ISRO द्वारा शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण: शुक्र ग्रह के अध्ययन में भारत का अगला कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 19 मई, 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने महत्वाकांक्षी शुक्रयान-2 मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह मिशन शुक्र ग्रह के वायुमंडल, सतह और उपसतह का विस्तृत अध्ययन करने के लिए एक ऑर्बिटर और एक लैंडर-रोवर मॉड्यूल ले जाएगा। यह भारत का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा मिशन है, जो ग्रह के भूवैज्ञानिक और भू-रासायनिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 19 मई, 2026 को श्रीहरिकोटा से शुक्रयान-2 मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- यह ISRO का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा मिशन है, पहला शुक्रयान-1 2023 में लॉन्च हुआ था।
- मिशन को लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM3) रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
- शुक्रयान-2 में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर मॉड्यूल शामिल हैं।
- लैंडर-रोवर मॉड्यूल शुक्र की सतह पर उतरकर इन-सीटू भूवैज्ञानिक और भू-रासायनिक विश्लेषण करेगा।
- मिशन का उद्देश्य शुक्र के वायुमंडल, सतह और उपसतह का विस्तृत अध्ययन करना है।
- शुक्र की सतह का तापमान लगभग 475 डिग्री सेल्सियस और वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी का 90 गुना है।
- ऑर्बिटर शुक्र के 'सुपर-रोटेशन' और सतह की मैपिंग का अध्ययन करेगा।
- रोवर में LIBS और APXS जैसे वैज्ञानिक उपकरण शामिल हैं।
- यह मिशन पृथ्वी के जलवायु मॉडल और एक्सोप्लैनेट के अध्ययन में भी मदद करेगा।
Why In News
ISRO ने 19 मई, 2026 को अपने दूसरे शुक्र मिशन, शुक्रयान-2 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। यह घटना भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं और सौर मंडल के अन्य ग्रहों के अध्ययन में उसकी रुचि को दर्शाती है। यह मिशन शुक्र ग्रह के रहस्यों को उजागर करने और पृथ्वी के साथ उसकी तुलना करने में महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा, जिससे ग्रह विज्ञान में नई अंतर्दृष्टि प्राप्त होगी।
Syllabus Connection
यह मिशन भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी क्षमताओं, अंतरग्रहीय अन्वेषण में प्रगति और ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व को दर्शाता है।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण | अंतरग्रहीय अन्वेषण में भारत की बढ़ती क्षमता और शुक्र ग्रह के अध्ययन का महत्व। |
| कब | 19 मई, 2026 | ISRO के अंतरिक्ष कार्यक्रम में इस मिशन की समयरेखा और निरंतरता। |
| किसने | ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) | ISRO की भूमिका, क्षमताएं और वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की स्थिति। |
| घटक | ऑर्बिटर, लैंडर, रोवर मॉड्यूल | प्रत्येक मॉड्यूल की तकनीकी चुनौतियां और वैज्ञानिक उद्देश्य। |
| महत्व | शुक्र के वायुमंडल, सतह का अध्ययन | पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन और अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को समझने में योगदान। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| Banking (IBPS / SBI) | Low | 1–2 | Occasionally tested via banking technology, fintech, or climate-science crossovers. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
Key Facts to Remember: ISRO द्वारा शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण: शुक्र ग्रह के अध्ययन में भारत का अगला कदम
- ISRO ने 19 मई, 2026 को श्रीहरिकोटा से शुक्रयान-2 मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
- यह ISRO का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा मिशन है, पहला शुक्रयान-1 2023 में लॉन्च हुआ था।
- मिशन को लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM3) रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
- शुक्रयान-2 में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर मॉड्यूल शामिल हैं।
- लैंडर-रोवर मॉड्यूल शुक्र की सतह पर उतरकर इन-सीटू भूवैज्ञानिक और भू-रासायनिक विश्लेषण करेगा।
- मिशन का उद्देश्य शुक्र के वायुमंडल, सतह और उपसतह का विस्तृत अध्ययन करना है।
- शुक्र की सतह का तापमान लगभग 475 डिग्री सेल्सियस और वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी का 90 गुना है।
- ऑर्बिटर शुक्र के 'सुपर-रोटेशन' और सतह की मैपिंग का अध्ययन करेगा।
- रोवर में LIBS और APXS जैसे वैज्ञानिक उपकरण शामिल हैं।
- यह मिशन पृथ्वी के जलवायु मॉडल और एक्सोप्लैनेट के अध्ययन में भी मदद करेगा।
Practice Questions
Q1. शुक्रयान-2 मिशन का प्रक्षेपण किस तिथि को किया गया?
- 19 मई, 2025
- 19 मई, 2026
- 19 जून, 2026
- 19 अप्रैल, 2026
Explanation: शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा 19 मई, 2026 को किया गया। यह भारत का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा महत्वाकांक्षी मिशन है।
Q2. शुक्रयान-2 मिशन में कौन सा प्रक्षेपण यान (लॉन्च व्हीकल) इस्तेमाल किया गया है?
- PSLV-XL
- GSLV Mk-II
- LVM3
- SSLV
Explanation: शुक्रयान-2 मिशन को ISRO के शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM3) रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया है। LVM3 को पहले GSLV Mk-III के नाम से जाना जाता था और यह ISRO का सबसे भारी लिफ्ट क्षमता वाला रॉकेट है।
Q3. शुक्रयान-2 मिशन में कौन से मॉड्यूल शामिल हैं?
- केवल ऑर्बिटर
- ऑर्बिटर और लैंडर
- ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर
- केवल लैंडर और रोवर
Explanation: शुक्रयान-2 मिशन एक व्यापक अंतरग्रहीय अन्वेषण मिशन है जिसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर मॉड्यूल शामिल हैं। ऑर्बिटर शुक्र की परिक्रमा करेगा, जबकि लैंडर-रोवर मॉड्यूल सतह पर उतरकर अध्ययन करेगा।
Q4. शुक्र ग्रह की सतह का औसत तापमान लगभग कितना है?
- 100 डिग्री सेल्सियस
- 250 डिग्री सेल्सियस
- 475 डिग्री सेल्सियस
- 600 डिग्री सेल्सियस
Explanation: शुक्र ग्रह की सतह का औसत तापमान लगभग 475 डिग्री सेल्सियस है, जो इसे सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह बनाता है। यह अत्यधिक तापमान इसके घने कार्बन डाइऑक्साइड युक्त वायुमंडल के ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण होता है।
Q5. ISRO के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
- डॉ. के. सिवन
- डॉ. एस. सोमनाथ
- डॉ. ए.एस. किरण कुमार
- डॉ. जी. माधवन नायर
Explanation: वर्तमान में (2026 में भी), ISRO के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ हैं। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें शुक्रयान-2 जैसे महत्वाकांक्षी मिशन भी शामिल हैं।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO द्वारा शुक्रयान-2 मिशन का सफल प्रक्षेपण: शुक…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
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