वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन: 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना पर ऐतिहासिक समझौता
वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन 2026 में, विभिन्न देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और विकासशील देशों को हरित प्रौद्योगिकियों में संक्रमण के लिए सहायता प्रदान करने हेतु एक ऐतिहासिक 'हरित परिवर्तन कोष' (Green Transition Fund) की स्थापना पर सहमति व्यक्त की है। यह समझौता जलवायु कार्रवाई के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों को जुटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य 2050 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- 23 मई, 2026 को वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन में 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना पर समझौता हुआ।
- कोष का प्रारंभिक लक्ष्य 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना है।
- इसका प्रबंधन विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के संयुक्त तत्वावधान में एक स्वतंत्र बोर्ड करेगा।
- कोष का उद्देश्य विकासशील देशों को नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश में सहायता करना है।
- यह पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान वृद्धि लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- भारत ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे वैश्विक जलवायु न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
- कोष विकसित देशों, निजी क्षेत्र और बहुपक्षीय विकास बैंकों से योगदान आकर्षित करेगा।
- यह छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (SIDS) और सबसे कम विकसित देशों (LDCs) को प्राथमिकता देगा।
- यह कोष अनुदान, रियायती ऋण, इक्विटी निवेश और जोखिम-साझाकरण तंत्र जैसे वित्तीय उपकरण प्रदान करेगा।
- यह मौजूदा हरित जलवायु कोष (GCF) और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) जैसे तंत्रों का पूरक होगा।
Why In News
पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने और विकासशील देशों की बढ़ती जलवायु वित्त आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय तंत्रों पर लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद, 23 मई, 2026 को वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन में 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना पर सहमति बनी है। यह समझौता जलवायु कार्रवाई के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक क्षण है।
Syllabus Connection
यह समाचार जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक सहयोग, अंतर्राष्ट्रीय वित्तपोषण तंत्र और विकासशील देशों की भूमिका से संबंधित है, जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और पर्यावरणीय शासन के तहत आता है।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना पर ऐतिहासिक समझौता। | जलवायु वित्त में अंतराल को पाटने और वैश्विक हरित संक्रमण को गति देने का महत्व। |
| कब | 23 मई, 2026 को वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन में। | पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की तात्कालिकता। |
| कौन | विभिन्न देश, विश्व बैंक, UNDP। | विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु न्याय और साझा जिम्मेदारी का सिद्धांत। |
| उद्देश्य | 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना, हरित प्रौद्योगिकियों में निवेश। | जलवायु परिवर्तन शमन, अनुकूलन और लचीलेपन के लिए व्यापक वित्तीय रणनीति। |
| भारत की भूमिका | समझौते का स्वागत, जलवायु न्याय का समर्थन। | भारत की अपनी NDC प्रतिबद्धताओं और 2070 शुद्ध-शून्य लक्ष्य को प्राप्त करने में कोष का महत्व। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 10–20 | International relations is a core GS-II topic for UPSC. Bilateral agreements, multilateral bodies, and geopolitics are essential. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | International summits, treaties, and India's bilateral relations appear in SSC GK. |
| Banking (IBPS / SBI) | Medium | 2–4 | G20, IMF/World Bank decisions, and global trade events are tested in banking exams. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | State PCS papers test India's role in international forums and bilateral trade ties. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Medium | 2–4 | Summits, UN resolutions, and India's foreign policy are included in Railway GK. |
Key Facts to Remember: वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन: 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना पर ऐतिहासिक समझौता
- 23 मई, 2026 को वैश्विक जलवायु वित्त शिखर सम्मेलन में 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना पर समझौता हुआ।
- कोष का प्रारंभिक लक्ष्य 2030 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना है।
- इसका प्रबंधन विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के संयुक्त तत्वावधान में एक स्वतंत्र बोर्ड करेगा।
- कोष का उद्देश्य विकासशील देशों को नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश में सहायता करना है।
- यह पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस वैश्विक तापमान वृद्धि लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- भारत ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे वैश्विक जलवायु न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
- कोष विकसित देशों, निजी क्षेत्र और बहुपक्षीय विकास बैंकों से योगदान आकर्षित करेगा।
- यह छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (SIDS) और सबसे कम विकसित देशों (LDCs) को प्राथमिकता देगा।
- यह कोष अनुदान, रियायती ऋण, इक्विटी निवेश और जोखिम-साझाकरण तंत्र जैसे वित्तीय उपकरण प्रदान करेगा।
- यह मौजूदा हरित जलवायु कोष (GCF) और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) जैसे तंत्रों का पूरक होगा।
Practice Questions
Q1. हाल ही में स्थापित 'हरित परिवर्तन कोष' का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- विकासशील देशों में सैन्य सहायता प्रदान करना।
- विकासशील देशों को हरित प्रौद्योगिकियों और जलवायु अनुकूलन में निवेश के लिए वित्तीय सहायता देना।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों को बढ़ावा देना।
- वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
Explanation: 'हरित परिवर्तन कोष' का प्राथमिक उद्देश्य विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने और हरित प्रौद्योगिकियों में संक्रमण के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश पर केंद्रित है।
Q2. 'हरित परिवर्तन कोष' का प्रबंधन किन दो प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा?
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO)
- विश्व बैंक (World Bank) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
- संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA)
- एशियाई विकास बैंक (ADB) और अफ्रीकी विकास बैंक (AfDB)
Explanation: 'हरित परिवर्तन कोष' का प्रबंधन विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के संयुक्त तत्वावधान में एक स्वतंत्र बोर्ड द्वारा किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि कोष का संचालन पारदर्शी और प्रभावी ढंग से हो।
Q3. पेरिस समझौते का मुख्य लक्ष्य क्या है?
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधाओं को दूर करना।
- वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखना और 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों को जारी रखना।
- परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना।
- अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
Explanation: पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय संधि है। इसका मुख्य लक्ष्य वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखना और 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयासों को जारी रखना है।
Q4. भारत ने 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
- भारत ने इस पहल का विरोध किया है।
- भारत ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे जलवायु न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
- भारत ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
- भारत ने कोष में सैन्य सहायता का अनुरोध किया है।
Explanation: भारत ने 'हरित परिवर्तन कोष' की स्थापना का गर्मजोशी से स्वागत किया है। भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे वैश्विक जलवायु न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, जो विकासशील देशों को उनके हरित लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा।
Q5. 2009 के कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन में विकसित देशों ने विकासशील देशों को प्रति वर्ष कितना जलवायु वित्त जुटाने का वादा किया था?
- 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर
- 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर
Explanation: 2009 के कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन में, विकसित देशों ने 2020 तक विकासशील देशों को प्रति वर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने का वादा किया था। हालांकि, यह लक्ष्य लगातार पूरा नहीं हो पाया है।
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