राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का अगला चरण: औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन पर विशेष जोर
भारत सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अगले चरण की घोषणा की है, जिसका मुख्य उद्देश्य औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना और भारी उद्योगों में हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ाना है। यह पहल देश को ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर ले जाने और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस चरण में विशेष रूप से इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और शिपिंग जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का अगला चरण 28 मई, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया है।
- इस चरण का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना है, विशेष रूप से इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और शिपिंग जैसे भारी उद्योगों में।
- मिशन के दूसरे चरण के लिए कुल 25,000 करोड़ रुपये का प्रारंभिक आवंटन किया गया है।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करना है।
- यह मिशन 2030 तक लगभग 50 MMT प्रति वर्ष CO2 उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा।
- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इस मिशन के लिए नोडल मंत्रालय है।
- मिशन के तहत हरित हाइड्रोजन हब स्थापित किए जाएंगे और कौशल विकास कार्यक्रमों पर जोर दिया जाएगा।
- यह पहल भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है।
- SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) कार्यक्रम मिशन का एक प्रमुख घटक है।
- मिशन से 2030 तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संचयी निवेश और 6 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
Why In News
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 मई, 2026 को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के दूसरे चरण के लिए विस्तृत कार्यान्वयन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना में औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय आवंटन और विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिससे यह विषय तत्काल चर्चा का केंद्र बन गया है। यह निर्णय भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Syllabus Connection
यह लेख भारत की ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन शमन रणनीतियों और नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास से संबंधित है। छात्रों को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग, इसके आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों तथा वैश्विक संदर्भ में इसकी स्थिति को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का दूसरा चरण। | औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में हरित हाइड्रोजन की भूमिका, चुनौतियाँ और अवसर। |
| कब | 28 मई, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित। | भारत के 2070 शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में इसकी समयबद्धता और महत्व। |
| किसके द्वारा | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा कार्यान्वित। | विभिन्न मंत्रालयों और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय की आवश्यकता और चुनौतियाँ। |
| उद्देश्य | औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, 2030 तक 5 MMT उत्पादन क्षमता। | ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और जलवायु लक्ष्यों के बीच संतुलन स्थापित करना। |
| प्रभाव | लगभग 6 लाख नौकरियां, 8 लाख करोड़ रुपये का निवेश, 50 MMT CO2 कमी। | हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के सामाजिक-आर्थिक और भू-राजनीतिक निहितार्थ। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 12–20 | Environment and Ecology is a separate section in UPSC Prelims. GS-III includes environment, climate change, and disaster management. |
| State PCS / PSC | High | 5–8 | State PCS papers test both central environment policy and state-specific conservation achievements. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 3–5 | National parks, Ramsar sites, pollution levels, and climate summits appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–3 | Climate finance, green bonds, and ESG ratings are occasionally tested in banking exams. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–6 | Environment is a reliable Railway GK category — national parks, endangered species, pollution. |
Key Facts to Remember: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का अगला चरण: औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन पर विशेष जोर
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का अगला चरण 28 मई, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया है।
- इस चरण का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना है, विशेष रूप से इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और शिपिंग जैसे भारी उद्योगों में।
- मिशन के दूसरे चरण के लिए कुल 25,000 करोड़ रुपये का प्रारंभिक आवंटन किया गया है।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करना है।
- यह मिशन 2030 तक लगभग 50 MMT प्रति वर्ष CO2 उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा।
- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) इस मिशन के लिए नोडल मंत्रालय है।
- मिशन के तहत हरित हाइड्रोजन हब स्थापित किए जाएंगे और कौशल विकास कार्यक्रमों पर जोर दिया जाएगा।
- यह पहल भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है।
- SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) कार्यक्रम मिशन का एक प्रमुख घटक है।
- मिशन से 2030 तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संचयी निवेश और 6 लाख नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
Practice Questions
Q1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के दूसरे चरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- कृषि क्षेत्र में सिंचाई दक्षता बढ़ाना
- औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देना
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाना
- अंतरिक्ष अनुसंधान में निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करना
Explanation: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के दूसरे चरण का मुख्य उद्देश्य भारी उद्योगों में हरित हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देकर औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन करना है। यह भारत के जलवायु लक्ष्यों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस चरण में इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और शिपिंग जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
Q2. भारत ने 2030 तक प्रति वर्ष कितनी हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है?
- 2 मिलियन मीट्रिक टन
- 5 मिलियन मीट्रिक टन
- 10 मिलियन मीट्रिक टन
- 15 मिलियन मीट्रिक टन
Explanation: भारत सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य देश को हरित हाइड्रोजन उत्पादन में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Q3. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए नोडल मंत्रालय कौन सा है?
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
- भारी उद्योग मंत्रालय
Explanation: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy - MNRE) नोडल मंत्रालय है। यह मंत्रालय मिशन के कार्यान्वयन, नीतियों के निर्माण और संबंधित अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का समन्वय करता है।
Q4. निम्नलिखित में से कौन सा उद्योग राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के दूसरे चरण में औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए लक्षित नहीं है?
- इस्पात
- सीमेंट
- सूचना प्रौद्योगिकी
- उर्वरक
Explanation: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के दूसरे चरण में इस्पात, सीमेंट, उर्वरक और शिपिंग जैसे भारी उद्योगों को औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए लक्षित किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग उच्च कार्बन उत्सर्जन वाले 'हार्ड-टू-एबेट' सेक्टर में शामिल नहीं है, इसलिए यह इस पहल का प्रत्यक्ष लक्ष्य नहीं है।
Q5. भारत का शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य किस वर्ष तक है?
- 2030
- 2040
- 2050
- 2070
Explanation: भारत ने COP26 ग्लासगो शिखर सम्मेलन में पंचामृत लक्ष्यों के तहत 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emission) प्राप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य घोषित किया है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, क्योंकि यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देता है।
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