केंद्र सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) विधेयक, 2026' का पुनरुत्थान: न्यायपालिका में सुधार की नई पहल
केंद्र सरकार ने न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) विधेयक, 2026' को पुनर्जीवित करने की घोषणा की है। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली के विकल्प के रूप में एक नए आयोग की स्थापना का प्रस्ताव करता है। इस कदम का उद्देश्य कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन स्थापित करना है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- केंद्र सरकार ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) विधेयक, 2026' को पुनर्जीवित करने की घोषणा की।
- यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली का विकल्प प्रस्तावित करता है।
- NJAC अधिनियम, 2014 को सर्वोच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2015 में असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिससे कॉलेजियम प्रणाली बहाल हो गई थी।
- प्रस्तावित NJAC में भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री और दो प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे।
- नए विधेयक में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जैसे कि दो सदस्यों की आपत्ति पर उम्मीदवार की नियुक्ति न होना।
- यह कदम न्यायपालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यपालिका की भूमिका बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
- आलोचकों का तर्क है कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
- यह विधेयक संसद के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा और इस पर व्यापक बहस की उम्मीद है।
Why In News
न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चल रही बहस के बीच, केंद्र सरकार ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) विधेयक, 2026' को पुनर्जीवित करने की अपनी मंशा की घोषणा की है। यह घोषणा न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका की भूमिका को बढ़ाने और कॉलेजियम प्रणाली की कथित अपारदर्शिता को दूर करने के सरकार के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिससे यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।
Syllabus Connection
यह खबर भारतीय न्यायपालिका की संरचना, कार्यप्रणाली, न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया और कार्यपालिका व न्यायपालिका के बीच शक्ति संतुलन से संबंधित है। छात्रों को कॉलेजियम प्रणाली, NJAC, और संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है NJAC? | न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्तावित आयोग। | कॉलेजियम प्रणाली के विकल्प के रूप में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास। |
| कब हुआ पुनरुत्थान? | 20 मई, 2026 को केंद्र सरकार द्वारा घोषणा। | न्यायिक सुधारों और कार्यपालिका-न्यायपालिका संतुलन पर निरंतर बहस का परिणाम। |
| प्रमुख सदस्य कौन? | CJI, SC के 2 वरिष्ठतम न्यायाधीश, कानून मंत्री, 2 प्रतिष्ठित व्यक्ति। | न्यायपालिका, कार्यपालिका और नागरिक समाज के प्रतिनिधित्व का संतुलन। |
| पिछला NJAC कब रद्द? | अक्टूबर 2015 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा। | न्यायपालिका की स्वतंत्रता के सिद्धांत के उल्लंघन के आधार पर। |
| महत्व क्या है? | न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना। | न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाम लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन का संवैधानिक प्रश्न। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 15–25 | Polity is a core UPSC subject. Both Prelims and Mains test constitutional provisions in depth. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–6 | Questions on constitutional amendments, Parliament, and schemes appear in every SSC paper. |
| State PCS / PSC | High | 5–10 | State PCS papers test both central and state government structures. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | RBI Act, banking legislation, and government policies are regularly tested. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 3–5 | Government schemes and constitutional bodies are standard Railway GK questions. |
Key Facts to Remember: केंद्र सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) विधेयक, 2026' का पुनरुत्थान: न्यायपालिका में सुधार की नई पहल
- केंद्र सरकार ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) विधेयक, 2026' को पुनर्जीवित करने की घोषणा की।
- यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली का विकल्प प्रस्तावित करता है।
- NJAC अधिनियम, 2014 को सर्वोच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2015 में असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिससे कॉलेजियम प्रणाली बहाल हो गई थी।
- प्रस्तावित NJAC में भारत के मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री और दो प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे।
- नए विधेयक में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपाय शामिल हैं, जैसे कि दो सदस्यों की आपत्ति पर उम्मीदवार की नियुक्ति न होना।
- यह कदम न्यायपालिका में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यपालिका की भूमिका बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
- आलोचकों का तर्क है कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
- यह विधेयक संसद के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा और इस पर व्यापक बहस की उम्मीद है।
Practice Questions
Q1. भारत में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए वर्तमान में कौन सी प्रणाली प्रचलन में है?
- राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC)
- कॉलेजियम प्रणाली
- संसदीय नियुक्ति समिति
- राष्ट्रपति द्वारा प्रत्यक्ष नियुक्ति
Explanation: भारत में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति वर्तमान में कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से होती है। NJAC अधिनियम, 2014 को सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिसके बाद कॉलेजियम प्रणाली बहाल हो गई थी।
Q2. राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम को सर्वोच्च न्यायालय ने किस वर्ष असंवैधानिक घोषित किया था?
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
Explanation: सर्वोच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2015 में 99वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2014 के माध्यम से स्थापित NJAC अधिनियम को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। न्यायालय ने तर्क दिया था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।
Q3. प्रस्तावित 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) विधेयक, 2026' में प्रतिष्ठित व्यक्तियों का चयन कौन सी समिति करेगी?
- केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश और केंद्रीय कानून मंत्री
- प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में विपक्ष के नेता
- संसद की एक विशेष समिति
- राष्ट्रपति द्वारा नामित विशेषज्ञ समिति
Explanation: नए प्रस्तावित NJAC विधेयक, 2026 के अनुसार, दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों का चयन प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और लोकसभा में विपक्ष के नेता की एक समिति द्वारा किया जाएगा। यह पिछले NJAC अधिनियम से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
Q4. NJAC की स्थापना के लिए कौन सा संवैधानिक संशोधन अधिनियम लाया गया था?
- 97वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 98वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 99वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 100वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
Explanation: राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) की स्थापना के लिए 99वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2014 लाया गया था। इस अधिनियम ने संविधान में नए अनुच्छेद जोड़े थे, लेकिन बाद में इसे सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक करार दिया।
Q5. न्यायपालिका की स्वतंत्रता किस संवैधानिक सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है?
- संघीय ढांचा
- धर्मनिरपेक्षता
- समाजवाद
- संविधान की मूल संरचना
Explanation: न्यायपालिका की स्वतंत्रता को भारतीय संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले (1973) में मूल संरचना के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था, और इसी आधार पर NJAC अधिनियम को भी असंवैधानिक घोषित किया गया था।
How to Prepare Indian Polity & Governance for Government Exams — केंद्र सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आ…
Map every news item to an Article or provision in the Constitution. This is what UPSC Prelims directly tests.
For SSC and Railway, focus on the practical side — who appoints whom, term lengths, and what each body does.
Note the date and context of any constitutional amendment or ordinance. Questions are often framed around the 'first time' or 'most recent' event.
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