ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन लॉन्च: शुक्र ग्रह के वायुमंडल और भूवैज्ञानिक संरचना का अध्ययन करेगा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2 जून, 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने दूसरे शुक्र मिशन 'शुक्रयान-2' का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इस मिशन का उद्देश्य शुक्र ग्रह के घने वायुमंडल, उसकी सतह की भूवैज्ञानिक संरचना और ग्रह पर संभावित ज्वालामुखीय गतिविधियों का विस्तृत अध्ययन करना है। 'शुक्रयान-2' में एक ऑर्बिटर और एक वायुमंडलीय प्रोब शामिल है, जो शुक्र के रहस्यों को उजागर करने के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण ले जा रहा है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- ISRO ने 2 जून, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
- यह मिशन श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV Mk-III रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
- 'शुक्रयान-2' में एक ऑर्बिटर और एक वायुमंडलीय प्रोब शामिल है।
- मिशन का मुख्य उद्देश्य शुक्र के घने वायुमंडल और भूवैज्ञानिक संरचना का विस्तृत अध्ययन करना है।
- यह शुक्र पर संभावित ज्वालामुखीय गतिविधियों का भी पता लगाएगा।
- अंतरिक्ष यान लगभग 150 दिनों की यात्रा के बाद नवंबर 2026 तक शुक्र की कक्षा में पहुँचेगा।
- मिशन में कुल 14 वैज्ञानिक पेलोड हैं, जिनमें सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) प्रमुख है।
- वायुमंडलीय प्रोब शुक्र के निचले वायुमंडल में सीधे डेटा एकत्र करेगा।
- यह भारत का दूसरा शुक्र मिशन है; पहला शुक्रयान-1 2024 में लॉन्च हुआ था।
- मिशन की कुल अनुमानित लागत लगभग 850 करोड़ रुपये है।
- ISRO अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक मील का पत्थर बताया।
Why In News
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2 जून, 2026 को अपने महत्वाकांक्षी 'शुक्रयान-2' मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह भारत का दूसरा शुक्र मिशन है और इसका सफल प्रक्षेपण वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है, जिससे यह तत्काल एक प्रमुख समाचार बन गया है।
Syllabus Connection
यह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, ग्रह विज्ञान, खगोल भौतिकी और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में नवीनतम विकास से संबंधित है, जो अंतरग्रहीय मिशनों के उद्देश्यों, तकनीकों और वैश्विक संदर्भ को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या | ISRO का दूसरा शुक्र मिशन, 'शुक्रयान-2' | शुक्र के वायुमंडल, भूवैज्ञानिक संरचना और ज्वालामुखीय गतिविधियों का विस्तृत अध्ययन। |
| कब | 2 जून, 2026 को लॉन्च | नवंबर 2026 तक शुक्र की कक्षा में पहुँचने का अनुमान, 150 दिन की यात्रा। |
| कहां से | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा | भारत के प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से, जो ISRO के अंतरग्रहीय मिशनों का आधार है। |
| प्रक्षेपण यान | GSLV Mk-III | ISRO का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान, जो भारी पेलोड को गहरे अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है। |
| घटक | ऑर्बिटर और वायुमंडलीय प्रोब | ऑर्बिटर दूरस्थ संवेदन करेगा, जबकि प्रोब सीधे वायुमंडलीय डेटा एकत्र करेगा, जिससे अद्वितीय अंतर्दृष्टि मिलेगी। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Medium | 5–8 | UPSC tests Science & Technology through governance: space policy, biotech regulations, cyber security. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–8 | Basic science, space missions, ISRO launches, and defence technology are standard SSC GK topics. |
| State PCS / PSC | Medium | 3–5 | Space missions, defence acquisitions, and health research appear regularly. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | Very High | 6–10 | Science and Technology is one of the largest GK sections in Railway papers. |
Key Facts to Remember: ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन लॉन्च: शुक्र ग्रह के वायुमंडल और भूवैज्ञानिक संरचना का अध्ययन करेगा
- ISRO ने 2 जून, 2026 को 'शुक्रयान-2' मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
- यह मिशन श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV Mk-III रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया।
- 'शुक्रयान-2' में एक ऑर्बिटर और एक वायुमंडलीय प्रोब शामिल है।
- मिशन का मुख्य उद्देश्य शुक्र के घने वायुमंडल और भूवैज्ञानिक संरचना का विस्तृत अध्ययन करना है।
- यह शुक्र पर संभावित ज्वालामुखीय गतिविधियों का भी पता लगाएगा।
- अंतरिक्ष यान लगभग 150 दिनों की यात्रा के बाद नवंबर 2026 तक शुक्र की कक्षा में पहुँचेगा।
- मिशन में कुल 14 वैज्ञानिक पेलोड हैं, जिनमें सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) प्रमुख है।
- वायुमंडलीय प्रोब शुक्र के निचले वायुमंडल में सीधे डेटा एकत्र करेगा।
- यह भारत का दूसरा शुक्र मिशन है; पहला शुक्रयान-1 2024 में लॉन्च हुआ था।
- मिशन की कुल अनुमानित लागत लगभग 850 करोड़ रुपये है।
- ISRO अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक मील का पत्थर बताया।
Practice Questions
Q1. ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन किस प्रक्षेपण यान (launch vehicle) का उपयोग करके लॉन्च किया गया?
- PSLV-XL
- GSLV Mk-III
- SSLV
- GSLV Mk-II
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन को ISRO के शक्तिशाली जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-III (GSLV Mk-III) रॉकेट का उपयोग करके प्रक्षेपित किया गया। यह ISRO का सबसे भारी उपग्रहों को ले जाने वाला प्रक्षेपण यान है।
Q2. 'शुक्रयान-2' मिशन का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
- मंगल ग्रह पर मानव बस्ती की संभावना का अध्ययन करना
- बृहस्पति के चंद्रमाओं पर जीवन की खोज करना
- शुक्र ग्रह के वायुमंडल और भूवैज्ञानिक संरचना का विस्तृत अध्ययन करना
- शनि के छल्लों की उत्पत्ति का पता लगाना
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन का प्राथमिक उद्देश्य शुक्र ग्रह के घने वायुमंडल, उसकी सतह की भूवैज्ञानिक संरचना और संभावित ज्वालामुखीय गतिविधियों का विस्तृत अध्ययन करना है। यह शुक्र के 'रनअवे ग्रीनहाउस प्रभाव' को समझने में भी मदद करेगा।
Q3. इस मिशन में कौन से दो मुख्य घटक शामिल हैं?
- एक रोवर और एक लैंडर
- एक ऑर्बिटर और एक वायुमंडलीय प्रोब
- एक टेलीस्कोप और एक रोबोटिक आर्म
- एक मानवयुक्त कैप्सूल और एक डॉकिंग मॉड्यूल
Explanation: 'शुक्रयान-2' मिशन में एक ऑर्बिटर शामिल है जो शुक्र की कक्षा में रहकर दूरस्थ संवेदन करेगा, और एक वायुमंडलीय प्रोब जो शुक्र के घने वायुमंडल में प्रवेश करके सीधे डेटा एकत्र करेगा। यह संयोजन विस्तृत अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Q4. शुक्रयान-2 मिशन के तहत शुक्र की सतह का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्रण करने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाएगा?
- ऑप्टिकल टेलीस्कोप
- सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR)
- एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर
- गामा-रे बर्स्ट डिटेक्टर
Explanation: शुक्र की सतह घने बादलों से ढकी होने के कारण ऑप्टिकल टेलीस्कोप से सीधे नहीं देखी जा सकती। इसलिए, 'शुक्रयान-2' में सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) का उपयोग किया जाएगा, जो बादलों के माध्यम से प्रवेश करके सतह का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मानचित्रण कर सकता है।
Q5. ISRO का पहला शुक्र मिशन, 'शुक्रयान-1', किस वर्ष लॉन्च किया गया था?
- 2018
- 2020
- 2022
- 2024
Explanation: ISRO का पहला शुक्र मिशन, 'शुक्रयान-1', 2024 में लॉन्च किया गया था। 'शुक्रयान-2' इसी विरासत को आगे बढ़ाता है और शुक्र के बारे में और अधिक विस्तृत जानकारी जुटाने का लक्ष्य रखता है।
How to Prepare Science & Technology for Government Exams — ISRO का 'शुक्रयान-2' मिशन लॉन्च: शुक्र ग्रह के वा…
For Railway exams, make flashcards for every major ISRO launch — name, payload, purpose, date. These repeat frequently.
For SSC, focus on defence acquisitions and their strategic significance rather than technical specs.
For UPSC, connect every scientific development to policy — climate targets, digital India, health policy.
Related Current Affairs
Test Your Knowledge on Today's Current Affairs
10 questions · 10 minutes · Based on today's GK updates. See how prepared you really are.
Start Daily Quiz