भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा उपयोग का विस्तार: नई पायलट परियोजनाएँ
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 जून, 2026 को घोषणा की कि वह खुदरा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नई पायलट परियोजनाएँ शुरू करेगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य CBDC (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) के लेन-देन की दक्षता और पहुंच का परीक्षण करना है, जिसमें विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और उपयोग के मामलों को शामिल किया जाएगा। यह कदम भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 जून, 2026 को खुदरा डिजिटल रुपया (e₹-R) के उपयोग के विस्तार के लिए नई पायलट परियोजनाओं की घोषणा की।
- इन नई परियोजनाओं में टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- ऑफलाइन कार्यक्षमता का परीक्षण भी इन पायलटों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी लेनदेन संभव हो सकेगा।
- डिजिटल रुपया (CBDC) केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक डिजिटल मुद्रा है जो फिएट मुद्रा के बराबर है और ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है।
- थोक डिजिटल रुपया (e₹-W) का पहला पायलट अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ, जबकि खुदरा डिजिटल रुपया (e₹-R) का पायलट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू हुआ।
- RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
- वित्त अधिनियम, 2022 ने CBDC को 'करेंसी' की परिभाषा में शामिल करके इसे कानूनी मान्यता प्रदान की है।
- भारत का CBDC मॉडल दो प्रकार का है: थोक (Wholesale) और खुदरा (Retail)।
- डिजिटल रुपये का लक्ष्य नकदी पर निर्भरता कम करना, लेनदेन लागत घटाना और भुगतान प्रणालियों की दक्षता बढ़ाना है।
- स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट और प्रोग्रामेबल भुगतान जैसी उन्नत सुविधाओं के एकीकरण का भी संकेत दिया गया है।
- भारत का CBDC विकास चीन के डिजिटल युआन और यूरोपीय संघ के डिजिटल यूरो जैसे वैश्विक प्रयासों के साथ संरेखित है।
Why In News
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1 जून, 2026 को खुदरा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के विस्तार के लिए नई पायलट परियोजनाओं की घोषणा की। यह घोषणा CBDC के सफल थोक और खुदरा परीक्षणों के बाद आई है, जिसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना और आम जनता के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ाना है।
Syllabus Connection
यह समाचार भारत में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के विकास और विस्तार से संबंधित है, जो मौद्रिक नीति के भविष्य, वित्तीय समावेशन और भुगतान प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर गहरा प्रभाव डालेगा। छात्रों को CBDC की अवधारणा, इसके प्रकार, लाभ, चुनौतियाँ और वैश्विक रुझानों की समीक्षा करनी चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है | खुदरा डिजिटल रुपया (e₹-R) की नई पायलट परियोजनाओं का विस्तार। | CBDC के वित्तीय समावेशन, भुगतान दक्षता और मौद्रिक नीति पर दीर्घकालिक प्रभाव का विश्लेषण। |
| कब | 1 जून, 2026 को RBI द्वारा घोषणा। | CBDC के विकास की समय-सीमा और वैश्विक CBDC विकास के साथ तुलना। |
| कौन | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), गवर्नर शक्तिकांत दास। | RBI की भूमिका, सरकार का समर्थन और बैंकिंग क्षेत्र की भागीदारी का मूल्यांकन। |
| उद्देश्य | वित्तीय समावेशन, नकदी पर निर्भरता कम करना, भुगतान दक्षता बढ़ाना। | डिजिटल रुपये के सामाजिक-आर्थिक लाभ और साइबर सुरक्षा व गोपनीयता संबंधी चुनौतियों का विस्तृत अध्ययन। |
| तकनीक | ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित। | ब्लॉकचेन के अनुप्रयोग, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स और प्रोग्रामेबल भुगतान की क्षमता पर चर्चा। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
| State PCS / PSC | High | 4–8 | State budget, MSME, agriculture policy, and banking data are common in state PCS papers. |
Key Facts to Remember: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा उपयोग का विस्तार: नई पायलट परियोजनाएँ
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 जून, 2026 को खुदरा डिजिटल रुपया (e₹-R) के उपयोग के विस्तार के लिए नई पायलट परियोजनाओं की घोषणा की।
- इन नई परियोजनाओं में टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- ऑफलाइन कार्यक्षमता का परीक्षण भी इन पायलटों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जिससे इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी लेनदेन संभव हो सकेगा।
- डिजिटल रुपया (CBDC) केंद्रीय बैंक द्वारा जारी एक डिजिटल मुद्रा है जो फिएट मुद्रा के बराबर है और ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है।
- थोक डिजिटल रुपया (e₹-W) का पहला पायलट अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ, जबकि खुदरा डिजिटल रुपया (e₹-R) का पायलट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू हुआ।
- RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
- वित्त अधिनियम, 2022 ने CBDC को 'करेंसी' की परिभाषा में शामिल करके इसे कानूनी मान्यता प्रदान की है।
- भारत का CBDC मॉडल दो प्रकार का है: थोक (Wholesale) और खुदरा (Retail)।
- डिजिटल रुपये का लक्ष्य नकदी पर निर्भरता कम करना, लेनदेन लागत घटाना और भुगतान प्रणालियों की दक्षता बढ़ाना है।
- स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट और प्रोग्रामेबल भुगतान जैसी उन्नत सुविधाओं के एकीकरण का भी संकेत दिया गया है।
- भारत का CBDC विकास चीन के डिजिटल युआन और यूरोपीय संघ के डिजिटल यूरो जैसे वैश्विक प्रयासों के साथ संरेखित है।
Practice Questions
Q1. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा खुदरा डिजिटल रुपया (e₹-R) के लिए पहला पायलट प्रोजेक्ट किस तिथि को शुरू किया गया था?
- अक्टूबर 2022
- 1 दिसंबर, 2022
- 1 जनवरी, 2023
- 1 जून, 2026
Explanation: भारतीय रिज़र्व बैंक ने खुदरा डिजिटल रुपया (e₹-R) के लिए पहला पायलट प्रोजेक्ट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू किया था। अक्टूबर 2022 में थोक डिजिटल रुपया (e₹-W) का पायलट शुरू किया गया था।
Q2. भारत में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को कानूनी मान्यता किस अधिनियम के तहत मिली है?
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934
- भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
- वित्त अधिनियम, 2022
- कंपनी अधिनियम, 2013
Explanation: वित्त अधिनियम, 2022 में संशोधन करके CBDC को 'करेंसी' की परिभाषा में शामिल किया गया है, जिससे इसे कानूनी मान्यता मिली है। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 RBI को मुद्रा जारी करने का अधिकार देता है, लेकिन CBDC की विशिष्ट कानूनी मान्यता वित्त अधिनियम, 2022 से आई है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा देश अपनी CBDC 'सैंड डॉलर' लॉन्च करने वाला पहला देश है?
- चीन
- भारत
- बहमास
- नाइजीरिया
Explanation: बहमास दुनिया के पहले देशों में से एक है जिसने अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) 'सैंड डॉलर' को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया। यह वित्तीय समावेशन और आपदा लचीलेपन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था।
Q4. डिजिटल रुपये (e-Rupee) की नई पायलट परियोजनाओं में किस कार्यक्षमता का परीक्षण एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जो इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी लेनदेन की अनुमति देगा?
- स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट
- प्रोग्रामेबल भुगतान
- ऑफलाइन कार्यक्षमता
- सीमा-पार भुगतान
Explanation: RBI ने घोषणा की है कि नई पायलट परियोजनाओं में ऑफलाइन कार्यक्षमता का परीक्षण एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना भी डिजिटल रुपये का उपयोग करके लेनदेन किया जा सके, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इसकी पहुंच बढ़ेगी।
Q5. डिजिटल रुपये के संदर्भ में, 'e₹-W' क्या दर्शाता है?
- इलेक्ट्रॉनिक खुदरा रुपया
- आपातकालीन रुपया
- थोक डिजिटल रुपया
- विदेशी मुद्रा रुपया
Explanation: डिजिटल रुपये के संदर्भ में, 'e₹-W' थोक डिजिटल रुपया (Wholesale Digital Rupee) को दर्शाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से वित्तीय संस्थानों के बीच बड़े मूल्य के लेनदेन, जैसे सरकारी प्रतिभूतियों के निपटान के लिए किया जाता है।
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