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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: डिजिटल युग में 'भूल जाने का अधिकार' (Right to be Forgotten)
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि निजता के अधिकार के तहत 'भूल जाने का अधिकार' एक मौलिक अधिकार का हिस्सा है, विशेष रूप से संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के मामले में।
Key Points for Quick Revision
- सुप्रीम कोर्ट ने 'भूल जाने के अधिकार' को अनुच्छेद 21 के तहत मान्यता दी।
- यह अधिकार निजता के अधिकार का एक हिस्सा है।
- इसका उद्देश्य इंटरनेट से पुरानी या हानिकारक व्यक्तिगत जानकारी को हटाना है।
- न्यायालय ने सूचना के अधिकार और निजता के अधिकार के बीच संतुलन पर जोर दिया।
- यह निर्णय डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम के कार्यान्वयन को प्रभावित करेगा।
Practice Questions
Q1. 'भूल जाने का अधिकार' (Right to be Forgotten) भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत आता है?
- अनुच्छेद 14
- अनुच्छेद 19
- अनुच्छेद 21
- अनुच्छेद 25
Explanation: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, यह अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत निजता के अधिकार का हिस्सा है।
Q2. किस ऐतिहासिक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था?
- केशवानंद भारती मामला
- के.एस. पुट्टस्वामी मामला
- मेनका गांधी मामला
- गोलकनाथ मामला
Explanation: 2017 के के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया गया था।