समान नागरिक संहिता (UCC) पर संसदीय समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत: एक विस्तृत विश्लेषण
समान नागरिक संहिता (UCC) पर गठित संसदीय स्थायी समिति ने 1 जून, 2026 को अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में UCC के विभिन्न पहलुओं, इसके संवैधानिक निहितार्थों और समाज पर संभावित प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जो देश में एक बड़े कानूनी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- समान नागरिक संहिता (UCC) पर संसदीय स्थायी समिति ने 1 जून, 2026 को अपनी रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की।
- UCC भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का हिस्सा है।
- UCC का उद्देश्य सभी भारतीय नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून बनाना है।
- वर्तमान में, भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
- गोवा भारत का एकमात्र राज्य है जहाँ 1867 से गोवा नागरिक संहिता के रूप में UCC लागू है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने शाह बानो मामले (1985) और सरला मुद्गल मामले (1995) सहित कई निर्णयों में UCC को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- समिति की रिपोर्ट में UCC के लैंगिक समानता, राष्ट्रीय एकता और धर्मनिरपेक्षता पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
- रिपोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और UCC के बीच संतुलन स्थापित करने के तरीकों पर भी विचार करती है।
- UCC के कार्यान्वयन से हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 और मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 जैसे मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों पर प्रभाव पड़ेगा।
- फ्रांस और तुर्की जैसे देशों में पहले से ही धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता लागू है।
- यह रिपोर्ट भारत में एक बड़े कानूनी और सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Why In News
समान नागरिक संहिता पर लंबे समय से चल रही बहस के बीच, संसदीय स्थायी समिति द्वारा अपनी विस्तृत रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करना एक महत्वपूर्ण घटना है। यह रिपोर्ट सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए एक आधार प्रदान करती है और संभावित विधायी कार्रवाई के लिए मार्ग प्रशस्त करती है, जिससे यह राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बन गया है।
Syllabus Connection
यह समाचार समान नागरिक संहिता (UCC) से संबंधित है, जो संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित है। छात्रों को मौलिक अधिकारों (विशेषकर धार्मिक स्वतंत्रता) और नीति निदेशक सिद्धांतों के बीच संबंध, साथ ही UCC के संवैधानिक और सामाजिक निहितार्थों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है | सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत आदि हेतु एक समान कानून। | लैंगिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रीय एकता पर UCC का प्रभाव; धार्मिक स्वतंत्रता से टकराव। |
| संवैधानिक आधार | संविधान का अनुच्छेद 44 (DPSP)। | DPSP की प्रवर्तनीयता; मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 25) के साथ संतुलन। |
| प्रमुख मामले | शाह बानो (1985), सरला मुद्गल (1995)। | इन मामलों में SC की टिप्पणियां और UCC की आवश्यकता पर न्यायिक दृष्टिकोण। |
| वर्तमान स्थिति | संसदीय समिति ने 1 जून, 2026 को रिपोर्ट प्रस्तुत की। | रिपोर्ट की सिफारिशें, सरकार की संभावित प्रतिक्रिया और विधायी प्रक्रिया। |
| वैश्विक उदाहरण | फ्रांस (नेपोलियन संहिता), तुर्की। | भारत की बहुलवादी प्रकृति के संदर्भ में वैश्विक मॉडलों की प्रासंगिकता और सीमाएं। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 15–25 | Polity is a core UPSC subject. Both Prelims and Mains test constitutional provisions in depth. |
| State PCS / PSC | High | 5–10 | State PCS papers test both central and state government structures. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–6 | Questions on constitutional amendments, Parliament, and schemes appear in every SSC paper. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | RBI Act, banking legislation, and government policies are regularly tested. |
Key Facts to Remember: समान नागरिक संहिता (UCC) पर संसदीय समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत: एक विस्तृत विश्लेषण
- समान नागरिक संहिता (UCC) पर संसदीय स्थायी समिति ने 1 जून, 2026 को अपनी रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की।
- UCC भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का हिस्सा है।
- UCC का उद्देश्य सभी भारतीय नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानून बनाना है।
- वर्तमान में, भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
- गोवा भारत का एकमात्र राज्य है जहाँ 1867 से गोवा नागरिक संहिता के रूप में UCC लागू है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने शाह बानो मामले (1985) और सरला मुद्गल मामले (1995) सहित कई निर्णयों में UCC को लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- समिति की रिपोर्ट में UCC के लैंगिक समानता, राष्ट्रीय एकता और धर्मनिरपेक्षता पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया गया है।
- रिपोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और UCC के बीच संतुलन स्थापित करने के तरीकों पर भी विचार करती है।
- UCC के कार्यान्वयन से हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 और मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 जैसे मौजूदा व्यक्तिगत कानूनों पर प्रभाव पड़ेगा।
- फ्रांस और तुर्की जैसे देशों में पहले से ही धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता लागू है।
- यह रिपोर्ट भारत में एक बड़े कानूनी और सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Practice Questions
Q1. समान नागरिक संहिता (UCC) भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में उल्लिखित है?
- अनुच्छेद 39
- अनुच्छेद 44
- अनुच्छेद 48
- अनुच्छेद 51
Explanation: समान नागरिक संहिता (UCC) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में उल्लिखित है, जो राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) का हिस्सा है। यह राज्य को भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करने का निर्देश देता है।
Q2. भारत का एकमात्र राज्य कौन सा है जहाँ समान नागरिक संहिता (UCC) लागू है?
- केरल
- सिक्किम
- गोवा
- तमिलनाडु
Explanation: गोवा भारत का एकमात्र राज्य है जहाँ समान नागरिक संहिता (UCC) लागू है। इसे गोवा नागरिक संहिता के नाम से जाना जाता है, जो पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन के दौरान 1867 में लागू की गई थी और स्वतंत्रता के बाद भी जारी रही।
Q3. निम्नलिखित में से किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने समान नागरिक संहिता (UCC) की आवश्यकता पर जोर दिया था?
- केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य
- मेनका गांधी बनाम भारत संघ
- शाह बानो बेगम बनाम मोहम्मद अहमद खान
- इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ
Explanation: सर्वोच्च न्यायालय ने शाह बानो बेगम बनाम मोहम्मद अहमद खान (1985) मामले में समान नागरिक संहिता (UCC) की आवश्यकता पर जोर दिया था। इस मामले में, अदालत ने मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया और सरकार से UCC लागू करने का आग्रह किया।
Q4. समान नागरिक संहिता (UCC) का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- सभी नागरिकों के लिए एक समान आपराधिक कानून बनाना
- सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून (विवाह, तलाक, विरासत) बनाना
- सभी नागरिकों के लिए एक समान कराधान प्रणाली लागू करना
- सभी नागरिकों के लिए एक समान भाषा नीति लागू करना
Explanation: समान नागरिक संहिता (UCC) का प्राथमिक उद्देश्य भारत के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और गुजारा भत्ता जैसे व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने वाले एक समान कानून बनाना है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। इसका लक्ष्य लैंगिक समानता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।
Q5. संसदीय स्थायी समिति ने समान नागरिक संहिता पर अपनी रिपोर्ट किस तिथि को संसद में प्रस्तुत की?
- 15 अगस्त, 2025
- 26 जनवरी, 2026
- 1 जून, 2026
- 5 सितंबर, 2026
Explanation: समान नागरिक संहिता पर संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट 1 जून, 2026 को संसद में प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर आगे की विधायी कार्रवाई के लिए एक आधार प्रदान करती है।
How to Prepare Indian Polity & Governance for Government Exams — समान नागरिक संहिता (UCC) पर संसदीय समिति की रिपोर…
Map every news item to an Article or provision in the Constitution. This is what UPSC Prelims directly tests.
For SSC and Railway, focus on the practical side — who appoints whom, term lengths, and what each body does.
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