केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 'राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना' (NUREGS) को मंजूरी: शहरी गरीबों के लिए रोजगार के अवसर
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना' (NUREGS) को अपनी मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और कमजोर परिवारों को वित्तीय सहायता और आजीविका सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रति वर्ष न्यूनतम 100 दिनों का गारंटीशुदा रोजगार उपलब्ध कराना है। यह पहल शहरी बेरोजगारी से निपटने और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2-Minute Summary (TL;DR)
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना' (NUREGS) को मंजूरी दी।
- यह योजना शहरी गरीब परिवारों को प्रति वर्ष न्यूनतम 100 दिनों का गारंटीशुदा मजदूरी रोजगार प्रदान करेगी।
- योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के शारीरिक श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्य आवेदन कर सकते हैं।
- प्रारंभिक आवंटन ₹30,000 करोड़ है, जिसमें केंद्र और राज्य का वित्तपोषण अनुपात 75:25 (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10) है।
- मजदूरी का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किया जाएगा, न्यूनतम मजदूरी ₹250 प्रति दिन निर्धारित है।
- योजना के तहत कार्य शहरी बुनियादी ढांचे के विकास, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित होंगे।
- पहले चरण में, यह योजना देश के 200 सबसे अधिक शहरी गरीब जिलों में लागू की जाएगी।
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेंगे।
- योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए डिजिटल निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) का प्रावधान है।
Why In News
20 मई, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औपचारिक रूप से 'राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना' (NUREGS) को अपनी स्वीकृति प्रदान की है। यह मंजूरी शहरी क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी और कोविड-19 महामारी के बाद से कमजोर हुए शहरी गरीबों की आजीविका को मजबूत करने की आवश्यकता के जवाब में आई है, जिससे यह योजना तत्काल समाचारों में है।
Syllabus Connection
यह योजना सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दों, विशेषकर गरीबी और शहरी बेरोजगारी से संबंधित सामाजिक न्याय के पहलुओं से संबंधित है।
Prelims vs Mains — What to Focus On
| Aspect | Prelims | Mains |
|---|---|---|
| क्या है | शहरी गरीबों के लिए 100 दिन का गारंटीशुदा रोजगार। | शहरी बेरोजगारी, गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास में योजना की भूमिका। |
| कब | 20 मई, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित। | महामारी के बाद शहरी आजीविका संकट के संदर्भ में इसकी समयबद्धता और आवश्यकता। |
| कौन | केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित; शहरी स्थानीय निकाय नोडल एजेंसी। | केंद्र-राज्य सहयोग, ULBs की क्षमता निर्माण और नागरिक भागीदारी का महत्व। |
| वित्तपोषण | ₹30,000 करोड़ प्रारंभिक आवंटन; 75:25 केंद्र-राज्य अनुपात। | योजना की वित्तीय स्थिरता, राज्यों पर बोझ और दीर्घकालिक वित्तीय प्रभाव। |
| प्रभाव | आय सुरक्षा, शहरी बुनियादी ढांचा विकास, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा। | शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान, ग्रामीण-शहरी प्रवास पर प्रभाव और सतत शहरी विकास। |
How This Topic is Tested in Competitive Exams
| Exam | Frequency | Approx. Marks | What Gets Asked |
|---|---|---|---|
| UPSC / State PCS | High | 8–12 | UPSC tests implementation, target beneficiaries, and outcomes — not just scheme names. |
| SSC (CGL / CHSL / MTS) | Very High | 5–8 | Government schemes are one of the most tested topics in SSC CGL and CHSL GK sections. |
| Banking (IBPS / SBI) | High | 4–6 | Financial inclusion schemes, Jan Dhan, PMSBY, and credit guarantee schemes are key banking exam topics. |
| Railway (RRB NTPC / Group D) | High | 4–7 | Central government welfare schemes are a consistent Railway GK topic. |
| State PCS / PSC | Very High | 6–10 | Both central and state schemes are tested extensively in state PCS papers. |
Key Facts to Remember: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 'राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना' (NUREGS) को मंजूरी: शहरी गरीबों के लिए रोजगार के अवसर
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 20 मई, 2026 को 'राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना' (NUREGS) को मंजूरी दी।
- यह योजना शहरी गरीब परिवारों को प्रति वर्ष न्यूनतम 100 दिनों का गारंटीशुदा मजदूरी रोजगार प्रदान करेगी।
- योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के शारीरिक श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्य आवेदन कर सकते हैं।
- प्रारंभिक आवंटन ₹30,000 करोड़ है, जिसमें केंद्र और राज्य का वित्तपोषण अनुपात 75:25 (पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10) है।
- मजदूरी का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किया जाएगा, न्यूनतम मजदूरी ₹250 प्रति दिन निर्धारित है।
- योजना के तहत कार्य शहरी बुनियादी ढांचे के विकास, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित होंगे।
- पहले चरण में, यह योजना देश के 200 सबसे अधिक शहरी गरीब जिलों में लागू की जाएगी।
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेंगे।
- योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए डिजिटल निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) का प्रावधान है।
Practice Questions
Q1. राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना (NUREGS) के तहत शहरी गरीब परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष में कितने दिनों का न्यूनतम गारंटीशुदा रोजगार प्रदान किया जाएगा?
- 50 दिन
- 75 दिन
- 100 दिन
- 120 दिन
Explanation: राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना (NUREGS) का मुख्य उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और कमजोर परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष न्यूनतम 100 दिनों का गारंटीशुदा मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराना है। यह योजना शहरी बेरोजगारी से निपटने और आजीविका सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
Q2. NUREGS के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तपोषण का सामान्य अनुपात क्या है?
- 50:50
- 60:40
- 75:25
- 90:10
Explanation: राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना के लिए सामान्य वित्तपोषण अनुपात केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 75:25 है। हालांकि, पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र का योगदान 90% होगा, जिससे इन क्षेत्रों को विशेष सहायता मिल सके।
Q3. NUREGS के तहत मजदूरी का भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किया जाएगा। योजना के तहत प्रति दिन न्यूनतम मजदूरी कितनी निर्धारित की गई है?
- ₹150
- ₹200
- ₹250
- ₹300
Explanation: NUREGS के तहत मजदूरी दरें संबंधित राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दरों के अनुरूप होंगी, लेकिन यह किसी भी स्थिति में ₹250 प्रति दिन से कम नहीं होगी। यह प्रावधान श्रमिकों को उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
Q4. राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना (NUREGS) के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी कौन होगी?
- ग्राम पंचायतें
- जिला परिषदें
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs)
- राज्य सरकार के श्रम विभाग
Explanation: NUREGS का कार्यान्वयन शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के अधिकार क्षेत्र में किया जाएगा। शहरी स्थानीय निकाय योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेंगे, जिसमें पंजीकरण, कार्य आवंटन और मजदूरी भुगतान का प्रबंधन शामिल होगा।
Q5. NUREGS के संदर्भ में, यदि पंजीकरण के कितने दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा?
- 7 दिन
- 10 दिन
- 15 दिन
- 30 दिन
Explanation: राष्ट्रीय शहरी रोजगार गारंटी योजना के तहत, पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं होता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ते का हकदार होगा, जो योजना की गारंटीशुदा प्रकृति को दर्शाता है।
How to Prepare Government Schemes for Government Exams — केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 'राष्ट्रीय शहरी रोजगार…
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