भारतीय रिज़र्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में बदलाव की घोषणा की: मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि पर ध्यान
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद प्रमुख नीतिगत दरों में बदलाव की घोषणा की है। यह निर्णय मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के दोहरे उद्देश्यों को संतुलित करने के लिए लिया गया है, जिसका सीधा असर बैंकों और आम जनता पर पड़ेगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 24 मई, 2026 को अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने की घोषणा की।
- रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा गया है, जबकि स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर 6.25% और सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर तथा बैंक दर 6.75% पर बनी हुई है।
- MPC ने मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर रखने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए 'समायोजन की वापसी' (withdrawal of accommodation) के रुख को बनाए रखा है।
- खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) अभी भी RBI के 4% (+/- 2%) के लक्ष्य सीमा के ऊपरी छोर के करीब है।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 7.0% पर बरकरार रखा गया है।
- MPC में 6 सदस्य होते हैं: 3 RBI से (गवर्नर सहित) और 3 केंद्र सरकार द्वारा नामित।
- RBI की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत हुई थी और इसका राष्ट्रीयकरण 1949 में हुआ।
- मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
- रेपो दर वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से अल्पकालिक ऋण लेते हैं।
- उच्च ब्याज दरें गृह ऋण और अन्य ऋणों को महंगा बनाए रखेंगी, जबकि बचतकर्ताओं को उच्च जमा दरों का लाभ मिल सकता है।
- RBI का यह निर्णय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मुद्रास्फीति के दबावों के बीच लिया गया है।
- नकद आरक्षित अनुपात (CRR) 4.5% और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) 18% पर अपरिवर्तित हैं।
Why In News
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी नवीनतम द्विमासिक बैठक के निष्कर्षों की घोषणा की है, जिसमें वर्तमान आर्थिक परिदृश्य, वैश्विक चुनौतियों और घरेलू मुद्रास्फीति के दबावों का आकलन करने के बाद प्रमुख नीतिगत दरों में संशोधन किया गया है। यह घोषणा वित्तीय बाजारों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति, उसके उपकरणों (रेपो दर, CRR, SLR), और मुद्रास्फीति नियंत्रण तथा आर्थिक विकास पर इसके प्रभाव से संबंधित है। छात्रों को केंद्रीय बैंक के कार्यों और अर्थव्यवस्था पर मौद्रिक नीति के प्रभावों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | RBI ने प्रमुख नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखा। | मौद्रिक नीति के उद्देश्य, उपकरण और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव का विश्लेषण। |
| कौन | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC)। | MPC की संरचना, कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया का महत्व। |
| कब | 24 मई, 2026 को द्विमासिक समीक्षा के बाद। | मौद्रिक नीति घोषणाओं की आवृत्ति और समय का आर्थिक संकेत। |
| क्यों | मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि को संतुलित करना। | मुद्रास्फीति-विकास दुविधा, वैश्विक और घरेलू कारकों का प्रभाव। |
| प्रभाव | उच्च ऋण लागत, स्थिर जमा दरें। | बैंकिंग क्षेत्र, उद्योग, उपभोक्ता और वित्तीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
| State PCS / PSC | High | 4–8 | State budget, MSME, agriculture policy, and banking data are common in state PCS papers. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Medium | 2–3 | Railway papers focus on budget allocations, flagship schemes, and GDP milestones. |
Key Facts to Remember: भारतीय रिज़र्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में बदलाव की घोषणा की: मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि पर ध्यान
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 24 मई, 2026 को अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के बाद नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करने की घोषणा की।
- रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा गया है, जबकि स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर 6.25% और सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर तथा बैंक दर 6.75% पर बनी हुई है।
- MPC ने मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर रखने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए 'समायोजन की वापसी' (withdrawal of accommodation) के रुख को बनाए रखा है।
- खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) अभी भी RBI के 4% (+/- 2%) के लक्ष्य सीमा के ऊपरी छोर के करीब है।
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि का अनुमान 7.0% पर बरकरार रखा गया है।
- MPC में 6 सदस्य होते हैं: 3 RBI से (गवर्नर सहित) और 3 केंद्र सरकार द्वारा नामित।
- RBI की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत हुई थी और इसका राष्ट्रीयकरण 1949 में हुआ।
- मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
- रेपो दर वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से अल्पकालिक ऋण लेते हैं।
- उच्च ब्याज दरें गृह ऋण और अन्य ऋणों को महंगा बनाए रखेंगी, जबकि बचतकर्ताओं को उच्च जमा दरों का लाभ मिल सकता है।
- RBI का यह निर्णय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मुद्रास्फीति के दबावों के बीच लिया गया है।
- नकद आरक्षित अनुपात (CRR) 4.5% और सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) 18% पर अपरिवर्तित हैं।
Practice Questions
Q1. भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) में कुल कितने सदस्य होते हैं?
- 4
- 5
- 6
- 7
Explanation: भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) में कुल 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 सदस्य RBI से होते हैं, जिनमें RBI गवर्नर (जो समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं) शामिल हैं, और अन्य 3 सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नामित किए जाते हैं। यह समिति ब्याज दरों पर निर्णय लेती है।
Q2. मई 2026 में घोषित RBI की मौद्रिक नीति के अनुसार, रेपो दर क्या है?
- 6.0%
- 6.25%
- 6.5%
- 6.75%
Explanation: RBI की नवीनतम मौद्रिक नीति घोषणा के अनुसार, रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखा गया है। रेपो दर वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी अल्पकालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए RBI से धन उधार लेते हैं।
Q3. भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किस वर्ष किया गया था?
- 1935
- 1947
- 1949
- 1951
Explanation: भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी, लेकिन इसका राष्ट्रीयकरण भारत की स्वतंत्रता के बाद 1949 में किया गया। राष्ट्रीयकरण के बाद यह पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व में आ गया।
Q4. RBI की मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देना
- केवल मूल्य स्थिरता बनाए रखना
- मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को बढ़ावा देना
- सरकार के लिए राजस्व उत्पन्न करना
Explanation: RBI की मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है। 2016 में, RBI को 4% (+/- 2%) के मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने का जनादेश दिया गया था, जो मूल्य स्थिरता पर जोर देता है।
Q5. 'समायोजन की वापसी' (Withdrawal of Accommodation) शब्द का क्या अर्थ है, जैसा कि RBI की मौद्रिक नीति में उपयोग किया जाता है?
- अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाना
- अर्थव्यवस्था से अतिरिक्त तरलता को कम करना
- ब्याज दरों को कम करना
- बैंकों को अधिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करना
Explanation: 'समायोजन की वापसी' एक मौद्रिक नीति का रुख है जहां केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था से अतिरिक्त तरलता को कम करने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य मुद्रास्फीति के दबावों को नियंत्रित करना और वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनाए रखना है।
How to Prepare Economy & Finance for Government Exams — भारतीय रिज़र्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में बदल…
Track current Repo Rate, Inflation rate, and GDP growth. These three numbers appear in almost every banking exam.
Keep a running note of new schemes with their ministry, launch date, and target beneficiary group.
Focus on the Economic Survey and Union Budget highlights — these single documents generate dozens of exam questions.
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