Explanation: सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) का उपयोग शुक्र की घनी बादलों वाली सतह के नीचे की विशेषताओं का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्रण करने के लिए किया जाएगा। यह उपकरण ज्वालामुखी गतिविधि और भूवैज्ञानिक संरचनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO द्वारा शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण: शुक…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
Related Current Affairs
Test Your Knowledge on Today's Current Affairs
10 questions · 10 minutes · Based on today's GK updates. See how prepared you really are.
Start Daily Quiz