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ISRO ने 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए अंतिम तैयारी शुरू की, 2027 में लॉन्च की योजना

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 13 मई, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए अंतिम तैयारी शुरू करने की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2027 के मध्य में शुक्र ग्रह के लिए एक ऑर्बिटर भेजना है। यह मिशन शुक्र के वातावरण, सतह और उप-सतह का विस्तृत अध्ययन करेगा, जिससे ग्रह के विकास और ग्रीनहाउस प्रभाव की गहरी समझ प्राप्त होगी। 'शुक्रयान-2' भारत का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा मिशन होगा, जो 'शुक्रयान-1' की सफलताओं पर आधारित होगा।

ISRO ने 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए अंतिम तैयारी शुरू की, 2027 में लॉन्च की योजना

2-Minute Summary (TL;DR)

  • ISRO ने 13 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए अंतिम तैयारी शुरू करने की घोषणा की।
  • मिशन को 2027 के मध्य में शुक्र ग्रह के लिए एक उन्नत ऑर्बिटर भेजने की योजना है।
  • यह भारत का शुक्र ग्रह के लिए दूसरा मिशन होगा, जो 'शुक्रयान-1' की सफलताओं पर आधारित है।
  • 'शुक्रयान-2' शुक्र के वातावरण, सतह और उप-सतह का विस्तृत अध्ययन करेगा।
  • मिशन में भारत, फ्रांस और स्वीडन के वैज्ञानिक उपकरण (पेलोड) शामिल होंगे।
  • लॉन्च के लिए ISRO के सबसे शक्तिशाली रॉकेट GSLV Mk III (अब LVM3) का उपयोग किया जाएगा।
  • मिशन के प्रमुख उद्देश्यों में शुक्र के ग्रीनहाउस प्रभाव और भूवैज्ञानिक विशेषताओं का अध्ययन शामिल है।
  • शुक्रयान-1 को 2024 में लॉन्च किया गया था और इसने शुक्र के ऊपरी वातावरण का अध्ययन किया था।
  • मिशन की अनुमानित अवधि शुक्र की कक्षा में कम से कम चार वर्ष होगी।
  • यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' और भारत की अंतरिक्ष नीति (2023) के अनुरूप है।

Why In News

ISRO ने 13 मई, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए अंतिम तैयारी शुरू करने की घोषणा की है, जो 2027 में लॉन्च होने वाला है। यह घोषणा भारत के अंतरग्रहीय अन्वेषण में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करती है और 'शुक्रयान-1' की सफलताओं के बाद शुक्र ग्रह के लिए एक अधिक उन्नत मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मिशन की तैयारी वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।

Syllabus Connection

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- दैनिक जीवन में विकास एवं अनुप्रयोग तथा राष्ट्रीय सुरक्षा में इसका योगदान। सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषय।

यह समाचार ISRO के गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों, विशेष रूप से शुक्र ग्रह के अध्ययन से संबंधित है। छात्रों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों, अंतरग्रहीय मिशनों के महत्व, और शुक्र ग्रह के भूवैज्ञानिक एवं वायुमंडलीय विशेषताओं को समझना चाहिए।

Prelims vs Mains — What to Focus On

Aspect Prelims Mains
क्याISRO ने 'शुक्रयान-2' मिशन की अंतिम तैयारी शुरू की।शुक्र के अध्ययन का पृथ्वी के जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस प्रभाव को समझने में महत्व।
कब13 मई, 2026 को घोषणा; 2027 में लॉन्च।अंतरग्रहीय मिशनों के लिए लॉन्च विंडो का महत्व और समय-सीमा।
कौनISRO द्वारा; भारत, फ्रांस, स्वीडन के पेलोड।अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का महत्व और भारत की अंतरिक्ष कूटनीति में भूमिका।
उद्देश्यशुक्र के वातावरण, सतह, उप-सतह का विस्तृत अध्ययन।शुक्र के भूगर्भीय विकास और ग्रीनहाउस प्रभाव के मॉडल को समझना।
लॉन्च वाहनGSLV Mk III (LVM3)।भारत की भारी-लिफ्ट लॉन्च क्षमताओं का प्रदर्शन और भविष्य के मिशनों के लिए निहितार्थ।

How This Topic is Tested in Competitive Exams

ExamFrequencyApprox. MarksWhat Gets Asked
UPSC / State PCSMedium5–8UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security.
SSC (CGL / CHSL / MTS)High4–8Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics.
Railway (RRB NTPC / Group D)Very High6–10Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers.
State PCS / PSCMedium3–5Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly.

What to Memorize from This Topic

  • ISRO missions: satellite name, purpose, launch date, orbit type
  • Defence acquisitions: system name, origin country, inducted into which force
  • COVID/health research: vaccine names, institutes involved, approval status
  • Technology achievements: first-ever milestones, world records, India-specific achievements
  • Scientific organizations: HQ, head, purpose (CSIR, DRDO, BARC, ICAR)

Practice Questions

Q1. 'शुक्रयान-2' मिशन को किस वर्ष लॉन्च करने की योजना है?

  1. 2026
  2. 2027
  3. 2028
  4. 2029

Explanation: ISRO ने 13 मई, 2026 को घोषणा की कि 'शुक्रयान-2' मिशन को 2027 के मध्य में लॉन्च करने की योजना है। यह लॉन्च विंडो शुक्र ग्रह के लिए एक अनुकूल प्रक्षेपवक्र प्रदान करेगी, जिससे मिशन को ऊर्जा-कुशल तरीके से ग्रह तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

Q2. 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए किस लॉन्च वाहन का उपयोग किया जाएगा?

  1. PSLV
  2. GSLV Mk II
  3. GSLV Mk III (LVM3)
  4. SSLV

Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन के लिए ISRO के सबसे शक्तिशाली लॉन्च वाहन GSLV Mk III (जिसे अब LVM3 कहा जाता है) का उपयोग किया जाएगा। यह रॉकेट भारी पेलोड को भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (GTO) या गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए ले जाने में सक्षम है।

Q3. शुक्र ग्रह के वातावरण में मुख्य रूप से कौन सी गैस पाई जाती है?

  1. नाइट्रोजन
  2. ऑक्सीजन
  3. कार्बन डाइऑक्साइड
  4. मीथेन

Explanation: शुक्र ग्रह का वातावरण मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) से बना है, जिसमें सल्फ्यूरिक एसिड के बादल भी मौजूद हैं। यह अत्यधिक सघन CO2 वातावरण ही शुक्र पर तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव और अत्यधिक उच्च तापमान का कारण है।

Q4. 'शुक्रयान-2' मिशन में किन देशों के वैज्ञानिक उपकरण (पेलोड) शामिल होंगे?

  1. भारत, रूस और जर्मनी
  2. भारत, जापान और अमेरिका
  3. भारत, फ्रांस और स्वीडन
  4. भारत, यूके और कनाडा

Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन में भारत के स्वदेशी पेलोड के साथ-साथ फ्रांस और स्वीडन के वैज्ञानिक उपकरण भी शामिल होंगे। यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशन की वैज्ञानिक क्षमता को बढ़ाता है और वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की भूमिका को दर्शाता है।

Q5. भारत का पहला शुक्र मिशन, 'शुक्रयान-1', किस वर्ष लॉन्च किया गया था?

  1. 2013
  2. 2018
  3. 2020
  4. 2024

Explanation: भारत का पहला शुक्र मिशन, 'शुक्रयान-1', 2024 में सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। इस मिशन में एक ऑर्बिटर शामिल था जिसने शुक्र के ऊपरी वातावरण और आयनमंडल का प्रारंभिक अध्ययन किया, जिसने 'शुक्रयान-2' के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

How to Prepare Science & Technology for Government Exams

For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.

For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.

For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.

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