भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड के विस्तार की घोषणा
भारतीय रिजर्व बैंक ने 2 जून, 2026 को डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड के राष्ट्रव्यापी विस्तार की घोषणा की, जिसमें देश के सभी प्रमुख बैंकों को शामिल किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य भारत में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है। यह विस्तार केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के परीक्षण चरण की सफलता के बाद किया गया है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2 जून, 2026 को डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड के राष्ट्रव्यापी विस्तार की घोषणा की।
- यह विस्तार देश के सभी प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों को कवर करेगा और 200 से अधिक शहरों में उपलब्ध होगा।
- थोक खंड (e₹-W) के लिए पायलट प्रोजेक्ट 1 नवंबर, 2022 को शुरू किया गया था।
- खुदरा खंड (e₹-R) के लिए पायलट प्रोजेक्ट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू किया गया था।
- डिजिटल रुपया भारतीय रुपये का एक डिजिटल रूप है और केंद्रीय बैंक द्वारा जारी कानूनी निविदा है।
- RBI अधिनियम, 1934 को संशोधित कर RBI को डिजिटल रुपया जारी करने का अधिकार दिया गया है।
- इसका उद्देश्य भुगतान दक्षता बढ़ाना, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और नकदी पर निर्भरता कम करना है।
- RBI डिजिटल रुपये के लिए ऑफलाइन कार्यक्षमता का परीक्षण करेगा, जिससे इंटरनेट के बिना भी लेनदेन संभव होगा।
- यह भारत को CBDC अपनाने और लागू करने में अग्रणी देशों में से एक बनाता है।
- डिजिटल रुपया UPI से भिन्न है; UPI एक भुगतान इंटरफेस है, जबकि e-Rupee स्वयं एक मुद्रा है।
Why In News
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2 जून, 2026 को डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड को पूरे देश में विस्तारित करने की घोषणा की है। यह घोषणा पायलट परियोजनाओं की सफलता और CBDC के संभावित लाभों पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद की गई है, जिससे यह वित्तीय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया है।
Syllabus Connection
यह समाचार केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) और भारत में डिजिटल भुगतान के विकास से संबंधित है। छात्रों को मौद्रिक नीति, वित्तीय समावेशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था के व्यापक प्रभावों को समझना चाहिए।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है? | RBI द्वारा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड का राष्ट्रव्यापी विस्तार। | CBDC का महत्व, वित्तीय समावेशन पर प्रभाव, मौद्रिक नीति के उपकरण। |
| कब? | 2 जून, 2026 को घोषणा; पायलट प्रोजेक्ट दिसंबर 2022 में शुरू। | चरणबद्ध कार्यान्वयन का महत्व, वैश्विक CBDC विकास की समय-सीमा। |
| क्यों? | भुगतान दक्षता, वित्तीय समावेशन, नकदी पर निर्भरता कम करना। | अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव, संप्रभुता, साइबर सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताएं। |
| कौन? | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पहल; सभी प्रमुख वाणिज्यिक बैंक शामिल। | RBI की भूमिका, सरकार का समर्थन, फिनटेक कंपनियों की भागीदारी। |
| कैसे अलग? | UPI एक इंटरफेस है, e-Rupee स्वयं एक मुद्रा है। | डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में e-Rupee का स्थान, अन्य डिजिटल भुगतान विधियों से तुलना। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Medium | 2–4 | Budget highlights, GDP data, and government economic schemes appear in SSC CGL GK section. |
| Banking (IBPS / SBI) | Very High | 6–10 | RBI policy, inflation, CRR/SLR, monetary committee decisions — banking exams test the full spectrum. |
| UPSC / State PCS | High | 10–20 | Economy is a core UPSC subject. Economic Survey, budget, and policy changes are heavily tested. |
| State PCS / PSC | High | 4–8 | State budget, MSME, agriculture policy, and banking data are common in state PCS papers. |
Key Facts to Remember: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड के विस्तार की घोषणा
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2 जून, 2026 को डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड के राष्ट्रव्यापी विस्तार की घोषणा की।
- यह विस्तार देश के सभी प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों को कवर करेगा और 200 से अधिक शहरों में उपलब्ध होगा।
- थोक खंड (e₹-W) के लिए पायलट प्रोजेक्ट 1 नवंबर, 2022 को शुरू किया गया था।
- खुदरा खंड (e₹-R) के लिए पायलट प्रोजेक्ट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू किया गया था।
- डिजिटल रुपया भारतीय रुपये का एक डिजिटल रूप है और केंद्रीय बैंक द्वारा जारी कानूनी निविदा है।
- RBI अधिनियम, 1934 को संशोधित कर RBI को डिजिटल रुपया जारी करने का अधिकार दिया गया है।
- इसका उद्देश्य भुगतान दक्षता बढ़ाना, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और नकदी पर निर्भरता कम करना है।
- RBI डिजिटल रुपये के लिए ऑफलाइन कार्यक्षमता का परीक्षण करेगा, जिससे इंटरनेट के बिना भी लेनदेन संभव होगा।
- यह भारत को CBDC अपनाने और लागू करने में अग्रणी देशों में से एक बनाता है।
- डिजिटल रुपया UPI से भिन्न है; UPI एक भुगतान इंटरफेस है, जबकि e-Rupee स्वयं एक मुद्रा है।
Practice Questions
Q1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड के राष्ट्रव्यापी विस्तार की घोषणा किस तिथि को की गई?
- 1 नवंबर, 2022
- 1 दिसंबर, 2022
- 2 जून, 2026
- 1 अप्रैल, 2023
Explanation: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2 जून, 2026 को डिजिटल रुपया (e-Rupee) के खुदरा खंड के राष्ट्रव्यापी विस्तार की घोषणा की। थोक और खुदरा खंड के पायलट प्रोजेक्ट क्रमशः 1 नवंबर, 2022 और 1 दिसंबर, 2022 को शुरू हुए थे।
Q2. डिजिटल रुपया (e-Rupee) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- यह भारतीय रुपये का एक डिजिटल रूप है और कानूनी निविदा है।
- यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया जाता है।
- यह UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के समान एक भुगतान इंटरफेस है।
- इसका उद्देश्य भुगतान दक्षता बढ़ाना और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है।
Explanation: डिजिटल रुपया स्वयं एक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) है, जबकि UPI एक भुगतान इंटरफेस है जो बैंक खातों के बीच लेनदेन की सुविधा प्रदान करता है। वे दोनों डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देते हैं लेकिन उनकी प्रकृति भिन्न है।
Q3. RBI अधिनियम, 1934 में किए गए संशोधन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- वाणिज्यिक बैंकों को अपनी डिजिटल मुद्रा जारी करने की अनुमति देना।
- RBI को डिजिटल रुपया जारी करने का कानूनी अधिकार प्रदान करना।
- विदेशी मुद्रा विनिमय दरों को नियंत्रित करना।
- भारत में सभी क्रिप्टोकरेंसी को वैध बनाना।
Explanation: RBI अधिनियम, 1934 को संशोधित किया गया है ताकि भारतीय रिजर्व बैंक को कानूनी रूप से डिजिटल रुपया (CBDC) जारी करने का अधिकार मिल सके। यह संशोधन केंद्रीय बैंक को डिजिटल मुद्रा के क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाने में सक्षम बनाता है।
Q4. डिजिटल रुपये के खुदरा खंड के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कब हुई थी?
- अक्टूबर 2022
- नवंबर 2022
- दिसंबर 2022
- जनवरी 2023
Explanation: खुदरा खंड के लिए डिजिटल रुपया (e₹-R) का पायलट प्रोजेक्ट 1 दिसंबर, 2022 को शुरू किया गया था। थोक खंड का पायलट प्रोजेक्ट 1 नवंबर, 2022 को शुरू हुआ था।
Q5. डिजिटल रुपये के संभावित लाभों में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है?
- भुगतान प्रणाली में दक्षता में वृद्धि।
- वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।
- मौद्रिक नीति के संचालन में नए उपकरण।
- निजी क्रिप्टोकरेंसी की अस्थिरता को बढ़ाना।
Explanation: डिजिटल रुपया एक केंद्रीय बैंक द्वारा जारी संप्रभु मुद्रा है, जो निजी क्रिप्टोकरेंसी की अस्थिरता से अर्थव्यवस्था को बचाने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद करता है। यह निजी क्रिप्टोकरेंसी की अस्थिरता को बढ़ाता नहीं है, बल्कि इसके विपरीत प्रभाव डालता है।
How to Prepare Economy & Finance for Government Exams — भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा डिजिटल रुपया (e-R…
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