भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत-II का जलावतरण: आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मील का पत्थर
भारतीय नौसेना ने 3 जून, 2026 को अपने दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत (IAC-2) INS विक्रांत-II का जलावतरण किया। यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस विशाल युद्धपोत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में किया गया है और यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति को और मजबूत करेगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय नौसेना ने 3 जून, 2026 को अपने दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत (IAC-2) INS विक्रांत-II का जलावतरण किया।
- INS विक्रांत-II का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में किया गया है।
- यह भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहलों के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- पोत का विस्थापन लगभग 65,000 टन है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा युद्धपोत बनाता है।
- इसमें 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
- INS विक्रांत-II भारतीय नौसेना की 'ब्लू-वॉटर नेवी' क्षमता को बढ़ाएगा।
- इसके एयर विंग में राफेल-एम, तेजस नौसेना संस्करण, मिग-29K और MH-60R हेलीकॉप्टर जैसे विमान शामिल होंगे।
- यह पोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति और रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगा।
- भारत अब विमानवाहक पोत डिजाइन और निर्माण करने वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल है।
- यह 2029 तक पूरी तरह से चालू होने और नौसेना में कमीशन होने की उम्मीद है।
Why In News
भारतीय नौसेना ने 3 जून, 2026 को अपने दूसरे पूर्णतः स्वदेशी विमानवाहक पोत, INS विक्रांत-II, का जलावतरण किया है। यह घटना भारत की रक्षा क्षमताओं और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशीकरण के प्रयासों में एक बड़ी छलांग का प्रतिनिधित्व करती है, जिससे यह तत्काल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रक्षा समाचारों में एक प्रमुख शीर्षक बन गया है।
Syllabus Connection
यह खबर भारत की रक्षा क्षमताओं, स्वदेशीकरण, समुद्री सुरक्षा, भू-राजनीतिक रणनीति और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा उत्पादन के महत्व से संबंधित है। छात्रों को भारत की नौसेना शक्ति और रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास का अध्ययन करना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | दूसरा स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत-II का जलावतरण। | विमानवाहक पोतों का रणनीतिक महत्व, 'ब्लू-वॉटर नेवी' अवधारणा और भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति। |
| कब | 3 जून, 2026 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में। | भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण की समयरेखा और भविष्य की योजनाएं। |
| कौन | भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड। | रक्षा मंत्रालय, DRDO और निजी क्षेत्र की भूमिका, आत्मनिर्भरता में योगदान। |
| क्यों | रक्षा आत्मनिर्भरता, समुद्री शक्ति प्रक्षेपण। | हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक गतिशीलता और चीन की बढ़ती समुद्री उपस्थिति का मुकाबला। |
| क्षमता | 65,000 टन, राफेल-एम, तेजस नौसेना संस्करण। | CATOBAR बनाम STOBAR प्रणाली, एयर विंग की क्षमताएं और भविष्य की प्रौद्योगिकियां। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 4–8 | UPSC focuses on strategic aspects: defence policy, Indo-Pacific, border issues, and bilateral defence deals. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | Defence acquisitions, military exercises, and appointments appear in SSC GK. |
| State PCS / PSC | Medium | 2–4 | State PCS papers test major acquisitions and military exercises involving India. |
Key Facts to Remember: भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत-II का जलावतरण: आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मील का पत्थर
- भारतीय नौसेना ने 3 जून, 2026 को अपने दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत (IAC-2) INS विक्रांत-II का जलावतरण किया।
- INS विक्रांत-II का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में किया गया है।
- यह भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' रक्षा पहलों के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
- पोत का विस्थापन लगभग 65,000 टन है, जो इसे भारत का सबसे बड़ा युद्धपोत बनाता है।
- इसमें 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
- INS विक्रांत-II भारतीय नौसेना की 'ब्लू-वॉटर नेवी' क्षमता को बढ़ाएगा।
- इसके एयर विंग में राफेल-एम, तेजस नौसेना संस्करण, मिग-29K और MH-60R हेलीकॉप्टर जैसे विमान शामिल होंगे।
- यह पोत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति और रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगा।
- भारत अब विमानवाहक पोत डिजाइन और निर्माण करने वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल है।
- यह 2029 तक पूरी तरह से चालू होने और नौसेना में कमीशन होने की उम्मीद है।
Practice Questions
Q1. भारतीय नौसेना के दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत (IAC-2) का क्या नाम है, जिसका 3 जून, 2026 को जलावतरण किया गया?
- INS विशाल
- INS विक्रमादित्य
- INS विक्रांत-II
- INS अर्जुन
Explanation: भारतीय नौसेना के दूसरे स्वदेशी विमानवाहक पोत (IAC-2) का नाम INS विक्रांत-II है। यह INS विक्रांत (IAC-1) की सफलता के बाद भारत का दूसरा पूर्णतः स्वदेशी विमानवाहक पोत है।
Q2. INS विक्रांत-II का निर्माण किस शिपयार्ड में किया गया है?
- मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL)
- गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE)
- हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL)
- कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL)
Explanation: INS विक्रांत-II का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में किया गया है, जिसने पहले INS विक्रांत (IAC-1) का भी निर्माण किया था। CSL भारत का प्रमुख शिपयार्ड है जो बड़े और जटिल युद्धपोतों के निर्माण में सक्षम है।
Q3. INS विक्रांत-II का अनुमानित विस्थापन कितना है?
- 25,000 टन
- 45,000 टन
- 65,000 टन
- 80,000 टन
Explanation: INS विक्रांत-II का अनुमानित विस्थापन लगभग 65,000 टन है, जो इसे भारत के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक बनाता है। यह इसके पूर्ववर्ती INS विक्रांत (लगभग 45,000 टन) से काफी बड़ा है।
Q4. INS विक्रांत-II का जलावतरण भारत सरकार की किस प्रमुख पहल का प्रतीक है?
- डिजिटल इंडिया
- स्वच्छ भारत अभियान
- आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया
- नमामि गंगे
Explanation: INS विक्रांत-II का जलावतरण भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' पहलों का एक प्रमुख प्रतीक है। यह भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी निर्भरता को कम करने के प्रयासों को दर्शाता है।
Q5. विमानवाहक पोत के संदर्भ में, 'ब्लू-वॉटर नेवी' शब्द का क्या अर्थ है?
- एक नौसेना जो केवल तटीय क्षेत्रों में संचालित होती है।
- एक नौसेना जो गहरे समुद्र में, अपने तटों से दूर भी संचालन करने में सक्षम हो।
- एक नौसेना जो केवल पनडुब्बियों का उपयोग करती है।
- एक नौसेना जो केवल मित्र देशों के साथ काम करती है।
Explanation: 'ब्लू-वॉटर नेवी' एक ऐसी नौसेना को संदर्भित करती है जो अपने तटों से दूर, गहरे समुद्र में विस्तारित और निरंतर संचालन करने में सक्षम हो। विमानवाहक पोत ऐसी क्षमता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई शक्ति का प्रक्षेपण कर सकते हैं।
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Chiefs of defence services change periodically. Always keep the current CDS, Army Chief, Navy Chief, and Air Chief up to date.
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