ISRO का नया पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS-08): आपदा प्रबंधन और संसाधन मानचित्रण में क्रांतिकारी कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 1 जून, 2026 को श्रीहरिकोटा से अपने नवीनतम पृथ्वी अवलोकन उपग्रह, EOS-08, का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह उपग्रह उन्नत सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और मल्टी-स्पेक्ट्रल इमेजिंग क्षमताओं से लैस है, जो सटीक मौसम पूर्वानुमान, आपदा निगरानी, कृषि मूल्यांकन और शहरी नियोजन के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा। यह भारत की अंतरिक्ष-आधारित सेवाओं को और मजबूत करेगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 1 जून, 2026 को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-08 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से PSLV-C60 रॉकेट द्वारा किया गया।
- EOS-08 को 550 किमी की सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO) में स्थापित किया गया।
- उपग्रह उन्नत सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पेलोड से लैस है, जो सभी मौसम में छवियां ले सकता है।
- इसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन मल्टी-स्पेक्ट्रल कैमरे भी शामिल हैं।
- EOS-08 का प्राथमिक उद्देश्य आपदा प्रबंधन, कृषि मूल्यांकन और संसाधन मानचित्रण है।
- यह बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में सहायक होगा।
- ISRO की स्थापना 15 अगस्त, 1969 को हुई थी।
- भारत का पहला उपग्रह, आर्यभट्ट, 1975 में प्रक्षेपित किया गया था।
Why In News
ISRO ने 1 जून, 2026 को EOS-08 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया, जो भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का प्रतीक है। यह उपग्रह विशेष रूप से आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वास्तविक समय डेटा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तत्काल ध्यान का केंद्र बन गया है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, विशेष रूप से पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों की क्षमताओं और उनके अनुप्रयोगों से संबंधित है। छात्रों को ISRO के मिशनों, विभिन्न प्रकार के उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | ISRO ने EOS-08 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण किया। | पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों का आपदा प्रबंधन, कृषि और शहरी नियोजन में महत्व। |
| कब | 1 जून, 2026 को। | भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की ऐतिहासिक प्रगति और भविष्य की दिशा। |
| प्रक्षेपण यान | PSLV-C60। | PSLV और GSLV जैसे प्रक्षेपण यानों की क्षमता और रणनीतिक महत्व। |
| मुख्य पेलोड | उन्नत सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) और मल्टी-स्पेक्ट्रल इमेजिंग। | SAR तकनीक की विशिष्टताएँ और अन्य रिमोट सेंसिंग तकनीकों से तुलना। |
| अनुप्रयोग | आपदा निगरानी, कृषि, जल संसाधन, शहरी नियोजन। | अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में योगदान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: ISRO का नया पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS-08): आपदा प्रबंधन और संसाधन मानचित्रण में क्रांतिकारी कदम
- ISRO ने 1 जून, 2026 को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-08 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से PSLV-C60 रॉकेट द्वारा किया गया।
- EOS-08 को 550 किमी की सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO) में स्थापित किया गया।
- उपग्रह उन्नत सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पेलोड से लैस है, जो सभी मौसम में छवियां ले सकता है।
- इसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन मल्टी-स्पेक्ट्रल कैमरे भी शामिल हैं।
- EOS-08 का प्राथमिक उद्देश्य आपदा प्रबंधन, कृषि मूल्यांकन और संसाधन मानचित्रण है।
- यह बाढ़, सूखा और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी में सहायक होगा।
- ISRO की स्थापना 15 अगस्त, 1969 को हुई थी।
- भारत का पहला उपग्रह, आर्यभट्ट, 1975 में प्रक्षेपित किया गया था।
Practice Questions
Q1. EOS-08 उपग्रह का प्रक्षेपण किस प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) का उपयोग करके किया गया?
- GSLV Mk-III
- PSLV-C60
- SSLV
- रोहिणी
Explanation: EOS-08 उपग्रह का सफल प्रक्षेपण PSLV-C60 रॉकेट का उपयोग करके किया गया। PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) ISRO का एक विश्वसनीय और बहुमुखी प्रक्षेपण यान है, जिसे 'भारत का वर्कहॉर्स' भी कहा जाता है।
Q2. EOS-08 को किस प्रकार की कक्षा में स्थापित किया गया है?
- भू-स्थिर कक्षा (Geostationary Orbit)
- निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit)
- सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (Sun-Synchronous Polar Orbit)
- मध्यम पृथ्वी कक्षा (Medium Earth Orbit)
Explanation: EOS-08 को 550 किमी की सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO) में स्थापित किया गया है। सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा उपग्रहों को पृथ्वी की सतह के एक ही क्षेत्र पर दिन के एक ही समय में गुजरने की अनुमति देती है, जो पृथ्वी अवलोकन के लिए आदर्श है।
Q3. EOS-08 में कौन सा उन्नत पेलोड शामिल है जो सभी मौसम की स्थिति में छवियां ले सकता है?
- ऑप्टिकल इमेजिंग सेंसर
- मल्टी-स्पेक्ट्रल कैमरा
- सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR)
- थर्मल इमेजिंग सेंसर
Explanation: EOS-08 एक उच्च-रिज़ॉल्यूशन सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) पेलोड से लैस है। SAR की खासियत यह है कि यह दिन और रात, साथ ही बादल कवर या कोहरे जैसी सभी मौसम की स्थिति में पृथ्वी की सतह की छवियां ले सकता है, जो ऑप्टिकल सेंसर के लिए संभव नहीं है।
Q4. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- 1959
- 1962
- 1969
- 1972
Explanation: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना 15 अगस्त, 1969 को हुई थी। इसकी स्थापना डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में हुई थी, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है।
Q5. भारत का पहला उपग्रह 'आर्यभट्ट' किस वर्ष प्रक्षेपित किया गया था?
- 1971
- 1975
- 1980
- 1984
Explanation: भारत का पहला उपग्रह 'आर्यभट्ट' 1975 में सोवियत संघ की मदद से प्रक्षेपित किया गया था। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत का प्रतीक था और इसने देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान दिलाई।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO का नया पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS-08): आपदा प…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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