भारत सरकार ने 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' का अनावरण किया
भारत सरकार ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' का अनावरण किया, जिसका उद्देश्य संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना, अपशिष्ट को कम करना और टिकाऊ उत्पादन व खपत पैटर्न को प्रोत्साहित करना है। यह नीति विभिन्न क्षेत्रों में चक्रीयता के सिद्धांतों को एकीकृत करने के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करती है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, वाहन, प्लास्टिक और निर्माण व विध्वंस अपशिष्ट शामिल हैं। इसका लक्ष्य 2030 तक भारत को एक प्रमुख चक्रीय अर्थव्यवस्था केंद्र बनाना है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारत सरकार ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' का अनावरण किया।
- नीति का लक्ष्य संसाधनों के कुशल उपयोग, अपशिष्ट न्यूनीकरण और टिकाऊ उत्पादन व खपत को बढ़ावा देना है।
- यह नीति इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, वाहन, प्लास्टिक, निर्माण व विध्वंस अपशिष्ट और कृषि-अपशिष्ट जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है।
- नीति में 2030 तक 70% ई-अपशिष्ट संग्रह और पुनर्चक्रण तथा 2028 तक 90% प्लास्टिक पैकेजिंग पुनर्चक्रण का लक्ष्य है।
- 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)' और 'डिजाइन फॉर सर्कुलरिटी' नीति के केंद्रीय सिद्धांत हैं।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था परियोजनाओं के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रारंभिक कोष स्थापित किया गया है, जिसका प्रबंधन IDBI करेगा।
- एक 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था मिशन' की स्थापना की जाएगी जो नीति के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा और अंतर-मंत्रालयी समन्वय सुनिश्चित करेगा।
- यह नीति 2030 तक 5 मिलियन से अधिक हरित रोजगार सृजित करने और भारत की संसाधन सुरक्षा बढ़ाने का अनुमान है।
- यह नीति संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेषकर SDG 12 और SDG 13 के अनुरूप है।
Why In News
भारत सरकार ने आज 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' का आधिकारिक तौर पर अनावरण किया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब देश तेजी से बढ़ते अपशिष्ट उत्पादन और संसाधन क्षरण की चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसके लिए एक स्थायी समाधान की तत्काल आवश्यकता है। इस नीति का शुभारंभ भारत के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Syllabus Connection
यह नीति सतत विकास, संसाधन दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों से संबंधित है। छात्रों को चक्रीय अर्थव्यवस्था की अवधारणा, इसके लाभ और भारत के सतत विकास लक्ष्यों के साथ इसके संबंध को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| नीति का नाम | राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026 | भारत के सतत विकास और संसाधन सुरक्षा में इसका महत्व। |
| अनावरण तिथि | 20 मई, 2026 | पर्यावरण नीतियों के विकास में इसकी समय-सीमा और तात्कालिकता। |
| प्रमुख क्षेत्र | इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, प्लास्टिक, C&D अपशिष्ट, कृषि-अपशिष्ट | इन क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ और चक्रीयता के अवसर। |
| मुख्य सिद्धांत | EPR, डिजाइन फॉर सर्कुलरिटी | ये सिद्धांत कैसे अपशिष्ट को कम करते हैं और संसाधनों के जीवनचक्र को बढ़ाते हैं। |
| आर्थिक प्रभाव | ₹10,000 करोड़ का कोष, 5 मिलियन हरित रोजगार | चक्रीय अर्थव्यवस्था से नए उद्योग, नवाचार और रोजगार सृजन की क्षमता। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 12–20 | Environment and Ecology is a separate section in UPSC Prelims. GS-III includes environment, climate change, and disaster management. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | National parks, Ramsar sites, pollution levels, and climate summits appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–3 | Climate finance, green bonds, and ESG ratings are occasionally tested in banking exams. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–6 | Environment is a reliable Railway GK category — national parks, endangered species, pollution. |
| State PCS / PSC | High | 5–8 | State PCS papers test both central environment policy and state-specific conservation achievements. |
Key Facts to Remember: भारत सरकार ने 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' का अनावरण किया
- भारत सरकार ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' का अनावरण किया।
- नीति का लक्ष्य संसाधनों के कुशल उपयोग, अपशिष्ट न्यूनीकरण और टिकाऊ उत्पादन व खपत को बढ़ावा देना है।
- यह नीति इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, वाहन, प्लास्टिक, निर्माण व विध्वंस अपशिष्ट और कृषि-अपशिष्ट जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है।
- नीति में 2030 तक 70% ई-अपशिष्ट संग्रह और पुनर्चक्रण तथा 2028 तक 90% प्लास्टिक पैकेजिंग पुनर्चक्रण का लक्ष्य है।
- 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)' और 'डिजाइन फॉर सर्कुलरिटी' नीति के केंद्रीय सिद्धांत हैं।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था परियोजनाओं के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रारंभिक कोष स्थापित किया गया है, जिसका प्रबंधन IDBI करेगा।
- एक 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था मिशन' की स्थापना की जाएगी जो नीति के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा और अंतर-मंत्रालयी समन्वय सुनिश्चित करेगा।
- यह नीति 2030 तक 5 मिलियन से अधिक हरित रोजगार सृजित करने और भारत की संसाधन सुरक्षा बढ़ाने का अनुमान है।
- यह नीति संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेषकर SDG 12 और SDG 13 के अनुरूप है।
Practice Questions
Q1. 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' के तहत, 2030 तक कितने प्रतिशत ई-अपशिष्ट के संग्रह और पुनर्चक्रण का लक्ष्य रखा गया है?
- 50%
- 60%
- 70%
- 80%
Explanation: राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026 का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी क्षेत्र में 2030 तक 70% ई-अपशिष्ट का संग्रह और पुनर्चक्रण सुनिश्चित करना है। यह नीति भारत में ई-अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Q2. चक्रीय अर्थव्यवस्था परियोजनाओं के लिए घोषित ₹10,000 करोड़ के प्रारंभिक कोष का प्रबंधन किस संस्था द्वारा किया जाएगा?
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
- भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)
- भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI)
- राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)
Explanation: नीति के तहत, चक्रीय अर्थव्यवस्था परियोजनाओं के लिए ₹10,000 करोड़ के प्रारंभिक कोष की घोषणा की गई है, जिसका प्रबंधन भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) द्वारा किया जाएगा। यह कोष अनुसंधान और विकास, पायलट परियोजनाओं और नई प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण के लिए उपयोग किया जाएगा।
Q3. 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' के प्रमुख सिद्धांतों में से एक 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)' का क्या अर्थ है?
- उत्पादकों को केवल उत्पादों के निर्माण के लिए जिम्मेदार ठहराना।
- उत्पादकों को उनके उत्पादों के पूरे जीवनचक्र, विशेषकर उनके निपटान और पुनर्चक्रण के लिए जिम्मेदार ठहराना।
- सरकार को उत्पादों के निपटान और पुनर्चक्रण के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना।
- उपभोक्ताओं को उत्पादों के पुनर्चक्रण के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना।
Explanation: 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)' एक नीतिगत दृष्टिकोण है जिसमें उत्पादकों को उनके उत्पादों के पूरे जीवनचक्र, विशेषकर उनके निपटान और पुनर्चक्रण के लिए वित्तीय और/या भौतिक जिम्मेदारी दी जाती है। यह चक्रीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है जो अपशिष्ट को कम करने और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देता है।
Q4. निम्नलिखित में से कौन सा मंत्रालय 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' के लिए नोडल मंत्रालय है?
- वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- नीति आयोग
Explanation: 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करेगा। हालांकि, इसके कार्यान्वयन में कई अन्य मंत्रालय भी शामिल होंगे, जिससे एक समन्वित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके।
Q5. नीति आयोग ने चक्रीय अर्थव्यवस्था पर अपना रणनीति पत्र किस वर्ष जारी किया था, जिसने 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' की नींव रखी?
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
Explanation: नीति आयोग ने 2021 में 'चक्रीय अर्थव्यवस्था पर रणनीति पत्र' जारी किया था। इस पत्र ने भारत में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप और सिफारिशें प्रदान कीं, जो बाद में 'राष्ट्रीय चक्रीय अर्थव्यवस्था नीति 2026' के विकास का आधार बनीं।
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Climate news = policy news. Always note the government response to any environmental event — that's what UPSC Mains tests.
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