संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर नवीनतम प्रगति: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का संवैधानिक महत्व
भारत की संसद ने हाल ही में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया है, जो लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। यह एक ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन है जिसका उद्देश्य विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है। हालांकि, इसका कार्यान्वयन अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही होगा।
2-Minute Summary (TL;DR)
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023, भारत का 106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम है।
- यह लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करता है।
- यह आरक्षण अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी लागू होगा।
- आरक्षण 15 वर्षों की अवधि के लिए लागू होगा, जिसे संसद कानून द्वारा बढ़ा सकती है।
- यह अधिनियम अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा।
- संविधान में नए अनुच्छेद 330A, 332A और 334A जोड़े गए हैं।
- विधेयक को 19 सितंबर, 2023 को लोकसभा में और 21 सितंबर, 2023 को राज्यसभा में पारित किया गया था।
- स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) में महिलाओं के लिए आरक्षण 73वें और 74वें संशोधन (1992) के तहत पहले से ही लागू है।
- यह अधिनियम भारत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
Why In News
यह विधेयक हाल ही में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया है और इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल गई है, जिससे यह एक अधिनियम बन गया है। यह घटनाक्रम भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और विधायी निकायों में उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसका कार्यान्वयन भविष्य की जनगणना और परिसीमन के बाद होगा, जो इसे वर्तमान में चर्चा का विषय बनाए हुए है।
Syllabus Connection
छात्रों को संवैधानिक संशोधन प्रक्रिया, विधायी निकायों में प्रतिनिधित्व के मुद्दे, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है? | लोकसभा, विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण। | विधायी निकायों में लैंगिक समानता और प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास। |
| संवैधानिक संशोधन | 106वां संशोधन अधिनियम। | भारत में संवैधानिक संशोधन प्रक्रिया और उसके महत्व को समझना। |
| कब लागू होगा? | अगली जनगणना और परिसीमन के बाद। | कार्यान्वयन में देरी के कारण और इसके संभावित प्रभाव। |
| जोड़े गए अनुच्छेद | 330A, 332A, 334A। | संवैधानिक प्रावधानों का विश्लेषण और उनका प्रभाव। |
| महत्व | महिला सशक्तिकरण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि। | भारतीय लोकतंत्र पर दीर्घकालिक सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव और चुनौतियाँ। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | Very High | 15–25 | Polity is a core UPSC subject. Both Prelims and Mains test constitutional provisions in depth. |
| State PCS / PSC | High | 5–10 | State PCS papers test both central and state government structures. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | High | 4–6 | Questions on constitutional amendments, Parliament, and schemes appear in every SSC paper. |
What to Memorize from This Topic
- Article numbers related to the topic (e.g., Article 356 for President's Rule)
- Constitutional bodies: composition, tenure, appointment authority
- Recent amendments and their impact
- Supreme Court / High Court judgements mentioned in news
- Government schemes: ministry, launch year, beneficiaries
Practice Questions
Q1. नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 भारतीय संविधान का कौन सा संशोधन अधिनियम बना है?
- 103वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 104वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 105वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
Explanation: नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद भारतीय संविधान का 106वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम बन गया है। यह भारत के विधायी इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
Q2. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं?
- 25%
- 30%
- 33%
- 50%
Explanation: यह अधिनियम लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए कुल सीटों का एक-तिहाई (33%) आरक्षित करने का प्रावधान करता है। यह आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी लागू होगा।
Q3. नारी शक्ति वंदन अधिनियम कब से प्रभावी होगा?
- अधिनियम के पारित होने की तिथि से
- अगले आम चुनाव से
- अगली जनगणना के आंकड़ों के प्रकाशन और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद
- राज्य सरकारों की अधिसूचना के बाद
Explanation: इस अधिनियम का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यह तत्काल लागू नहीं होगा। यह अगली जनगणना के आंकड़ों के प्रकाशन और उसके बाद होने वाले परिसीमन अभ्यास के बाद ही प्रभावी होगा, जिससे इसके कार्यान्वयन में कुछ समय लग सकता है।
Q4. नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने भारतीय संविधान में कौन से नए अनुच्छेद जोड़े हैं?
- अनुच्छेद 326A, 327A, 328A
- अनुच्छेद 330A, 332A, 334A
- अनुच्छेद 335A, 336A, 337A
- अनुच्छेद 338A, 339A, 340A
Explanation: नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने भारतीय संविधान में तीन नए अनुच्छेद जोड़े हैं: अनुच्छेद 330A (लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण), अनुच्छेद 332A (राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण) और अनुच्छेद 334A (आरक्षण की अवधि और कार्यान्वयन)।
Q5. स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) में महिलाओं के लिए आरक्षण किस संवैधानिक संशोधन अधिनियम के तहत लागू किया गया था?
- 42वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 61वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 73वां और 74वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
- 86वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम
Explanation: स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगरपालिकाओं) में महिलाओं के लिए आरक्षण 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से पहले ही लागू किया जा चुका है। इन संशोधनों ने महिलाओं को इन निकायों में कम से कम एक-तिहाई सीटें आरक्षित की हैं।
How to Prepare Indian Polity & Governance for Government Exams
Map every news item to an Article or provision in the Constitution. This is what UPSC Prelims directly tests.
For SSC and Railway, focus on the practical side — who appoints whom, term lengths, and what each body does.
Note the date and context of any constitutional amendment or ordinance. Questions are often framed around the 'first time' or 'most recent' event.
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