ISRO द्वारा अगली पीढ़ी के संचार उपग्रह GSAT-24R का सफल प्रक्षेपण: डिजिटल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 6 जून, 2026 को फ्रेंच गुयाना के कौरौ से एरियन-5 रॉकेट का उपयोग करके अपने अगली पीढ़ी के संचार उपग्रह GSAT-24R का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह उपग्रह भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और विभिन्न संचार सेवाओं को बेहतर बनाएगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 6 जून, 2026 को संचार उपग्रह GSAT-24R का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना के कौरौ से यूरोपीय एरियन-5 रॉकेट का उपयोग करके किया गया।
- GSAT-24R एक 4,180 किलोग्राम वजनी अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह है।
- यह उपग्रह Ku-बैंड ट्रांसपोंडर से लैस है, जो DTH और ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए है।
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), ISRO की वाणिज्यिक शाखा, ने इस उपग्रह को वित्त पोषित किया है।
- NSIL इस उपग्रह की पूरी क्षमता एक निजी भारतीय ग्राहक को लीज पर देगा।
- प्रक्षेपण के लगभग 30 मिनट बाद उपग्रह को भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) में स्थापित किया गया।
- यह प्रक्षेपण भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और 'डिजिटल इंडिया' अभियान को बढ़ावा देगा।
- भारत ने अपना पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह APPLE 1981 में लॉन्च किया था।
- ISRO का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी को 2% से बढ़ाकर 10% करना है।
- भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है।
Why In News
ISRO ने 6 जून, 2026 को GSAT-24R का सफल प्रक्षेपण किया, जो भारत के संचार उपग्रह बेड़े में एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। यह प्रक्षेपण देश की बढ़ती डिजिटल कनेक्टिविटी की मांगों को पूरा करने, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड सेवाओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, और यह अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति को भी दर्शाता है।
Syllabus Connection
यह समाचार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, संचार उपग्रहों के कार्यप्रणाली और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका से संबंधित है। छात्रों को ISRO के मिशनों, उपग्रहों के प्रकार और उनके अनुप्रयोगों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | ISRO द्वारा GSAT-24R संचार उपग्रह का सफल प्रक्षेपण। | भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का महत्व। |
| कब | 6 जून, 2026 को। | भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के दीर्घकालिक लक्ष्यों और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका। |
| कहां से | फ्रेंच गुयाना के कौरौ से एरियन-5 रॉकेट द्वारा। | अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए विदेशी लॉन्च वाहनों पर निर्भरता के कारण। |
| उद्देश्य | DTH, ब्रॉडबैंड, दूरसंचार सेवाएं प्रदान करना। | 'डिजिटल इंडिया' अभियान और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में उपग्रहों की भूमिका। |
| वाणिज्यिक पहलू | NSIL द्वारा वित्त पोषित, निजी ग्राहक को लीज पर। | भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण, NSIL की भूमिका और 'मांग-संचालित' मॉडल का प्रभाव। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Banking (IBPS / SBI) | Low | 1–2 | Occasionally tested via banking technology, fintech, or climate-science crossovers. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: ISRO द्वारा अगली पीढ़ी के संचार उपग्रह GSAT-24R का सफल प्रक्षेपण: डिजिटल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
- ISRO ने 6 जून, 2026 को संचार उपग्रह GSAT-24R का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना के कौरौ से यूरोपीय एरियन-5 रॉकेट का उपयोग करके किया गया।
- GSAT-24R एक 4,180 किलोग्राम वजनी अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह है।
- यह उपग्रह Ku-बैंड ट्रांसपोंडर से लैस है, जो DTH और ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए है।
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), ISRO की वाणिज्यिक शाखा, ने इस उपग्रह को वित्त पोषित किया है।
- NSIL इस उपग्रह की पूरी क्षमता एक निजी भारतीय ग्राहक को लीज पर देगा।
- प्रक्षेपण के लगभग 30 मिनट बाद उपग्रह को भू-स्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) में स्थापित किया गया।
- यह प्रक्षेपण भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा और 'डिजिटल इंडिया' अभियान को बढ़ावा देगा।
- भारत ने अपना पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह APPLE 1981 में लॉन्च किया था।
- ISRO का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी को 2% से बढ़ाकर 10% करना है।
- भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है।
Practice Questions
Q1. GSAT-24R संचार उपग्रह का प्रक्षेपण किस रॉकेट का उपयोग करके किया गया था?
- PSLV-XL
- GSLV Mk-III
- एरियन-5
- फाल्कन 9
Explanation: GSAT-24R का प्रक्षेपण फ्रेंच गुयाना के कौरौ से यूरोपीय भारी-लिफ्ट रॉकेट एरियन-5 का उपयोग करके किया गया था। ISRO अक्सर अपने भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए एरियनस्पेस की सेवाओं का उपयोग करता है।
Q2. GSAT-24R उपग्रह किस बैंड के ट्रांसपोंडर से लैस है, जो उच्च बैंडविड्थ प्रदान करता है?
- C-बैंड
- X-बैंड
- Ku-बैंड
- Ka-बैंड
Explanation: GSAT-24R उपग्रह Ku-बैंड ट्रांसपोंडर से लैस है। Ku-बैंड का उपयोग आमतौर पर DTH टेलीविजन सेवाओं, ब्रॉडबैंड इंटरनेट और अन्य उच्च बैंडविड्थ संचार अनुप्रयोगों के लिए किया जाता है।
Q3. न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), ISRO की वाणिज्यिक शाखा, की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- 2014
- 2017
- 2019
- 2021
Explanation: न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की स्थापना 2019 में हुई थी। यह ISRO की वाणिज्यिक शाखा है, जिसका उद्देश्य भारतीय उद्योगों को अंतरिक्ष-आधारित उत्पादों और सेवाओं के उत्पादन में सक्षम बनाना है।
Q4. भारत का पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह APPLE किस वर्ष लॉन्च किया गया था?
- 1975
- 1981
- 1982
- 1990
Explanation: भारत ने अपना पहला प्रायोगिक संचार उपग्रह, APPLE (Ariane Passenger Payload Experiment), 1981 में लॉन्च किया था। यह भारत के संचार उपग्रह कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम था।
Q5. भू-स्थिर कक्षा (Geostationary Orbit) पृथ्वी से लगभग कितनी ऊंचाई पर स्थित होती है?
- 200 किमी
- 2,000 किमी
- 36,000 किमी
- 3,60,000 किमी
Explanation: भू-स्थिर कक्षा पृथ्वी से लगभग 36,000 किलोमीटर ऊपर स्थित होती है। इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ तालमेल बिठाते हैं, जिससे वे पृथ्वी पर एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई देते हैं, जो संचार के लिए आदर्श है।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO द्वारा अगली पीढ़ी के संचार उपग्रह GSAT-24R क…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
Related Current Affairs
Test Your Knowledge on Today's Current Affairs
10 questions · 10 minutes · Based on today's GK updates. See how prepared you really are.
Start Daily Quiz